
लखीमपुर खीरी. जिलाधिकारी के निर्देश पर जिले में बलाश्रमिको के चिन्हांकन के लिए एक चलाया गया। जो अभियान फुस हो गया है। जिलाधिकारी के अभियान को संचालित करने के लिए तहसीलवार तिथियां भी निर्धारित की गई थी। साथ ही इस बात के भी आंकड़े निर्देश दिए गए थे। कि अभियान अवधि में बाल श्रम अधिनियम के प्रावधानों का परिवर्तन एवं बालश्रमिक के चिन्हांकन का काम पूरी सजगता और संवेदनशीलता तत्परता के साथ किया जाए। इस अभियान में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं होनी चाहिए। लेकिन 20 जून को डीएम के जारी आदेश का असर जिले के अफसरान पर नहीं दिखा।
नहीं हुई अभी तक शुरुआत
आलम यह है कि पलिया लखीमपुर के अलावा किसी अन्य तहसील क्षेत्र में अभियान चलाना चलना तो दूर उसकी शुरुआत तक नहीं हुई। जिलाधिकारी ने अभियान को सफल बनाने के लिए श्रम विभाग के अधिकारियों उसके साथ एंटी ह्यूमन ट्रफकिंग सेल के प्रभारी सभी एसडीएम सीओ को भी अभियान को सफल बनाने के लिए निर्देश दिए थे। इस अभियान के तहत 3 जुलाई को मोहम्मदी में एसडीएम और सीओ की अगुवाई में अभियान चलाया जाना है। 5 जुलाई को गोला में अभियान की शुरुआत होगी। तहसीलदार को अभियान के बावत कोई जानकारी नहीं है। जबकि जिलाधिकारी द्वारा पत्र एसपी के अलावा सभी एसडीएम सीओ श्रम प्रवर्तन अधिकारी सहायक श्रम आयुक्त को भेजा गया है।
बाल श्रमिकों का किया था चिन्हांकन
प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशानुसार दिनांक 21 जून से 5 जुलाई तक जिले सभी तहसीलों में बाल श्रम अधिनियम के तहत बाल श्रमिकों को चिन्हित करने के लिए अतिथियों का निर्धारण किया गया था और टीम गठित की गई थी। इस में 21 जून को तहसील सदर 23 जून को पलिया 25 जून को निघासन 27 जून को मितौली 29 जून को धौरहरा में अभियान चलाना था। इसमें तहसील सदर और पलिया के अभियान चलाकर श्रम विभाग ने 8 बाल श्रमिकों का चिन्हांकन किया था। निघासन मितौली,धौरहरा में अभियान चला ही नहीं। मोहम्मदी और गोला में अभियान चलना शेष है।
सुनिये क्या कहते हैं जिम्मेदार
सहायक श्रम आयुक्त अफ़लाक अहमद के मुताबिक अभियान की पूरी जानकारी 5 जुलाई के उपरांत मिली। निघासन मितौली और धौरहरा में अभियान ना चलने की बाबत उनका कहना था। कि मितौली में चलना है। अन्य जगहों के बारे में जानकारी नहीं है।