
सांगोद (कोटा). झालावाड़ जिले में खानपुर की अनाज मंडी के पास नाले में मृत मिले सांगोद नगरपालिका के सफाई कर्मचारी राकेश वाल्मीकि के शव को सांगोद पहुंचाने के लिए परिजनों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। शव की हालत खराब होने और तेज दुर्गंध के कारण कोई भी निजी वाहन चालक उसे ले जाने के लिए तैयार नहीं हुआ। ऐसे में परिजनों के सामने शव को घर तक पहुंचाने की समस्या खड़ी हो गई। आखिरकार मजबूरी में नगरपालिका के कचरा वाहन से शव को सांगोद लाना पड़ा। इस घटना के सामने आने के बाद क्षेत्र में इसकी चर्चा होने लगी।
जानकारी के अनुसार, सांगोद निवासी राकेश वाल्मीकि 7 अक्टूबर को बिना बताए घर से चला गया था। परिजनों के मुताबिक, वह पहले भी कई बार इसी तरह घर से चला जाता था। पहले की घटनाओं को देखते हुए परिवार ने इस बार भी पुलिस में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं करवाई। इसी बीच 9 अक्टूबर को खानपुर पुलिस को राकेश का शव अनाज मंडी के पास नाले में मिला। शव की हालत खराब होने के कारण उसमें से तेज दुर्गंध आ रही थी।
शनिवार को परिजनों को राकेश का शव मिलने की सूचना दी गई। जानकारी मिलते ही परिवार के सदस्य खानपुर पहुंचे। पुलिस ने मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम करवाया और आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। इसके बाद परिजन शव को सांगोद ले जाने के लिए वाहन की व्यवस्था करने में जुट गए।
परिजनों ने निजी वाहन से शव ले जाने का प्रयास किया, लेकिन शव की हालत और दुर्गंध के चलते कोई भी वाहन चालक तैयार नहीं हुआ। अस्पताल में शव ले जाने के लिए अलग से शव वाहन की सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में परिजनों को मजबूरी में नगरपालिका के कचरा वाहन का सहारा लेना पड़ा। इसी वाहन से राकेश का शव खानपुर से सांगोद पहुंचाया गया। एक मृतक के शव को ले जाने के लिए उचित वाहन की व्यवस्था नहीं हो पाने का यह मामला चर्चा का विषय बन गया।। परिवार के लोगों की यह लाचारी देख वहां मौजूद लोग भावुक हो गए।
वाहन स्वयं परिजन लेकर आए थे। अस्पताल में शव वाहिनी नहीं है। 104 व 108 वाहन है जो शवों को नहीं ले जाती।
- डॉ. धीरेन्द्रगोपाल मिश्रा, अस्पताल प्रभारी, खानपुर
मौत कैसे हुई, इसकी जानकारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद सामने आएगी। शव को ले जाने की व्यवस्था परिजन की रहती है। कचरा वाहन भी परिजन ही लेकर आए थे।
- रविन्द्र सिंह, थानाधिकारी खानपुर
एंबुलेंस नहीं मिलने से परिजन ने निजी वाहनों से संपर्क किया। लेकिन शव की हालत ज्यादा खराब होने से कोई निजी वाहन भी तैयार नहीं हुआ। मजबूरन शव को कचरा गाड़ी से लाना पड़ा।
- राकेश कुमार, पार्षद