Travel for inner tranquility : अपने मेन्टल और फिजिकल हेल्थ के लिए कभी-कभी आपका बस उठ कर चले जाना जरूरी होता है। फिर चाहे वो पार्लर, शॉपिंग, दोस्तों से मिलने या फिर समुद्र के किनारे या बस कमरे से बहार जाना हो। कभी कभी जरूरी है की हम सब कुछ छोड़ कर वो करें जो उस वक़्त हम करना चाहते हैं। यह कहना है एक्टर डायरेक्टर शेफाली शाह का। जानिये क्यों कहा उन्होंने ऐसा।
Transformative power of travel : शनिवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर।शेफाली शाह ने एक पोस्ट साझा की। जिसमे उन्होंने अपने अचानक बनाये प्लान के बारे में बताया। यह खुलासा किया की किस तरह वो बिना कुछ और सोचे अपनी दोस्त से मिलने दूसर शहर निकल पड़ीं। क्यों हम सभी को कभी न कभी ऐसा अचानक प्लान बनाना चाहिए। फिल्म डार्लिंग्स की एक्ट्रेस ने अपनी पोस्ट के कैप्शन में कहा, ' पिछले कुछ समय से अस्वस्थ महसूस कर रही हूं। कुछ सीरियस नहीं है और चिंता की कोई बात नहीं है लेकिन बहुत सारी छोटी-छोटी चीजें हैं जो परेशान करती हैं, उन्हें ठीक होने में शायद समय लगे। हम में से कोई भी अस्वस्थ (unwell) होना पसंद नहीं करता है। मैं भी नहीं। जब आप अस्वथ होते हो तो ये न केवल शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी परेशान हो जाते हैं और बीमार होने के अलावा और कुछ नहीं कर सकते। ऐसे में जब आप काम भी नहीं कर पाते तो और भी बुरा लगता है।'
शेफाली ने आगे कहा, 'बात बस ये है की मैं अपने सबसे अच्छे दोस्त से मिलने जा रहा हूं। मैंने कभी भी अचानक प्लान नहीं बनाये है। मुझे याद नहीं की मैंने अभी अचानक टिकट बुक कराया और चल पड़ी। हालांकि मैं हमेशा से ऐसा कुछ करना चाहती थी। लेकिन ऐसा मैंने पहली बार किया है और उम्मीद करती हूं आगे भी करती रहूंगी। ऐसा करने के लिए गिलटी भी महसूस करती हूं।'
अपने दिल के कश्मकश को साझा करते हुए उन्होंने आगे लिखा, 'सोचती रहती हूं, मेरे जाने से क्या सब ठीक हो जाएगा? क्या होगा अगर मेरे परिवार को मेरी जरूरत पड़ती है और मैं यहां नहीं हूं? फ्लाइट का खरच बहुत ज़्यादा है, सस्ती फ्लाइट नहीं मिल रही। क्या इस तरह पैसा खर्च करना उचित है? क्या यह आवश्यक भी है क्योंकि कोई विशेष अवसर या इमरजेंसी तो नहीं है? और सबसे जरूरी बात यह है कि क्या मैं इन सभी सवालों को एक तरफ रख दूं और अपने दिल की चाह, दिल की बात सुनू ? क्या जो मुझे चाहिए और वह सब बातों से ऊपर है? तो इन सभी सवालों का जवाब है 'हाँ।' जी हाँ यही जवाब है।'
अपने इमोशंस बयां करते हुए शेफाली आगे लिखती हैं, 'जिंदगी में कभी-कभी बस यूँ उठ कर चल देना महत्वपूर्ण होता है। अपना गिल्ट पीछे छोड़ कर जो करना चाहते है वो करना चाहिए। फिर चाहे वो पार्लर, शॉपिंग, दोस्तों से मिलने या फिर समुद्र के किनारे या बस कमरे से बहार जाना हो। कभी कभी जरूरी है की हम सब कुछ छोड़ कर वो करें जो उस वक़्त हम करना चाहते हैं। इसका मतलब जिम्मेदारियों से भागना नहीं है। इसका मतलब एक छोटा ब्रेक लेना ऐसी जगह पर होना जहां आप सबसे ज़्यादा कम्फर्टेबले होते हैं, वहां जहां आपको अच्छा लगता है। अक्सर लोग पूछेंगे 'आपको जाने की आवश्यकता क्यों है?' और इसका एक आसान जवाब है "क्योंकि मैं चाहती हूँ"। यही जवाब काफी होना चाहिए, दूसरों के लिए भी और खुद के लिए भी।'
यह पढ़ कर क्या आपका भी मन किया कहीं चले जाने को? क्या आप जायेंगे?
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