Operation Garuda Vyuh: कोटा सिटी पुलिस ने ऑपरेशन गरुड़ व्यूह के तहत एक बड़े गांजा तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। रेलवे कॉलोनी थाना पुलिस ने 8 किलो गांजा और चार तस्करों को गिरफ्तार किया, जो ओडिशा से गांजा सप्लाई करके शहर में बेचते थे।
Kota Police Big Action: कोटा सिटी पुलिस ने ऑपरेशन गरुड़ व्यूह के तहत बसों और ट्रेनों के माध्यम से हो रही गांजा तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का सिटी पुलिस ने खुलासा किया है। रेलवे कॉलोनी थाना पुलिस ने सुनियोजित कार्रवाई करते हुए चार गांजा तस्करों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से करीब 8 किलो गांजा जब्त किया है। खास बात यह है पुलिस ने पहली बार ‘चेन सिस्टम’ के जरिए शहर में गांजा सप्लाई के पूरे तंत्र को तोड़ा है।
पुलिस ने बताया कि उज्जैन निवासी दीपक उर्फ दीपू को रेलवे कॉलोनी थाना पुलिस ने 5 किलो गांजे के साथ गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि दीपक अकेला तस्कर नहीं है, बल्कि शहर में गांजा की पुड़िया बनाकर बेचने वाले तीन अन्य सप्लायर भी इससे जुड़े हुए थे। पुलिस ने घोड़ा बस्ती निवासी बाबू गुर्जर, नयापुरा निवासी श्याम उदयवाल और नयापुरा निवासी सिकंदर को गिरफ्तार किया है। उनके पास से क्रमश: डेढ़ किलो, डेढ़ किलो और एक किलो गांजा बरामद किया गया।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दीपक उर्फ दीपू बीते करीब एक साल से पत्नी के साथ रोटेदा रोड स्थित किराए के मकान में रह रहा था। वह पहले मजदूरी करता था और गांजा पीने का आदी था। मजदूरी के बाद गांजा पीना उसकी दिनचर्या बन चुकी थी। कुछ समय बाद उसने काम छोड़ दिया और घर पर रहकर गांजा पीने लगा।
यहीं से उसने छोटी-छोटी पुड़िया बनाकर बेचने का काम शुरू किया। शुरुआत में वह रोजाना 5 से 10 पुड़िया ही बेचता था, जिससे उस पर सीधी कार्रवाई करना मुश्किल था। हालांकि पुलिस को उसकी गतिविधियों पर शक हुआ और करीब छह माह पहले से उस पर निगरानी रखी जा रही थी। जैसे ही गांजा की बड़ी खेप आने की सूचना मिली,पुलिस ने उसको योजना बनाकर गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में दीपक ने चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने बताया कि पहले वह घोड़ा बस्ती निवासी बाबू गुर्जर से गांजा खरीदकर पीता था। बाद में उसने बाबू से 10-15 पुड़िया लेकर उन्हें बेचने की शुरुआत की। इसी दौरान बाबू ने उसकी पहचान ओडीशा निवासी रतन से करवाई।
इसके बाद दीपक सीधे ओडीशा से 10 से 15 किलो गांजा मंगवाने लगा। यह गांजा बसों और ट्रेनों के जरिए कोटा पहुंचता था। शहर में पहुंचने के बाद दीपक यह माल नयापुरा निवासी सिकंदर, उसके ससुर श्याम उदयवाल, घोड़ा बस्ती निवासी बाबू गुर्जर को सप्लाई करता था। ये लोग गांजा की छोटी-छोटी पुड़िया बनाकर आगे छोटे तस्करों को देते थे।
पुलिस के अनुसार इन चारों से छोटे तस्कर 200 से 500 ग्राम गांजा खरीदते थे। इसके बाद शहर के उन इलाकों में सप्लाई की जाती थी, जहां गांजा की मांग अधिक रहती है। इस तरह चेन सिस्टम के जरिए गांजा पूरे शहर में फैलाया जाता था और हर कड़ी अपना मुनाफा कमाती थी।
पूछताछ में सामने आया कि गांजा तस्करी का यह पूरा नेटवर्क उधारी में चलता था। दीपक ओडीशा से गांजा उधार में मंगवाता था। माल बिकने के बाद वह 5 से 10 दिन में शहर के सप्लायरों से पैसे वसूल करता और ऑनलाइन माध्यम से रकम ओडीशा में बैठे सप्लायर तक पहुंचाता था।
पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज किया है। साथ ही, ओडीशा में बैठे मुख्य सप्लायर और अन्य छोटे तस्करों की तलाश शुरू कर दी।
गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने प्रदेश के सभी जिलों में नशे के खिलाफ व्यापक अभियान चला रखा है। इसके तहत स्टिंग ऑपरेशन कर अवैध रूप से बिक रहे नशे का खुलासा किया जा रहा है। कोटा टीम ने भी शहर में खुलेआम बिक रहे नशे को लेकर खबरें प्रकाशित की। इनमें बताया कि शहर में करीब 30 हॉट स्पॉट हैं, जहां धड़ल्ले से गांजा व नशा बिकता है। इसके बाद से ही पुलिस ने अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी।
शहर को नशामुक्त करने के उद्देश्य से पुलिस ने ‘ऑपरेशन गरुड़ व्यूह’ चला रखा है। इसके तहत अवैध मादक पदार्थों की तस्करी करने और नाबालिगों को नशा बेचने वालों को गिरफ्तार किया जा रहा है। साथ ही, करोड़ों रुपए के मादक पदार्थ भी जब्त किए गए हैं। रेलवे कॉलोनी थाना पुलिस की इस कार्रवाई से शहर में सक्रिय अवैध मादक तस्करों की कमर टूट गई है।