कोटा

Rajasthan: खाद के साथ दूसरे कृषि उत्पाद थोपे तो लाइसेंस होगा रद्द, सभी जिलों में कार्रवाई के निर्देश

राजस्थान में कृषि विभाग ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया है। खाद के साथ दूसरे उत्पाद जबरन थोपने की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रदेश के सभी जिलों में कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ FIR दर्ज कर लाइसेंस रद्द करने के निर्देश हैं।
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Updated: 26 Oct 2026, 8:23 PM IST
Fertilizer News
खाद की बोरियां (फोटो-पत्रिका)

कोटा। पंचायत चुनाव के बीच गांवों की चौपाल से लेकर चुनाव प्रचार तक खाद का मुद्दा गरमाने लगा है। किसानों को यूरिया-डीएपी के साथ जिंक, सल्फर और कीटनाशक खरीदने की कथित मजबूरी अब प्रत्याशियों के प्रचार के दौरान भी उठ रही हैं। कई जिलों में खाद आपूर्ति और जबरन अटैचमेंट की शिकायतों के बीच कृषि आयुक्तालय ने सख्ती बढ़ा दी है। अब खाद के साथ दूसरे उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करने पर दुकानदार ही नहीं, थोक विक्रेताओं और कंपनियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी। शिकायत मिलने पर 24 घंटे में प्रारंभिक कार्रवाई शुरू करनी होगी।

विभाग के पास यूरिया, डीएपी और अन्य अनुदानित उर्वरकों के साथ जिंक, सल्फर, कीटनाशक, जैव उर्वरक या अन्य कृषि उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य करने की शिकायतें आ रही हैं। बारां जिले में खाद की आपूर्ति को लेकर विवाद हो चुका है। इस पर कृषि आयुक्तालय एक्शन मोड में आ गया है। कुछ प्रत्याशी चुनाव प्रचार में भी इसे मुद्दा बना रहे हैं। हालात को देखते हुए कृषि आयुक्तालय ने उर्वरकों के साथ जिंक, सल्फर, कीटनाशक, जैव उर्वरक या अन्य कृषि उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य नहीं करने के निर्देशों की सख्ती से पालना कराने के आदेश जारी किए हैं।

गड़बड़ी करने वालों के लाइसेंस होंगे निरस्त

अब ऐसी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर केवल खुदरा विक्रेताओं ही नहीं, बल्कि संबंधित थोक विक्रेताओं तथा उर्वरक निर्माता एवं आपूर्तिकर्ता कंपनियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। अनियमितताओं की पुष्टि होने पर संबंधित विक्रेताओं एवं कंपनियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। प्रकरण की गंभीरता एवं विधिक प्रावधानों के अनुसार लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। एफआइआर दर्ज कराने की कार्रवाई भी की जा सकेगी।

सभी जिलों में कार्रवाई के निर्देश, अधिकारियों की भी तय होगी जिम्मेदारी

प्रदेश के सभी जिलों में विशेष निरीक्षण दल गठित कर उर्वरक कंपनियों, गोदामों, थोक एवं खुदरा विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों का नियमित एवं औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता, स्टॉक, बिक्री अभिलेखों, बिलों तथा अन्य कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री से संबंधित दस्तावेज की जांच की जाएगी। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि निरीक्षण, शिकायतों के निस्तारण एवं दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी

250 से अधिक विक्रेताओं पर कार्रवाई

'जबरन टैगिंग रोकने के लिए विशेष निरीक्षण दलों का गठन किया गया है। अब तक 250 से अधिक विक्रेताओं के विरुद्ध कार्रवाई की जा चुकी है। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि उर्वरकों की कालाबाजारी, निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली, जबरन टैगिंग अथवा अन्य अनियमितताओं की शिकायत संबंधित जिला कृषि कार्यालय में दर्ज कराएं।' -नरेश कुमार गोयल, कृषि आयुक्त

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