Isabgol: क्या आप कब्ज, एसिडिटी, ब्लोटिंग या खराब पाचन से परेशान हैं? अगर आपका जवाब हां है, तो हमारा आज का यह लेख आपके काम आ सकता है। आज के इस लेख में हम इसबगोल (Psyllium husk) खाने का सही तरीका और इससे होने वाले फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं।
Isabgol Ke Fayde: गर्मियों के आते ही खान-पान में जरा सा बदलाव होने पर पेट से जुड़ी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। अगर आप भी कब्ज, एसिडिटी, ब्लोटिंग, पाचन की खराबी या लूज मोशन से गर्मियों के आते ही परेशान हैं, तो हमारा आज का यह लेख आपके लिए मददगार हो सकता है। आयुर्वेद में इसबगोल (Psyllium husk) को पेट की समस्याओं के लिए रामबाण इलाज माना गया है। इसे खाने का तरीका बदलकर आप पेट से जुड़ी 4 समस्याओं से आसानी से छुटकारा पा सकते हैं। आइए जानते हैं पेट से जुड़ी किन बीमारियों में इसे किस तरह से इस्तेमाल किया जाता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम the_wellnness_tabble पर न्यूट्रिशनिस्ट और वेलनेस कोच सोनाली डी बंसल ने एक वीडियो शेयर कर बताया है कि अगर आपको अक्सर कब्ज या पेट साफ न होने की शिकायत रहती है, तो रात को खाना खाने के बाद एक चम्मच इसबगोल को एक गिलास गुनगुने पानी के साथ लें। यह पेट की गंदगी को बाहर निकालने और बाउल मूवमेंट को आसान बनाने में बहुत मदद करता है, जिससे अगली सुबह पेट अच्छी तरह साफ हो जाता है।
कई बार ज्यादा मसालेदार खाना खाने के बाद सीने में जलन (एसिडिटी) या पेट फूलने (ब्लोटिंग) की समस्या हो जाती है। ऐसे में एक चम्मच ईसबगोल को ठंडे दूध में मिलाकर पीने से बहुत आराम मिलता है। दूध और ईसबगोल का यह कॉम्बिनेशन पेट की गर्मी को शांत करता है और गैस की समस्या को कम करने में भी मदद करता है।
अगर आपका खाना ठीक से डाइजेस्ट नहीं होता है, तो इसबगोल को खाना खाने से ठीक पहले लेना फायदेमंद हो सकता है। यह शरीर में फाइबर की कमी को पूरा करता है और मेटाबॉलिज्म को ठीक रखने में मदद करता है, जिससे जो भी आप खाना खाते हैं, वह आसानी से पच जाता है।
अक्सर लोग सोचते हैं कि ईसबगोल सिर्फ कब्ज के लिए है, लेकिन यह लूज मोशन या दस्त में भी असरदार होता है। अगर आप एक चम्मच ईसबगोल को ताजी दही के साथ मिलाकर खाते हैं, तो यह पेट को बांधने का काम करता है और दस्त की समस्या को जल्द से जल्द रोकने में मदद करता है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।