कोटा

नाहरगढ़ अस्पताल: डॉक्टर ही नहीं, किशनगंज-रेलावन से बुलाने पड़ रहे

Aug 07, 2026
Rajasthan

नाहरगढ़. क्षेत्र के राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा रही हैं। एक्स-रे जैसी सुविधा शोपीस बनकर रह गई है, तो दूसरी ओर चिकित्सकों और संसाधनों की कमी कोढ़ में खाज साबित हो रही है। विभाग की लचर कार्यशैली का आलम यह है कि यहां स्थायी डॉक्टर नियुक्त नहीं है। एक डॉक्टर सप्ताह में मात्र दो-तीन दिन किशनगंज से और दूसरा डॉक्टर दो-तीन दिन रेलावन से यहां सेवाएं देने आते हें। डॉक्टरों की नियमित उपलब्धता न होने के कारण मरीजों को परेशान होना पड़ता है। डॉक्टर न मिलने पर दूर-दराज से आने वाले मरीजों को या तो बैरंग लौटना पड़ता है या मजबूरी में झोलाछाप व निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती है।
एक्सरे मशीन बनी शोपीस
अस्पताल परिसर में एक्स-रे मशीन तो स्थापित कर दी गई, लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते इसके संचालन के लिए जरूरी सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। नतीजा यह है कि मामूली जांच के लिए भी गरीब मरीजों को निजी सेंटर्स पर जाना पड़ रहा है। लाखों रुपए की मशीन धूल फांक रही है। कर्मचारियों के भारी अभाव के चलते अस्पताल का रिकॉर्ड संधारण और अंदरूनी कामकाज पूरी तरह बेपटरी हो चुका है।
दवाइयों का टोटा
अस्पताल में आवश्यक औषधियों की भारी कमी बनी हुई है। पर्ची कटाने के बाद मरीजों को काउंटर से बमुश्किल गिनी-चुनी दवाइयां ही मिल पाती हैं, जबकि शेष अधिकांश दवाइयों के लिए उन्हें बाहर के निजी मेडिकल स्टोरों पर जाना पड़ता है।

Updated on:
07 Aug 2026 06:00 am
Published on:
07 Aug 2026 06:00 am