
Wildlife Safari: पहली बार जंगल सफारी का प्लान बना रहे हैं तो सही जगह और सही समय चुनना जरूरी है। भारत में कई ऐसे नेशनल पार्क हैं, जहां बाघ, हाथी, शेर, गैंडे और कई दूसरे वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक माहौल में देखने का मौका मिलता है। सफारी पर जाने से पहले मौसम, बुकिंग और पार्क के नियमों की जानकारी होना भी जरूरी है। आइए जानते हैं जंगल सफारी पर जाने का सही समय क्या है, किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और भारत के कौन से नेशनल पार्क सफारी के लिए खास माने जाते हैं।
भारत के ज्यादातर मैदानी इलाकों के राष्ट्रीय उद्यानों में अक्टूबर से मई या जून तक सफारी का अच्छा मौका होता है। मानसून के दौरान कई पार्कों के मुख्य क्षेत्र बंद रहते हैं, क्योंकि तेज बारिश से जंगल के रास्ते खराब और कीचड़ भरे हो जाते हैं। हालांकि, पार्क के नियम और खुलने का समय जगह के हिसाब से अलग हो सकता है। सर्दियों में मौसम आरामदायक रहता है, लेकिन सुबह की सफारी के दौरान खासकर उत्तर भारत में ठंड महसूस हो सकती है। वहीं गर्मियों में तापमान ज्यादा रहता है, लेकिन पानी के स्रोतों के आसपास वन्यजीवों को देखने का मौका मिल सकता है।
पहली बार सफारी पर जाने से पहले यह तय करें कि आपको किस तरह के वन्यजीव देखने हैं। अगर आपको बाघ देखना है तो मध्य भारत और राजस्थान के कुछ प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व विकल्प हो सकते हैं। वहीं गैंडा देखने के लिए असम का काजीरंगा और एशियाई शेर देखने के लिए गुजरात का गिर खास माना जाता है। ध्यान दें, सफारी में जानवर दिखना तय नहीं होता। कई बार घंटों जंगल में घूमने के बाद भी बाघ या तेंदुआ नजर नहीं आता।
आमतौर पर सुबह की सफारी सूर्योदय के आसपास शुरू होती है और कई घंटे चल सकती है। वहीं, शाम की सफारी भी कई पार्कों में होती है। सुबह का समय वन्यजीवों की गतिविधियों के लिहाज से अच्छा माना जाता है, लेकिन जानवरों के दिखने की कोई गारंटी नहीं होती।
लोकप्रिय राष्ट्रीय उद्यानों में सफारी परमिट सीमित होते हैं। इसलिए खासकर रणथंभौर, बांधवगढ़ और काजीरंगा जैसे लोकप्रिय नेशनल पार्कों के लिए पहले से बुकिंग करना बेहतर रहता है। कुछ जगहों पर ऑनलाइन परमिट की सुविधा है, जबकि कुछ जगहों पर अधिकृत एजेंसियों के जरिए भी बुकिंग की जा सकती है।
सफारी के दौरान मौसम के हिसाब से कपड़े पहनना बेहतर रहता है। सर्दियों की सुबह के लिए गर्म कपड़े रखें, जबकि गर्मी में टोपी, धूप से बचने के लिए चश्मा, सनस्क्रीन और पानी साथ रखना काम आता है। जंगल में धूल भी हो सकती है, इसलिए चेहरे को ढकने के लिए हल्का कपड़ा भी उपयोगी रहेगा। इसके साथ ही आरामदायक जूते पहनें।
भारत के अलग अलग नेशनल पार्क अपनी खास वन्यजीव संपदा और प्राकृतिक माहौल के लिए जाने जाते हैं। रणथंभौर में बाघों के साथ ऐतिहासिक किले और चट्टानी जंगल का नजारा देखने को मिलता है, जबकि कान्हा बाघों के साथ बारहसिंगा के लिए खास है। कॉर्बेट में हाथी, बाघ और पक्षियों को देखने का मौका मिलता है। काजीरंगा एक सींग वाले गैंडों के लिए प्रसिद्ध है, वहीं गिर एशियाई शेरों का प्रमुख प्राकृतिक आवास है। कर्नाटक का नागरहोल हाथियों और बाघों के लिए जाना जाता है, जबकि लद्दाख का हेमिस ऊंचे पहाड़ी इलाके में स्नो लेपर्ड देखने के लिए खास है। इसलिए सफारी का चुनाव इस बात पर किया जा सकता है कि आप किस तरह के वन्यजीव और प्राकृतिक माहौल का अनुभव लेना चाहते हैं।