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6 बार सांप ने डसा, मगरमच्छ के हमले में गंवाई अंगुली, मौत का सामना करके भी कोटा के रेसक्यूर बचा रहे लोगों की जान

Kota Rescuer Story: कोटा के रेस्क्यूअर अपनी जान जोखिम में डालकर सांप, मगरमच्छ और अन्य खतरनाक जीवों से लोगों को बचाने में जुटे हैं। कई रेस्क्यूअर सर्पदंश और मगरमच्छ के हमलों का शिकार होने के बावजूद रेस्क्यू कार्य जारी रखे हुए हैं लेकिन उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षण और बीमा जैसी सुविधाओं की कमी है।
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कोटा

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Akshita Deora

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शैलेन्द्र तिवारी

Aug 10, 2026

Rescuer Story

रेस्क्यूर्स का फोटो: पत्रिका

शैलेन्द्र तिवारी

घर में सांप निकल आता है, कोई नदी या तालाब में डूबने लगता है या आबादी में मगरमच्छ आ जाए तो सबसे पहले जिसकी तलाश होती है, वह रेस्क्यूअर होता है। ये वे गुमनाम नायक हैं, जो बिना अपनी जान की परवाह किए दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए हर खतरे से मुकाबला करते हैं। विडंबना यह है कि ये रेस्क्यूअर खुद से बेपरवाह जान हथेली पर रखकर गैरों की जान बचाने व जीवों का संरक्षण करने में जुटे हैं। हाल ही एक रेस्क्यूअर को कोबरा ने डस लिया। इस घटना ने एक बार फिर उन जोखिमों को सामने ला दिया, जिनका सामना रेस्क्यूअर आए दिन करते हैं।

कोटा शहर में ऐसे कई रेस्क्यूअर हैं, जो दिन हो या रात, एक फोन कॉल मिलते ही मौके के लिए रवाना हो जाते हैं। उद्देश्य यह कि किसी घर का चिराग ने बुझे और बेजुबान जीव की भी जान बचाई जा सके। इन सबके बावजूद इनकी ओर ध्यान देने वाला कोई नहीं है। सीमित व देशी संसाधनों से ये लोगों की जान को सुरक्षित करने में जुटे हैं। कई को तो औपचारिक प्रशिक्षण भी प्राप्त नहीं है। जहरीले सांप, मगरमच्छ, अजगर, मधुमक्खियों के झुंड, कुओं में गिरे पशु और पानी में फंसे लोगों के रेस्क्यू जैसी चुनौतियों से रोज टकरा रहे हैं।

केस 1: छह बार सांप ने डसा, मगरमच्छ के हमले में गंवाई अंगुली

रेस्क्यूअर एवं गोताखोर विष्णु शृंगी की जिंदगी इसका उदाहरण है कि रेस्क्यू का कार्य कितना जोखिम भरा है। उन्होंने करीब 27 सालों तक सांपों और मगरमच्छों का रेस्क्यू किया। इस दौरान उन्हें पांच बार कोबरा और एक बार रसेल वाइपर ने डसा। हर बार उनकी जान पर बन आई और कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहकर उपचार कराना पड़ा। सिर्फ सांप ही नहीं, एक अभियान के दौरान मगरमच्छ ने उन पर हमला कर दिया, जिससे उनके हाथ की एक अंगुली डैमेज हो गई। इन हादसों का असर उनके हाथों पर भी पड़ा और आज उनकी चार अंगुलियां सामान्य स्थिति में नहीं हैं।

केस 2 : कोबरा ने डसा, फिर भी पूरा किया रेस्क्यू


इटावा क्षेत्र के स्नेक कैचर हयात खान ‘टाइगर’ हाल ही में रेस्क्यू के दौरान कोबरा के दंश का शिकार हो गए। डोरली गांव में करीब पांच फीट लंबे कोबरा के निकलने की सूचना पर वे टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे। रेस्क्यू के दौरान जैसे ही उन्होंने कोबरा को पकडऩे का प्रयास किया, सांप ने उनके हाथ पर डस लिया। दंश लगने के बावजूद हयात खान ने धैर्य नहीं खोया। उन्होंने पहले कोबरा का सुरक्षित रेस्क्यू पूरा किया, ताकि किसी ग्रामीण को नुकसान नहीं पहुंचे। इसके बाद साथी उन्हें पहले इटावा फिर कोटा अस्पताल ले आए। जहां उनका उपचार किया गया।

सर्पदंश…जीवनभर झेलते हैं दंश

सर्पदंश की पीड़ा अस्पताल तक सीमित नहीं रहती, बल्कि कई बार लंबे समय तक असर रह सकता है। जहर रक्त या तंत्रिका तंत्र के माध्यम से पूरे शरीर में फैलता है, जिससे दर्द, सूजन, अत्यधिक रक्तस्राव, कमजोरी, लकवा जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

झेलनी पड़ती है पीड़ा

एक से अधिक बार सर्पदंश से पीडित होने पर बार-बार एंटी-वेनम दिए जाने से लीवर, किडनी व अन्य अंगों की कार्यक्षमता कमजोर होने का खतरा रहता है। यही कारण है कि सर्पदंश से उबरने के बाद भी अनेक रेस्क्यूअर्स को लंबे समय तक शारीरिक तकलीफ और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

सांप पकड़ने के लिए ये चाहिए

  • स्नेक कैचर : लंबी मेटल या एल्युमिनियम की चिमटा-नुमा छड़ी।
  • स्नेक हुक : आगे से मुड़ा हुआ लोहे का हुक।
  • सांप रखने का थैला : मोटे, मजबूत और हवादार सूती या जूट के कपड़े का विशेष थैला।
  • सुरक्षात्मक गियर : बाइट-प्रूफ दस्ताने तथा पैरों की सुरक्षा के लिए स्नेक गेटर्स।

मगरमच्छ को पकड़ने के लिए ये चाहिए

  • कैच पोल/नोस पोल : सिलिकॉन या प्लास्टिक-कोटेड स्टील केबल वाला मजबूत डंडा।
  • हेवी-ड्यूटी नेट : मजबूत सिल्क या नायलॉन रस्सियों से बना विशेष जाल।
  • जॉ-सिक्योरिंग स्ट्रैप व रस्सियां : मगरमच्छ के जबड़ों को सुरक्षित रूप से बांधने के लिए।
  • कपड़ा या बोरा : मगरमच्छ की आंखों को ढकने के लिए।
  • ट्रैपिंग केज : ऑटो-शटर गेट वाला भारी लोहे का पिंजरा।

सुविधाओं से मोहताज

  • पर्याप्त सुरक्षा उपकरण
  • आधुनिक एवं नियमित प्रशिक्षण
  • जान के जोखिम को कवर करने वाला बीमा
  • दुर्घटना की स्थिति में त्वरित एवं बेहतर उपचार की सुविधा

मगरमच्छ इत्यादि को पकड़ने के लिए आमतौर पर विभाग के कर्मचारी जाते हैं। सर्प इत्यादि को पकड़ने के लिए वायलेंटियर्स होते हैं, जिन्हें लोग बुलवाते हैं। विभागीय स्तर पर कर्मचारियों को आवश्यक साधन उपलब्ध करवाते हैं।
अपूर्व कृष्ण श्रीवास्तव, उपवन संरक्षक, कोटा