
सांकेतिक तस्वीर, मेटा एआइ
Rajasthan Monsoon 2026: राजस्थान समेत देश के कई राज्यों को पिछले दो वर्ष से तर करने वाला दक्षिणी पश्चिमी मानसून इस बार सामान्य से कमजोर रहने की आशंका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के प्रमुख मृत्युंजया मोहपात्र ने सोमवार को पूर्वानुमान जारी करते हुए कहा, जून से सितंबर के बीच होने वाली कुल मानसूनी बारिश दीर्घकालीन औसत (एलपीए) का करीब 92 प्रतिशत यानी सामान्य से कम रहने का अनुमान है। एलपीए के 90-95% के बीच वर्षा को सामान्य से कम माना जाता है।
पूरे देश में 1971 से 2020 की अवधि के आधार पर मानसून का एलपीए 87% माना जाता है। चिंताजनक बात ये है कि 2018 के बाद यह सबसे कम है। 2018 में सामान्य के मुकाबले 91 प्रतिशत बारिश हुई थी। इससे पहले निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट ने भी सामान्य से कम (94%) बारिश का पूर्वानुमान बताया था। राजस्थान में 1971-2020 की अवधि के आंकड़ों के आधार पर मानसून का एलपीए सामान्यतः 435.6 मिमी से लेकर 500 मिमी के आसपास माना जाता है।
आइएमडी ने इसके लिए अल नीनो इफेक्ट को जिम्मेदार माना है। जिसके कारण न केवल प्रचंड गर्मी पड़ेगी बल्कि बारिश भी कम होगी। विभाग ने बताया कि अप्रैल से जून 2026 के बीच अल नीनी की तटस्थ स्थितिया रहने की प्रबल आशंका है। इसके बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान अला नीनो की मजबूत स्थितियों के आसार है। इसी के कारण कमजोर मानसून की आशंका ज्यादा है। मोहपात्र का कहना है कि अप्रैल से जून तक स्थिति सामान्य रहेगी, लेकिन इसके बाद मानसून के दौरान अल नीनो का प्रभाव इसे कमजोर करेगा।
मौसम विभाग दिल्ली ने इस वर्ष देश के मध्य और पश्चिमी इलाकों में सामान्य से कम वर्षा दर्शायी है, जो कृषि के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। हालाकि मौसम विभाग मई के आखिरी सप्ताह में अपडेट पूर्वानुमान जारी करेगा।
पिछले साल मानसून तय समय से 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल पहुंच गया था। आमतौर पर 8 जुलाई तक मानसून पूरे देश में छा जाता है, लेकिन 2025 में 29 जून को ही पूरे देश को कवर कर लिया था। मानसून की वापसी देश के उत्तर-पश्चिमी राज्यों से 17 सितंबर को शुरू होती है और यह पूरी तरह 15 अक्टूबर तक लौट जाता है। से पिछली बार पूर्वानुमान 105 प्रतिशत वर्षा का था, जबकि हुई 108 प्रतिशत। वहीं राजस्थान में 2025 में मानसून ने तय समय से पहले 18 जून को ही एंट्री ली और प्रदेश में सामान्य से 164% अधिक बारिश हुई।
प्रदेश में दक्षिण पश्चिमी मानसून 2024 के दौरान सामान्य (LPA) से 156% अधिक वर्षा दर्ज की थी। जबकि 2025 में भी मानसून के दौरान 435.6 मिमी के सामान्य के मुकाबले 715.2 मिमी वर्षा हुई, जो सामान्य का 164% थी।
Published on:
14 Apr 2026 11:08 am
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