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चंद्रेसल मठ के महंत हत्याकांड में बड़ा खुलासा, पुजारी ने ही आरोपियों को करवाई थी रैकी, गेट भी बंद करवाया ताकि शक न हो

कोटा के चर्चित चंद्रेसल मठ महंत हत्याकांड की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया कि मठ से जुड़े पुजारी और चौकीदार ने न सिर्फ आरोपियों को अंदरूनी जानकारी दी, बल्कि वारदात से पहले रैकी भी करवाई।

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कोटा

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Akshita Deora

Jun 15, 2026

mahant murder case accused

पुजारी-चौकीदार और इनसेट में संत की फाइल फोटो: पत्रिका

Kota Mahant Devanand Murder Case: कोटा के चंद्रेसल मठ के महंत देवानंद हत्याकांड में पुलिस ने रविवार को दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एसपी तेजस्वनी गौतम ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में मठ में लंबे समय से रह रहा पुजारी नंदन वन उर्फ नन्हे कुमार तिवारी तथा पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग में कार्यरत स्मारक प्रचारक एवं चौकीदार महावीर प्रसाद पारेता शामिल हैं।

जांच में सामने आया है कि दोनों न केवल हत्याकांड की साजिश से वाकिफ थे, बल्कि इसकी योजना को अंजाम तक पहुंचाने में उनकी सक्रिय भूमिका भी रही। दोनों आरोपी मठ की संपत्ति और ट्रस्ट में प्रभाव और हिस्सेदारी चाहते थे। महंत देवानंद की सक्रियता उनके लिए बाधा बन रही थी। इसी कारण मुख्य साजिशकर्ता संतोष राय के साथ मिलकर पूरी योजना तैयार की गई।

ये भूमिका आई सामने

सीआइ अनिल कुमार टेलर ने बताया कि जांच में सामने आया कि वारदात से चार दिन पहले दोनों आरोपियों ने मुख्य आरोपियों को मठ बुलाकर रैकी करवाई थी। उन्होंने मठ की व्यवस्था, महंत की दिनचर्या, कमरों की स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी अहम जानकारी उपलब्ध करवाई। इतना ही नहीं, हत्या के बाद घटना को लूट और डकैती का रूप देने की भी योजना बनाई गई थी।

आरोपियों ने मुख्य हमलावरों को सलाह दी थी कि हत्या के बाद मठ की तिजोरी में तोड़फोड़ कर नकदी निकाल ली जाए और बाहर खड़े वाहन में आग लगा दी जाए, ताकि पुलिस का ध्यान दूसरी दिशा में चला जाए। जांच में ये भी खुलासा हुआ कि नंदनवन के कमरे की कुंडी बाहर से बंद करना भी पूर्व नियोजित योजना का हिस्सा था ताकि घटना के बाद उस पर किसी प्रकार का संदेह न हो।

2 साल बाद सेवानिवृत्त होने वाला था चौकीदार

पुलिस जांच में गिरफ्तार महावीर पारेता पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग में स्मारक प्रचारक (चौकीदार) के पद पर कार्यरत है। पुलिस के अनुसार उसकी सेवानिवृत्ति में महज दो वर्ष का समय शेष था, लेकिन इसके बावजूद वह संत देवानंद हत्याकांड की साजिश में शामिल पाया गया। जांच में सामने आया कि उसने मठ की गतिविधियों और व्यवस्थाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मुख्य आरोपियों तक पहुंचाई थीं।

पत्रिका ने कर दिया था खुलासा

उल्लेखनीय है कि राजस्थान पत्रिका ने रविवार को अपनी रिपोर्ट में मठ से जुड़े लोगों की संदिग्ध भूमिका की ओर संकेत करते हुए चौकीदार महावीर पारेता और संत नंदनवन के शक के घेरे में होने की जानकारी व देर रात इनकी गिरफ्तारी की खबर को प्रकाशित किया था। अब पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी के बाद पत्रिका की खबर पर मुहर लग गई है।