कोटा

Kota Success Story: 4 बार फेल होने के बाद नहीं मानी हार, मेरठ के भानुप्रताप ने JEE Main में हासिल किए 96.7039 पर्सेंटाइल

Inspirational Story: मेरठ के छोटे से गांव से निकलकर भानुप्रताप सिंह ने संघर्ष, असफलता और आत्मविश्वास की नई मिसाल पेश की है। चार बार असफल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और JEE Main में 96.7039 पर्सेंटाइल हासिल कर दिखाया कि लगातार मेहनत ही सफलता की असली कुंजी है।

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Feb 22, 2026
भानुप्रताप की फोटो: पत्रिका

JEE Main Motivational Story: कभी-कभी जिंदगी हमें ऐसे मोड़ पर खड़ा कर देती है, जहां आगे बढ़ने से ज्यादा आसान हार मान लेना लगता है। लेकिन जो लोग डर और निराशा से आगे निकलने का साहस जुटा लेते हैं, वही अपनी तकदीर बदलते हैं। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के छोटे से गांव कुरलसी के भानुप्रताप सिंह की कहानी इसी हौसले और उम्मीद की मिसाल है।

चार बार जेईई मेन में असफलता के बाद भानुप्रताप ने आखिरकार 96.7039 परसेंटाइल हासिल कर यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो असफलता भी सफलता की सीढ़ी बन जाती है। उसे पहले प्रयास में सिर्फ 44 परसेंटाइल मिले। हर बार उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं आया। पिता मेरठ में एक निजी स्कूल में शिक्षक हैं।

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भानुप्रताप कहते हैं, ‘मुझे लगा कि अगर मैंने बिना पूरी कोशिश किए हार मान ली, तो यह पापा के सपनों के साथ अन्याय होगा।’ फिर माता-पिता से बात कर कोटा जाकर कोचिंग का फैसला किया। कोचिंग सिटी कोटा को औसत छात्रों को भी सही मार्गदर्शन से सफलता दिलाने के लिए जाना जाता है।

हर तरफ पढ़ाई में डूबे छात्र, अनुशासित माहौल और प्रतिस्पर्धा-यह सब उन्हें प्रेरित करने लगा। एहसास हुआ कि उनका एनसीईआरटी बेस मजबूत नहीं है। फिर से शुरुआत की, बुनियादी अवधारणाओं को समझा, नियमित क्लासेज अटेंड की और रिवीजन किया। शिक्षकों का मार्गदर्शन और अनुशासित माहौल उनके लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

मेहनत रंग लाई और उन्होंने जेईई एडवांस्ड के लिए क्वालिफाई किया। जेईई मेन में 96.7039 पर्सेंटाइल हासिल करना उनके जीवन का सबसे भावुक और गर्व का क्षण था। उसका सपना है कि उन्हें किसी अच्छे एनआइटी में कंप्यूटर साइंस ब्रांच मिले।

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