लखीमपुर खेरी

चावल कैसे बन गए जानवरों की जान के दुश्मन? एक-एक कर तड़पे दर्जनों गिद्ध, वन विभाग टीम ने लिया एक्शन

Vulture deaths in UP : उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में जहरीले चावल खाने से 25 दुर्लभ गिद्धों की मौत। ग्रामीणों द्वारा कुत्तों के लिए बिछाया गया जाल बना लुप्तप्राय पक्षियों का काल।
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लखीमपुर-खीरी में हुई गिद्धों की मौत, PC- X

लखीमपुर-खीरी : पेट भरने वाले चावल जानवरों के लिए आफत बन गए। पर वो कैसे? दरअसल, उत्तर प्रदेश के भीरा थाना क्षेत्र के सेमरिया गांव में मंगलवार को एक ऐसी घटना हुई जिसने सबको हैरान कर दिया। ग्रामीणों ने बकरियों को बचाने के लिए चावल में कीटनाशक (पेस्टीसाइड) मिला दिया था। पर इसकी वजह से कुत्तों के साथ-साथ 25 गिद्ध भी जान गंवा बैठे। चलिए जानते हैं पूरा मामला।

कैसे हुई चावल की वजह से जानवरों की मौत?

सेमरिया गांव में ग्रामीणों ने अपनी बकरियों को आवारा कुत्तों बचाने के लिए नया तरीका खोजा। उन्होंने चावल में कीटनाशक (पेस्टीसाइड) मिला दिया। फिर क्या था, जहरीले चावल खाकर एक कुत्ता मर गया।

फिर गिद्धों के झुंड की कैसे गई जान?

कुत्ते के शव के पास जैसे ही गिद्धों का झुंड पहुंचा तो उनकी भी जान चली गई। क्योंकि जहर का असर इतना घातक था कि गिद्धों ने मांस चोंच मारते ही एक-एक कर तड़पना शुरू कर दिया। इसके बाद लुप्तप्राय प्रजाति के 25 गिद्धों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं, 5 अन्य गिद्धों की हालत गंभीर बनी हुई है।

सालों बाद दिखा था गिद्धों का ऐसा झुंड

गांव वालों ने बताया कि उन्होंने कई सालों बाद एक साथ इतने गिद्धों का झुंड देखा था। शुरुआत में करीब 40 गिद्ध कुत्ते के शव पर जुटे तो ग्रामीण उन्हें देखकर खुश हो गए। लेकिन कुछ ही देर बाद यह खुशी मातम में बदल गई। ग्रामीणों की आंखों के सामने ही गिद्ध तड़प-तड़प कर मरने लगे और देखते-ही-देखते खेत में 25 गिद्धों की लाशों का ढेर लग गया।

दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन की डीएफओ कीर्ति चौधरी ने बताया कि किसान अपनी बकरियों और खेतों की फसलों को आवारा कुत्तों से बचाने के लिए यह कदम उठाया था। उसने चावल में पेस्टीसाइड मिलाकर कुत्तों के लिए रख दिया था। लेकिन यह जहर न सिर्फ कुत्ते, बल्कि गिद्धों के लिए भी काल बन गया।

वन विभाग टीम ने लिया एक्शन

वन विभाग की टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर सभी मृत गिद्धों को कब्जे में ले लिया और उनका पोस्टमार्टम किया जा है। जहर की सटीक पहचान के लिए गिद्धों के विसरा को आईवीआरआई (IVRI), बरेली भेजा जा रहा है।

पर्यावरणविदों में हड़कंप

गिद्ध भारत में पहले से ही लुप्तप्राय श्रेणी में हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व के आसपास सरकार गिद्धों की सुरक्षा के लिए सेंचुरी बनाने का प्रयास कर रही है। ऐसे में एक ही घटना में 25 गिद्धों का मरना संरक्षण की दिशा में एक बड़ा झटका माना जा रहा है। वन विभाग अब गंभीर रूप से बीमार पड़े पांच गिद्धों को बचाने की पूरी कोशिश कर रहा है। साथ ही पूरे मामले में कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

Updated on:
09 Apr 2026 04:03 pm
Published on:
09 Apr 2026 04:03 pm
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