एनसीएलएटी ने सायरस मिस्त्री के पक्ष में सुनाया था फैसला 9 जनवरी को होगी टीसीएस बोर्ड बैठक, स्थगित करने की मांग
नई दिल्ली।टाटा संस ( Tata Sons ) ने साइरस मिस्त्री ( Cyrus Mistry ) को कंपनी के चेयरमैन के तौर पर बहाल किए जाने के फैसले के खिलाफ गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court ) का रुख किया। कंपनी ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल ( national company law appellate tribunal ) के निर्णय पूर्ण आदेश को चुनौती दी और 9 जनवरी को होने वाली टीसीएस की बोर्ड बैठक ( TCS Board Meeting ) को देखते हुए इसे स्थगित करने की मांग की।
टाटा के वकीलों ने इस मामले पर तत्काल सुनवाई की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट हालांकि छह जनवरी को खुलेगा। दिसंबर 2019 में एनसीएलएटी ने मिस्त्री को टाटा समूह के कार्यकारी चेयरमैन के रूप में बहाल कर दिया था और आदेश दिया था कि एन चंद्रशेखरन की टाटा समूह के कार्यकारी चेयरमैन के रूप में नियुक्ति अवैध है। एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने टाटा संस को इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया था।
मिस्त्री, टाटा संस के छठे अध्यक्ष थे, जिन्हें अक्टूबर 2016 में पद से हटा दिया गया था। रतन टाटा के रिटायरमेंट के बाद मिस्त्री को 2012 में अध्यक्ष का पद मिला था। मिस्त्री ग्रुप ने एनसीएलटी की मुंबई पीठ के 9 जुलाई के आदेश को चुनौती दी थी जिसमें टाटा संस के अध्यक्ष के रूप में उनके निष्कासन के खिलाफ याचिका खारिज कर दी थी, साथ ही रतन टाटा और कंपनी के बोर्ड की ओर से बड़े पैमाने पर कदाचार के आरोप भी थे।
न्यायाधिकरण की विशेष पीठ ने माना था कि टाटा संस का निदेशक मंडल कंपनी के कार्यकारी अध्यक्ष को हटाने के लिए "सक्षम" था। एनसीएलटी पीठ ने यह भी कहा था कि मिस्त्री को अध्यक्ष के रूप में इसलिए बाहर किया गया क्योंकि टाटा संस का बोर्ड और शेयरधारकों का साइरस मिस्त्री ने विश्वास खो दिया था। उनके हटने के दो महीने बाद, मिस्त्री के परिवार द्वारा संचालित फर्मों ने एनसीएलटी में टाटा संस, रतन टाटा और कुछ अन्य बोर्ड सदस्यों के खिलाफ संपर्क किया। मिस्त्री ने अपनी दलीलों में मुख्य रूप से कहा था कि उनका निष्कासन कंपनी अधिनियम के अनुसार नहीं था।