कोटा

MP और राजस्थान विवाद: पहले परिवार की प्यास बुझांएगे बाद में पडौसी को पानी पिलाएंगे

कोटा. मध्यप्रदेश व राजस्थान का नहरी पानी विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा।

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Nov 21, 2017

मध्यप्रदेश व राजस्थान का नहरी पानी विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा। मध्यप्रदेश जल संसाधन विभाग द्वारा गांधी सागर से लगातार 22 हजार क्यूसेक पानी की निकासी तो की जा रही है। साथ में मांग के मुताबिक पानी उपलब्ध कराने के लिए राजस्थान के सीएडी प्रशासन से लगातार सम्पर्क किया जा रहा है। पहले तो मध्यप्रदेश जल संसाधन विभाग द्वारा पार्वती एक्वाडक्ट पर 3900 क्यूसेक पानी की मांग की जा रही थी। धीरे-धीरे एमपी ने मांग घटाकर 3400, 3200 और अब 3000 क्यूसेक कर दी है। इसकी एवज में सीएडी प्रशासन द्वारा दाईं मुख्य नहर से पार्वती एक्वाडक्ट पर 2830 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।

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आरपीएस से 15700 क्यूसेक पानी की निकासी

गांधी सागर बांध से लगातार 22000 क्यूसेक पानी की लगातार निकासी की जा रही है। ऐसे में राणा प्रताप सागर बांध का जल स्तर नियंत्रित करते हुए जल संसाधन विभाग द्वारा 15700 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है। इससे जवाहर सागर व कोटा बैराज का जल स्तर नियंत्रित करते हुए दाईं मुख्य नहर में 6225, बाईं मुख्य नहर में 1500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। दाईं मुख्य नहर से पार्वती एक्वाडक्ट पर कभी 2766 तो कभी 2830 क्यूसेक पानी पहुंचाया जा रहा है। शेष पानी हाड़ौती के किसानों को दिया जा रहा है। साथ ही हाड़ौती में जिन क्षेत्रों के किसानों ने पलेवा कर लिया। उस क्षेत्र की नहर बंद कर मध्यप्रदेश का जल प्रवाह बढ़ाया जा रहा है।

सीएडी सिंचाई खंड दाईं मुख्य नहर अधीक्षण अभियंता एसके सामारिया का कहना है कि मध्यप्रदेश की 3000 क्यूसेक पानी की मांग आ रही है। इसकी एवज में 2830 क्यूसेक पानी दिया जा रहा है। राजस्थान के जो किसान पलेवे से निपट गए, उस क्षेत्र की नहरें भी बंद कर एमपी को पानी दिया जा रहा है। जल्द ही एमपी को उनकी मांग के मुताबिक पानी उपलब्ध करवा दिया जाएगा।

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Updated on:
21 Nov 2017 05:37 pm
Published on:
21 Nov 2017 05:35 pm
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