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Kota: ‘हिजाब हटाने के बाद ही मिलेगा प्रवेश’, नाराज छात्रा ने छोड़ी सरकारी परीक्षा, सीधी पहुंची हाईकोर्ट… हुआ ये ऑर्डर

Hijab Controversy In Govt Exam: मामला पिछले महीने हुई शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर था। जिसका आयोजन राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, जयपुर द्वारा किया गया था
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कोटा

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Jayant Sharma

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Updated: 22 Feb 2026, 11:41 AM IST

Kota hijab issue pic

Kota News: राजस्थान के कोटा जिले से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। सरकारी भर्ती परीक्षा में हिजाब पहनकर परीक्षा देने आई छात्रा को परीक्षा देने से रोकना परीक्षा दिलाने वाली सरकारी एजेंसी को भारी पड़ गया। छात्रा ने हिजाब हटाने से इंकार कर दिया और सीधे हाईकोर्ट पहुंची। अब कोर्ट ने सख्त ऑर्डर किए हैं और पूरे घटनाक्रम के बारे में जवाब मांगा है। मामला पिछले महीने हुई शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर था। जिसका आयोजन राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, जयपुर द्वारा किया गया था।

बूंदी जिले की रहने वाली छात्रा अलीशा का सेंटर आया था कोटा…

दरअसल बूंदी जिले के हिंडोली इलाके में रहने वाली अलीशा का सेंटर कोटा में महावीर नगर एक्सटेंशन स्थित तिलक स्कूल आवंटित किया गया था। शिक्षक भर्ती परीक्षा का पर्चा देने के लिए वह 18 जनवरी को तय समय पर सेंटर पहुंच गई थी। उसका दावा है कि उसके पास संबंधित दस्तावेज थे, जिनकी मदद से उसे सेंटर में प्रवेश करना था। वह हिजाब पहनकर आई थी। लेकिन गेट पर ही उसे रोक लिया गया। उसे हिजाब हटाकर परीक्षा देने के लिए कहा गया, जिसके लिए उसने इंकार कर दिया। काफी प्रयास करने के बाद भी उसे प्रवेश नहीं दिया गया।

अलीशा के वकील ने कोर्ट में रखा पक्ष

अलीशा ने उस समय प्रवेश करने का काफी प्रयास किया लेकिन वह परीक्षा से वंचित रह गई। उसने अपने परिजनों की मदद से कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट में अलीशा के वकीलों की ओर से कहा गया कि
यह छात्रा के धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान प्रदत्त समानता के अधिकार का उल्लंघन हुआ है। उनका कहना है कि अलीशा अपनी आस्था के अनुसार हिजाब पहनती है, जो केवल सिर को ढकता है, चेहरा पूरी तरह खुला रहता है। पहचान सत्यापन में भी किसी प्रकार की बाधा नहीं थी। उसके बाद भी अलीशा को प्रवेश नहीं दिया गया।

हाईकोर्ट ने दलील सुनने के बाद किए ऑर्डर

दोनों वकीलों की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने इस मामले में परीक्षा केंद्र वीक्षक और परीक्षा कराने वाली एजेंसी से जवाब मांगा है। वहीं छात्रा की मांग है कि उसे पुनः परीक्षा में शामिल होने का मौका दिया जाए। साथ ही भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में हिजाब पहनने को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार किए जाएं, ताकि सुरक्षा मानकों का पालन भी हो और अभ्यर्थियों के अधिकार भी सुरक्षित रहें। इस प्रकरण ने प्रतियोगी परीक्षाओं में ड्रेस कोड, धार्मिक स्वतंत्रता और सुरक्षा प्रावधानों के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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