
लखीमपुर खीरी. पिछले तीन हफ्ते से हो रही भीषण गर्मी और कड़ी धूप से जहां जन जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। वही जंगल के ताल तलैया और जलाशय भी सुख चुके हैं। जंगल के अंदर रहने वाले बाघ और अन्य वन्य जीव पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। लिहाज अपनी प्यास बुझाने के लिये यह जंगल से बाहर निकल रहे हैं।
टैंकरों से भरा जाएगा पानी
अब बाघों की सहूलियत के लिए बफर जोन मैलानी रेंज की तीन बीटों में बने छोटे वाटर-होल में टैंकरों के जरिए पानी भरा जाएगा। इसकी तैयारी जोरों से चल रही है। मैलानी रेंज अंतर्गत भरगिवा, खरहेटा और जटपुरा जंगल के अंदर छोटे वाटर-होल पानी के अभाव में सूखे पड़े हैं। इससे जंगल के अंदर रहने वाले बाघ और अन्य वन्य जीव को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। यही वजह है। कि जंगल में पानी ना मिलने पर बाघ बाहर निकल रहे हैं। इसी क्रम में 12 जून को जटपुरा बीट में जंगल से सटे खेत में मवेशी चला रहे हरदुआ गांव निवासी राम प्रसाद पर बाघ ने हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया था।
ग्रामीणों में दहशत
वहीं सलेमपुर बीट में सोमवार सुबह एक बार खेतों में भरे पानी को पीने के लिए निकला बाघ को देख खेतों की ओर जा रही महिला को भयभीत होकर वहां से भागना पड़ा। इंसानों और मवेशियों पर हो रहे बाघों के हमले को लेकर वन विभाग गंभीर हुआ है और वन क्षेत्राधिकारी और ट्रेनी आईएफएस प्रखर मिश्रा ने बताया कि यदि एक-दो दिन में बारिश नहीं होती है। तो रेंज की तीन बीट जटपुरा,खरहेटा और भरगीवा जंगल में बाघों और अन्य वन्यजीवों के लिए छोटी वाटर टैंक के जरिये पानी भरवाया जाएगा। इन वाटर होलो में पानी भरने के बाद प्यास लगने पर बाघों और अन्य जीवों को पानी की तलाश के लिए जंगल से बाहर नहीं आना पड़ेगा।
खेतों में भरे पानी को पीने से बाघों की सेहत को पहुंचेगा नुकसान
वन्य जीव विशेषज्ञ डॉक्टर बी पी सिंह का मानना है। कि इस समय पड़ रही भीषण गर्मी और कड़ी धूप से धान के पौधे और गन्ने की फसल को सूखने से बचाने के लिए किसान खेतों में पानी भर रहे हैं।गर्मियों के दौरान फसलों को लगाने वाले कीड़ों से बचाव के लिए यह पानी में कीटनाशक का भी इस्तेमाल करते हैं। कीटनाशक युक्त पानी पीकर बाघ गंभीर बीमार हो सकते हैं। खेतों में भरा पानी पीने से बाघो की सेहत के लिए काफी नुकसानदेह साबित हो सकता है।