कोटा के सैटेलाइट अस्पताल में राजस्थान सरकार पीपीपी मोड पर फर्टिलिटी सेंटर खोलेगी। जिसके लिए निजी संस्था से एमओयू किया गया है।
अब कोटा में सरकारी स्तर पर भी टेस्ट ट्यूब बेबी एवं कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा भी मिलने लगेगी। इसके लिए चिकित्सा विभाग ने शहर के एक फर्टिलिटी सेंटर से एमओयू कर सेंटर बनाने का काम पीपीपी मोड पर सौंपा है। करीब एक करोड़ की लागत से यह सेंटर रामपुरा जिला अस्पताल परिसर में बनेगा। भवन का रिनोवेशन कार्य शुरू हो गया है। संभवत: सितम्बर अंत तक यहां ओपीडी शुरू हो जाएगी।
मिलेगा आधुनिक उपचार
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, इस सेंटर में आधुनिक मशीनों का प्रयोग किया जाएगा। यहां इंडोनेशिया, जापान से मशीनें आ चुकी हैं। सेंटर के रिवोनेशन के बाद यह मशीनें कोटा पहुंचेंगी। सेंटर में एम्ब्रेलॉजिस्ट, स्पेशलिस्ट चिकित्सक समेत दस जनों का स्टाफ रहेगा। मॉड्यूलर लैब का निर्माण भी होगा। निजी अस्पताल व लैबों में टेस्ट ट्यूब बेबी एवं कृत्रिम गर्भाधान कराने के लिए सवा लाख से ढाई लाख रुपए की फीस वसूली जाती है, जबकि सरकारी सेंटर की टेस्ट ट्यूब बेबी के लिए 60 हजार एवं कृत्रिम गर्भाधान के लिए 10 हजार रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है। अस्पताल की ओपीडी में ही यह फीस जमा करानी होगी।
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इसी महीने शुरू हो जाएगी ओपीडी
सरकारी क्षेत्र में फर्टिलिटी सेंटर खुलने के बाद बेहद कम खर्च पर महिलाओं में ट्यूब खराब होना, अण्डे नहीं बनना, प्रौढ़ अवस्था एवं पुरुषों में शुक्राणु कम होना या फिर नहीं होना जैसी समस्याओं से पीडि़त दम्पतियों को इलाज मिल सकेगा। ताकि उनके सूने आंगन में किलकारी गूंजा सके। विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. अर्शी इकबाल ने बताया कि कोटा जिला अस्पताल परिसर में टेस्ट ट्यूब बेबी एवं कृत्रिम गर्भाधान सेंटर की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। राज्य सरकार ने इसके लिए उनकी संस्था के साथ एमओयू किया है। जिसकी ओपीडी इसी माह शुरू कर दी जाएगी। रामपुरा जिला अस्पताल के पीएमओ जे. जेठवानी ने बताया कि पीपीपी मोड पर फर्टिलिटी सेंटर खोलने के लिए जिला अस्पताल में 1700 स्क्वायर फीट जमीन दी गई है। रिनोवेशन चल रहा है। काम खत्म होते ही फर्टिलिटी सेंटर खोल दिया जाएगा।