आपने फैक्ट्री, बड़ी-बड़ी कंपनियों के साथ-साथ रेस्टोरेंट में भी रोबोट्स सर्विस का लुत्फ उठाया होगा, लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है कि कोटा के एक निजी स्कूल में रोबोट टीचर के तौर पर नियुक्त है।
कोटा. आपने फैक्ट्री, बड़ी-बड़ी कंपनियों के साथ-साथ रेस्टोरेंट में भी रोबोट्स सर्विस का लुत्फ उठाया होगा, लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है कि कोटा के एक निजी स्कूल में रोबोट टीचर के तौर पर नियुक्त है। इंसानों की तरह दिखने वाला रोबोट बच्चों को पढ़ाने के साथ उनकी समस्याओं का हल भी निकाल रहा है। इससे बच्चे भी नई तकनीक से जुड़कर खुश नजर आते हैं। फिलहाल रोबोट शिक्षक प्राइमरी सेक्शन के बच्चों को पढ़ा और योगा करवा रहा है। स्कूल डॉयरेक्टर आनंद राठी बताते है कि आज के दौर में नई तकनीक से जुड़ना बहुत जरूरी है। इसी के चलते रोबोट से शिक्षण कार्य को शुरू किया गया, ताकि बच्चों में नयापन देखकर पढ़ने की रूचि जागृत हो सके।
शिक्षण के साथ मनोरंजन भी
यह रोबोट बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ बच्चों का मनोरंजन का केन्द्र भी बना हुआ है। साथ ही बच्चों को फिटनेस के लिए एक्सरसाइज व योगा अभ्यास भी करवाता है।
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थ्री-डी प्रिंटेंड व पॉलिलेक्टिक एसिड मेटेरियल से बनाया
रोबोट डेवलपर ओम प्रकाश सोनी का कहना है कि मैंने 3 स्टूडेंट्स की टीम के साथ मिलकर रोबोट के बॉडी पार्ट्स को थ्री-डी प्रिंटेंड व पॉलिलेक्टिक एसिड मेटेरियल से बनाया गया है। सेंसर से रोबोट चलता है। 6 माह में बने इस रोबोट की लागत 6 हजार रुपए आई है। रोबोट का वजन 15 किलो है।
एआई (AI) की मदद से देता है जवाब
रोबोट बच्चों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अनुसार उत्तर भी देता है। रोबोट इसके लिए इंटरनेट और स्टोर इनफॉर्मेशन का उपयोग करता है। रोबोट से पढ़ने पर बच्चों में खुशी नजर आती है। इसमें आब्स्टकल अवॉइडिंग सेंसर का भी प्रयोग किया। जिससे किसी के सामने आने पर यह रुक जाता है। जल्दी ही आंखों के कैमरे लगाकर इमेज प्रोसिसिंग से एडवांस बनाया जाएगा, जिससे बच्चों व शिक्षकाें को पहचान सकेगा।