वनकर्मियों को छका रहा बाघ टी 91, दिए रामगढ़ के जंगलों में मौजूदगी के सबूत, अगला पड़ाव होगा मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व में करेगा बसेरा
कोटा . मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व का खाली सिंहासन अपने उत्तराधिकारी की राह देख रहा है। वहीं नीति निर्धारिकों के कयासों को दरकिनार कर बिगड़ैल शहजादा बाघ T91 अपनी धुन में राह के नजारों को देखते हुए Secret Superstar की तरह बिना किसी को खबर किए अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहा है। ब्रोकन टेल की असामयिक मौत से खाली हुई मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व की बादशाहत अब नए राजा का बेसब्री से इंतजार कर रही है। T91 के अलावा और बाघ T66 भी दावेदारी है। जो भी राजा बनेगा, बाघिन T83 उसकी पटरानी बनेगी। प्रशासन ने नए बादशाह की अगवानी को आतुर है। गौरतलब है कि सरकार की योजना के अनुसार इसी माह मुकुन्दरा में बाघों को लाकर बसाना है। वनकर्मी मुस्तैदी के साथ इसकी तैयारी में जुटे हैं।
तलवास से निकलकर रामगढ़ पहुंचा
मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व की 760 वर्ग किलोमीटर की हुकुमत को संभालने के लिए बाघ T91 ने करीब एक माह पहले ही रणथम्भौर अभयारण्य की सल्तनत छोड़ दी थी। वह तलहटी में होता हुए पहले तलवास के जंगलों में पहुंचा और वहां से वनकर्मियों की फौज का चकमा देकर अब रामगढ़ के जंगलों में आराम फरमा रहा है। कभी दहाड़ तो कभी पगमार्क से वो अपनी मौजूदगी के संकेत दे रहा है। बाघ T91 वनकर्मियों को छका रहा है। Secret Superstar की तरह ये पल-पल में अपनी जगह बदल रहा है।
बूंदी के पास मिले पगमार्क
बाघ टी 91 गत 10 दिसम्बर को तलवास के जंगलों से बाहर निकलकर बूंदी के जंगलों में आ गया था। यहां से 11 दिसम्बर से इसके पगमार्क नहीं मिल रहे थे। ऐसे में विभाग की नींद उड़ी हुई थी। गत दिनों बाघ की जानकारी लेने पहुंचे मुख्य वन संरक्षक ने भी इसको लेकर काफी नाराजगी जाहिर की। इसके बाद रामगढ़ अभयारण्य की टीम को भी इसकी तलाश में लगाया गया। गुरुवार को बाघ के पगमार्क बूंदी के पास ही सथूर व फूलसागर के आसपास के क्षेत्र में देखे गए।