कोटा

अब नहीं होगा नाम का मजाक; स्कूली बच्चों के अटपटे नाम बदलेंगे, अब कचरूमल, गोबरी नहीं…अथर्व, आराध्या कहलाएंगे बच्चे

Sarthak Naam Campaign: शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के कचरूमल, गोबरी बाई, बावरी देवी, फूटाराम… जैसे अटपटे नामों को बदलने की कवायद शुरू की है।

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Apr 15, 2026
प्रतीकात्मक तस्वीर, मेटा एआइ

Sarthak Naam Campaign: शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के कचरूमल, गोबरी बाई, बावरी देवी, फूटाराम… जैसे अटपटे नामों को बदलने की कवायद शुरू की है। दरअसल, गांवों में बच्चों के माता-पिता ऐसे अटपटे नाम रख देते हैं, लेकिन जब स्कूल में ऐसे बच्चों के नाम पुकारते हैं तो साथी उसका मजाक उड़ाते हैं। जिससे वे शर्मिंदा महसूस करते हैं।

इसलिए विभाग ने ऐच्छिक रूप से ऐसे अटपटे नाम बदलने की कार्यवाही शुरू की है। स्कूलों में ऐसे नामों के संशोधन के लिए ‘सार्थक नाम’ अभियान शुरू किया जा रहा है। शिक्षा विभाग ने 1400 छात्रों और 1500 छात्राओं के ऐसे नामों की सूची तैयार की है। जिसे संबंधित स्कूलों में भेजी जाएगी। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की पहल पर प्रारम्भिक शिक्षा (आयोजना) विभाग ने इस संबंध में परिपत्र जारी किया है। जिसमें अभियान के क्रियान्वयन के संबंध में दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।

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विद्यार्थी/अभिभावकों से लेनी होगी लिखित सहमति

अभियान के संबंध में विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को जागरूक करने के लिए पीटीएम के माध्यम से जानकारी दी जाएगी। अभियान पूर्णतः स्वैच्छिक एवं संवेदनशील दृष्टिकोण से लागू किया जाएगा। नाम संशोधन के लिए बाध्यता नहीं नहीं होगी। स्वैच्छिक नाम परिवर्तन एवं जिन नामों में त्रुटि, अशुद्धि, अर्थहीन अथवा नकारात्मक अर्थ परिलक्षित हो, उनके संशोधन के लिए विद्यालय स्तर से पहल की जाकर विद्यार्थी/अभिभावकों की लिखित सहमति अनिवार्य होगी।

इसलिए जरूरत पड़ी

शिक्षा विभाग के परिपत्र के अनुसार व्यक्ति का नाम उसके व्यक्तित्व, संस्कार और सामाजिक छवि का दर्पण होता है। नाम सुनते ही हमारे मन में उस व्यक्ति की एक छवि बनने लगती है। नाम व्यक्ति की पहचान और विशिष्टता को दर्शाता है। प्रत्येक नाम से एक अर्थ, भावना एवं सांस्कृतिक संदर्भ जुड़ा होता है। नाम का व्यक्ति के आत्मविश्वास और व्यवहार पर भी प्रभाव पड़ता है। एक अच्छा, सरल और सकारात्मक अर्थ वाला नाम व्यक्ति में गर्व और आत्मबल बढ़ाता है, जबकि जटिल या नकारात्मक अर्थ वाले नाम कभी-कभी संकोच का कारण बन सकते हैं।

9वीं तक के बच्चों का ही नाम संशोधन होगा

कक्षा 1 से 9 तक के विद्यार्थियों के ही नाम संशोधन के लिए आवेदन लिए जाएंगे। कक्षा 8 एवं 9 के विद्यार्थियों के नाम संशोधन के लिए कक्षा 8 बोर्ड परीक्षा की अंक तालिका में नाम परिवर्तन प्रक्रिया का भी नियमानुसार पालना कर संशोधन करवाए जाने की कार्यवाही की जाएगी।

शिक्षा मंत्री ये बोले…

विद्यार्थियों के नाम जो बोलने व सुनने में सही नहीं लगते, शिक्षकों को उनके नाम बदलने के लिए अभिभावकों को समझाने और उनकी सहमति से नाम बदलकर सम्मानजनक रखने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान शिक्षकों को जाति संबंधी आपत्तिजनक उपनाम जोड़ने से भी बचना चाहिए। इसके लिए ऐसे 2900 नामों की सूची भेजी गई है। अभियान का मुख्य उद्देश्य ऐसे नामों का चयन कर संशोधन करना है जो सकारात्मक अर्थ लिए हुए हों तथा विद्यार्थियों के आत्मसम्मान एवं व्यक्तित्व विकास में सहायक सिद्ध हों।
-मदन दिलावर, शिक्षा मंत्री

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