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पत्रिका स्थापना दिवस: पूरी दुनिया में हाड़ौती का जलवा, कोटा का पत्थर और बारां-बूंदी का धान विदेश में बन रहा हमारी पहचान

कोटा ढाई दशक पहले तक देश दुनिया में कोटा औद्योगिक नगरी के रूप में जाना जाता था। यहां लघु, वृहद् स्तर के कई उद्योग संचालित थे।
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Updated: 12 Mar 2018, 10:30 AM IST
Rajasthan Patrika Foundation Day

कोटा . कोटा ढाई दशक पहले तक देश दुनिया में कोटा औद्योगिक नगरी के रूप में जाना जाता था। यहां लघु, वृहद् स्तर के कई उद्योग संचालित थे। जिधर नजर दौड़ाओ, धुआं उगलती चिमनियां दिखती। लेकिन, 90 के दशक में ऐसा ग्रहण लगा कि एक के बाद एक वृहद् स्तर के उद्योगों पर ताले लटक गए। हजारों मजदूर, श्रमिक, कर्मचारी सड़क पर आ गए। शहर की माली हालत पतली हो गई। फिर, कोटा कोचिंग ने परचम लहरा दिया।

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कोटा स्टोन, सेंड स्टोन की दमक से लेकर बूंदी के चावल, कोटा के धनिया, लहसुन, डोरिया साड़ी, कचौरी, कड़के की धाक विदेशों तक है। यूरोपियन देशों में फुटपाथ पर कोटा स्टोन, सेंड स्टोन का फर्श नजर आता है। वहीं कोटा में संचालित वृहद् स्तरीय औद्योगिक इकाइयों में बनने वाला टायर यार्न, फेब्रिक यार्न विदेशों में रेसिंग कारों के टायर में काम आता है। बारां, बूंदी के धान की महक के दीवाने सऊदी अरब अमीरात, इंग्लैंड, अमरीका के लोग हैं। वहीं धनिये की खुशबू इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर, यूएई, श्रीलंका तक फैली है। कोटा डोरिया की बात करें तो इस उद्योग ने बांग्लादेश की फैशन डिजानर बीबी रसेल ने नई ऊंचाइयां दी।

पत्थर से साढ़े 3 लाख को रोजगार
हाड़ौती की धरा खनिज पदार्थों के लिहाज से भी समृद्ध है। यहां कोटा स्टोन, सेंड स्टोन की 1200 से अधिक खदानें हैं। वहीं कोटा स्टोन की 2500 से अधिक औद्योगिक इकाइयां। इन इकाइयों में 25 हजार से अधिक मजदूर, मुनीम कार्यरत हैं। साथ ही खदानों, औद्योगिक इकाइयों के क्षेत्र में लघु व्यवसाय कर करीब 25 हजार अन्य लोगों को रोजगार मिल रहा है। कुलजमा पत्थर उद्योग से हाड़ौती में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष साढ़े 3 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है।

ढाई गुना बढ़ जाएगा टर्नओवर
शहर के उद्यमियों, व्यापारियों और बाजार जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि हाड़ौती के चारों जिलों में संचालित वृहद्, लघु, अति लघु, सूक्ष्म स्तर के उद्योगों व शहर में अभी सालाना 4000 करोड़ से अधिक का कारोबार होता है। साल 2025 तक यह सालाना कारोबार 10 हजार करोड़ को पार कर जाएगा।

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