94 कॉलेजों के दवाब में सरकार ने प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले की जिम्मेदारी आरटीयू से छीनकर सेंटर फॉर इलेक्ट्रॉनिक गर्वनेंस को सौंपी।
विनीत सिंह . निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों की लॉबिंग राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू) पर भारी पड़ गई। 94 कॉलेजों की इस लॉबी के दवाब में आकर सरकार ने प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले की जिम्मेदारी आरटीयू से छीनकर सेंटर फॉर इलेक्ट्रॉनिक गर्वनेंस (सीईजी) को सौंप दी है। अब सीईजी राजस्थान इंजीनियरिंग एडमिशन प्रॉसेस (रीप-2018) का आयोजन करवाएगा।
निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों की मनमानी रोकने को सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2015 में उनसे डायरेक्ट एडमिशन करने का अधिकार छीन लिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकारों को आदेश जारी किया कि वह सभी सरकारी और निजी कॉलेजों में केंद्रीयकृत दाखिला प्रक्रिया शुरू करे। प्रदेश में एक नोडल एजेंसी बनाई जाए और 15 अगस्त तक प्रवेश प्रक्रिया खत्म कर सितम्बर से हर हाल में पढ़ाई शुरू करा दी जाए।
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आखिरकार छीन ली रीप
दोनों ही साल बैक डोर दाखिला कराने में नाकाम रही प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों की लॉबी ने इस साल सरकार पर जमकर दवाब बनाया। इस दवाब में आकर सरकार ने वर्ष 2018 में रीप के आयोजन की जिम्मेदारी आरटीयू से छीनकर सेंटर फॉर इलेक्ट्रॉनिक गर्वनेंस (सीईजी) को सौंप दी। राजस्थान सरकार ने रीप की नोडल एजेंसी बदलने में तो खूब जल्दबाजी की, लेकिन अभी तक प्रवेश के नियम तय नहीं कर सकी है। इससे राजस्थान के इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला लेने की उम्मीद लगाए बैठे छात्र तय नहीं कर पा रहे हैं कि वह जेईई मेंस की परीक्षा दें या फिर रीप प्रवेश परीक्षा की तैयारी करें।
दाखिले के खेल पर लगी लगाम
सख्ती के बाद प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों ने आय के अन्य कोई स्रोत नहीं होने का हवाला देकर जब दोबारा सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो कोर्ट ने उन्हें मैनेजमेंट कोटे की 15 फीसदी सीटों पर सीधे दाखिला लेने की छूट दे दी। वह भी इस शर्त पर कि कॉलेज प्रबंधक 10 अगस्त तक इस कोटे से प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर पांच दिन के अंदर नोडल एजेंसी को उसकी जानकारी मुहैया करा देंगे। इसके बाद प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में परीक्षा से एक दिन पहले तक छात्रों को बीटेक में दाखिला देने के खेल पर लगाम लग गई।
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दबाव में आई सरकार
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राजस्थान सरकार ने वर्ष 2015 में दाखिलों की जिम्मेदारी बोर्ड ऑफ टेक्नीकल एज्युकेशन को दे दी, लेकिन तय समय पर दाखिला प्रक्रिया खत्म न होने के कारण राज्य सरकार को कोर्ट की फटकार खानी पड़ी। इसके बाद वर्ष 2016 और 2017 में यह जिम्मेदारी आरटीयू को सौंपी गई। इसे समय पर पूरा कर लिया गया, लेकिन सरकार के मंत्रियों और तकनीकी शिक्षा विभाग के अफसरों ने प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह खत्म होने के बाद दोनों ही बार प्राइवेट कॉलेजों में मैनेजमेंट कोटे से हुए 'बैक डोर एडमिशन को मंजूरी देने का दवाब बनाया, लेकिन रीप के संयोजकों ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया। विवाद बढऩे पर मामला कोर्ट भी गया।
सेंटर फॉर इलेक्ट्रानिक गर्वनेंस निदेशक डॉ. अविनाश पंवार ने बताया कि रीप 2018 के आयोजन की जिम्मेदारी सीईजी को दी है। अभी प्रवेश परीक्षा का शिड्यूल और प्रक्रिया तय नहीं हुई है। बोर्ड ऑफ टेक्नीकल एज्युकेशन के साथ बैठक होने के बाद ही यह तय हो पाएगा।