
Brain Dead Soldier Sperm extraction : 13 साल से ब्रेन डेड हरीश राणा का केस शायद ही कोई ना जानता हो! इसी तरह एक और इमोशनल करने वाला केस सामने आया है। कोमा में पड़े एक सैनिक का स्पर्म सुरक्षित रखने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है। जैसे हरीश की केस में न्यायालय को फैसला लेना पड़ा था वैसे ही इस मामले में भी कोर्ट ने रिप्रोडक्टिव टेक्नोलाॅजी (रेगुलेशन) एक्ट-2021 के तहत वैध मानते हुए इस पर निर्णय लिया है।
डॉक्टर का जवाब- आईवीएफ की जानकार (IVF Specialist) डॉ. रिचा भार्गव ने पत्रिका के रवि कुमार गुप्ता के साथ बातचीत में बताया कि कोमा में पड़े किसी शख्स के स्पर्म को कैसे निकाला जाता है। इसका मेडिकल प्रोसेस क्या होता है।
एक मान्यता प्राप्त 'असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी' (ART) क्लिनिक के जरिए इस प्रोसेस को पूरा किया जाएगा। इसी साल केरल के कोझिकोड में ऐसा मामला आया था। जिसमें कोमा में पड़े शख्स का स्पर्म निकालने का आदेश कोर्ट ने दिया था। ये मामला भी उसी तरह का है।
डॉ. भार्गव ने बताया, ब्रेन डेड पुरुष या किसी पुरुष के मरने के कुछ घंटों तक स्पर्म को फ्रीज कर सकते हैं। इससे बच्चा पैदा किया जा सकता है। हालांकि, ये पूरी बात व्यक्ति की शारीरिक स्थिति और स्पर्म की गुणवत्ता पर भी निर्भर करती है।
उन्होंने ये भी बताया कि अलग-अलग तरीकों से स्पर्म को निकाला जाता है। ये सबकुछ एक टीम तय करती है। जैसे समझने के लिए आप कुछ इन तरीकों के नाम जान सकते हैं-
एक तरीका समझाते हुए बताया कि इलेक्ट्रो-इजैक्युलेशन सबसे सामान्य तरीका है। इस प्रक्रिया में मरीज के मलाशय के पास एक प्रोब रखा जाता है। इसके जरिए प्रोस्टेट ग्रंथि के पास हल्की बिजली की तरंगें (Electric pulses) भेजकर नसों को उत्तेजित करके वीर्य निकाला जाता है।
वो ये भी कहती हैं कि कोमा में पड़े शख्स का वीर्य निकालने में जितनी देरी होगी उतनी ही गुणवत्ता कम होती है। इसलिए, ये काम जल्द से जल्द किया जाना चाहिए। अगर आप इस तरह के कंडीशन से बचना चाहते हैं तो पहले भी शुक्राणु को फ्रीज कर सकते हैं। ताकि जरुरत पड़ने पर इस्तेमाल कर पाएं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अर्जी करने वाली महिला के पति जम्मू-कश्मीर में तैनात थे। पिछले साल जुलाई-2025 में ड्यूटी के दौरान सिर में गंभीर चोट लगी थी। इसके बाद से वो कोमा में हैं।
हालांकि, हरीश राणा केस में कोर्ट ने "इच्छामृत्यु" (passive euthanasia) पर फैसला सुनाया दिया था, जबकि यह मामला प्रजनन अधिकार (reproductive rights) से जुड़ा है।