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जंगल के नन्हे दोस्तों की प्रेरक कहानियां

Kids Corner: चित्र देखो कहानी लिखो 87 .... बच्चों की लिखी रोचक कहानियां परिवार परिशिष्ट (15 जुलाई 2026) के पेज 4 पर किड्स कॉर्नर में चित्र देखो कहानी लिखो 87 में भेजी गई सराहनीय कहानियां दी जा रही हैं।
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जयपुर

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Tasneem Khan

Jul 22, 2026

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जंगल के सच्चे दोस्त

पुष्पेंद्र सिंह नरुका, उम्र: 10 वर्ष
एक घने जंगल में चार पक्के दोस्त रहते थे चीकू बंदर, मोंटू हिरण, मीकू बकरी और छोटा बछड़ा गोलू। चारों का स्वभाव अलग था, लेकिन उनमें बहुत गहरी दोस्ती थी। वे रोज सुबह तालाब के किनारे मिलते और मिलकर खूब खेलते थे। एक दिन चारों दोस्तों ने जंगल की सैर करने की योजना बनाई। मोंटू हिरण सबसे आगे खुशी से दौड़ रहा था। चीकू बंदर शरारत करते हुए मोंटू के कंधे पर हाथ रखकर जोर-जोर से हंस रहा था। उनके पीछे मीकू बकरी और गोलू बछड़ा भी खुशी से झूमते हुए दौड़ रहे थे। चारों दोस्त मिलकर बहुत खुश थे और पूरा जंगल उनकी हंसी से गूंज रहा था। तभी अचानक मोंटू हिरण का पैर एक गहरे गड्ढे में फंस गया। अपने दोस्त को मुसीबत में देखकर कोई भी पीछे नहीं हटा। चीकू बंदर ने तुरंत समझदारी दिखाई और पास पड़ी एक मजबूत लकड़ी उठा लाया। मीकू और गोलू ने मोंटू को सहारा दिया। सबने मिलकर पूरी ताकत लगाई और मोंटू को गड्ढे से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। मुसीबत टलते ही चारों दोस्त खुशी से नाचने लगे।
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नदी किनारे पिकनिक

पारुल महावर, उम्र: 8 वर्ष
एक घने जंगल में हिरन, बंदर, बकरी और भेड़ चार पक्के मित्र रहते थे। एक दिन उन्होंने नदी के उस पार पिकनिक मनाने का निश्चय किया। जब वे नदी के किनारे पहुंचे तो देखा कि वहां कोई पुल नहीं था। सभी सोचने लगे कि नदी कैसे पार करें।
तभी बंदर ने पास के पेड़ से एक मजबूत बेल तोड़ी और उसे नदी के दोनों किनारों के पेड़ों से बांध दिया। बंदर फुर्ती से बेल पकड़कर सबसे पहले नदी पार कर गया। फिर उसने दूसरी ओर से बेल को कसकर पकड़ा। हिरन, बकरी और भेड़ ने भी सावधानी से बेल का सहारा लेकर एक-एक करके नदी पार कर ली। इस तरह चारों मित्र सुरक्षित दूसरी ओर पहुंच गए।
नदी पार करने के बाद उन्होंने एक सुंदर स्थान चुना। सबने मिलकर स्वादिष्ट फल, गाजर और हरी घास खाई। फिर वे खेल खेले, गीत गाए और खूब हंसी-मजाक किया। पिकनिक समाप्त होने पर उन्होंने अपने आसपास फैला कचरा इकट्ठा किया और उसे उचित स्थान पर फेंक दिया। वे प्रकृति को स्वच्छ रखने का संदेश देना चाहते थे। शाम होने पर चारों मित्र खुशी-खुशी अपने घर लौट गए। उन्होंने निश्चय किया कि वे हमेशा मिल-जुलकर रहेंगे, एक-दूसरे की सहायता करेंगे और प्रकृति की रक्षा करेंगे।
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दोस्ती का मेला

मिस्टी भार्गव, उम्र: 9 वर्ष
जंगल के किनारे एक छोटी सी नदी बहती थी। उस नदी के पास हर रोज 4 दोस्त मिलते थे - हिरन, बंदर, भेड़ और घोड़ा। हिरन का नाम था "चीकू"। वो लाल-सफेद टी-शर्ट पहनता था और सबसे तेज भागता था। बंदर का नाम था "मोटी"। वो बैंगन रंग की डोर वाली शर्ट पहनता था और सबसे ज्यादा मजाक करता था। भेड़ का नाम था "भोलू"। वो पीले रंग की शर्ट में हमेशा हंसता रहता था। और घोड़ा थी "रानी"। वो गुलाबी पोल्का डॉट वाली फ्रॉक और नीली पैंट पहनती थी। आज चारों दोस्त बहुत खुश थे। कारण ये था कि आज जंगल में "दोस्ती उत्सव" था। सभी जानवर नदी के किनारे खेलने और डांस करने आने वाले थे। "चलो जल्दी चलो!" चीकू ने कहा और उछल कर भागा। "रुको जरा, सेल्फी तो ले!" मोटी पेड़ पर लटक कर बोला और फिर कूद कर सबके साथ भागने लगा। भोलू भेड़ भी पीछे से चिल्लाया "मैं भी आ रहा हूं, गिर मत जाना!" रानी घोड़ा सबसे आगे भाग रही थी और बोली "आज हम सबसे पहले पहुंचेंगे!" चारों दोस्त हाथ पकड़ कर, उछल-कूद करते हुए नदी के किनारे पहुंचे। सूरज ढल रहा था, पेड़ों से ठंडी हवा आ रही थी और पानी में उनकी परछाइयां नाच रही थीं। मोटी ने कहा "देखो दोस्तों, हम चार अलग-अलग हैं, पर दिल से एक हैं।" सभी ने एक साथ हाथ ऊपर उठाकर चिल्लाया "दोस्ती जिंदाबाद!" उस दिन उन्होंने सीखा कि रंग, रूप और जाति अलग हो सकती है, पर दोस्ती सबको एक कर देती है।
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जंगल में मची धूम

आर्यन सैन, उम्र: 11 वर्ष
बहुत पुरानी बात है एक जंगल में तीन दोस्त रहते थे मीकू, चीनू और सोनू। तीनों दिन भर मस्ती करते और सबकी मदद करते थे। एक दिन उन्होंने देखा जंगल में एक नया हिरण आया है लेकिन वह हमेशा चुपचाप रहता था। उन्होंने उससे बात करने की कोशिश की लेकिन उसने उनको भगा दिया। एक दिन वह हिरण पास के तालाब में पानी पीने गया जहां उसका पैर फिसल गया। सोनू बंदर ने जैसे ही पेड़ पर से यह नजारा देखा उसने मीकू और चीनू को मदद के लिए बुलाया। तीनों ने पेड़ की डालियों से रस्सी बनाई और उसे खींचकर तालाब से बाहर निकाला। हिरण बाहर आया तो उसकी आंखों में आंसू थे, तीनों ने मिलकर उसे गले लगाया। अब चारों मिलकर जंगल में मदद की धूम मचाने लगे।
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जंगल की अनोखी रेस

समीक्ष गोयल, उम्र: 7 वर्ष
एक दिन जंगल के स्कूल में एक अनोखी रेस हुई। सर ने कहा, "जो दौड़ते हुए रास्ते का सारा प्लास्टिक कचरा उठाकर लाएगा, उसे चमकीली ट्रॉफी मिलेगी।" रेस शुरू होते ही मोटू बंदर पेड़ों से थैलियां उठाने लगा और पतलू जमीन से बोतलें बीनने लगा। भीम हिरण बहुत फुर्तीला था, वह सबसे ज्यादा कचरा बटोरकर फिनिश लाइन के बिल्कुल पास पहुंच गया। तभी पीछे से रोने की आवाज आई। छोटा राजू एक कंटीली झाड़ी में फंस गया था। भीम ने देखा कि एक कदम आगे बढ़ाते ही ट्रॉफी उसकी होगी, पर उसने ट्रॉफी की परवाह नहीं की और पीछे भागा। उसने मोटू-पतलू को भी बुलाया। तीनों ने मिलकर राजू को झाड़ी से निकाला। रेस का समय खत्म हो रहा था, इसलिए उन्होंने सारा कचरा एक बड़े थैले में भरा और सबने एक साथ हंसते हुए लाइन पार की। यह देखकर प्रिंसिपल भालू सर ने ताली बजाई और वह सुंदर ट्रॉफी चारों दोस्तों को दे दी।
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सच्ची दोस्ती की जीत

जैनम डांगी, उम्र: 12 वर्ष
एक सुंदर जंगल में चार अच्छे दोस्त रहते थे हिरण, बंदर, बकरी और घोड़ा। वे हर दिन साथ खेलते, घूमते और एक-दूसरे की मदद करते थे। उनकी दोस्ती पूरे जंगल में मशहूर थी। वे हमेशा खुश रहते और कभी किसी से झगड़ा नहीं करते थे। एक दिन वे खेलते-खेलते जंगल के अंदर चले गए। अचानक उन्हें एक छोटा खरगोश रोता हुआ दिखाई दिया। उसने बताया कि वह अपने परिवार से बिछड़ गया है और उसे घर का रास्ता नहीं मिल रहा। यह सुनकर चारों दोस्तों ने उसकी मदद करने का निश्चय किया। बंदर पेड़ पर चढ़कर दूर-दूर तक देखने लगा। हिरण तेजी से अलग-अलग रास्तों पर खोज करने लगा। घोड़ा खरगोश को अपनी पीठ पर बैठाकर सुरक्षित जगह ले गया और बकरी उसे हिम्मत बंधाती रही। थोड़ी देर बाद बंदर ने खरगोश के परिवार को ढूंढ लिया। खरगोश अपने परिवार से मिलकर बहुत खुश हुआ और उसने चारों दोस्तों का धन्यवाद किया। खरगोश के माता-पिता ने भी उनकी ईमानदारी और दयालुता की बहुत प्रशंसा की। उस दिन सभी ने मिलकर खुशी मनाई और यह वादा किया कि वे हमेशा जरूरतमंदों की मदद करेंगे।
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सच्ची दोस्ती और अनोखा उत्सव

पार्थ पंसारी, उम्र: 7 वर्ष
चंदन वन में चीकू बंदर, मीकू बारहसिंगा, चिंटू जिराफ और लाडो भेड़ चारों पक्के दोस्त थे। वे हमेशा एक-दूसरे की मदद करते थे और साथ मिलकर नई-नई योजनाएं बनाते थे। एक दिन, चंदन वन में भारी बारिश के बाद मौसम बेहद सुहाना हो गया। आसमान साफ था, चारों तरफ हरियाली छा गई थी और पास की नदी का पानी चांदी की तरह चमक रहा था। इतने सुंदर दिन को देखकर चीकू बंदर खुशी से उछल पड़ा और बोला, "दोस्तों, आज का दिन घर में बैठने का नहीं है। क्यों न हम सब मिलकर एक अनोखा उत्सव मनाएं और खूब नाच-गाना करें?" सभी दोस्तों को चीकू का यह विचार बहुत पसंद आया। उन्होंने तुरंत रंग-बिरंगे कपड़े पहने मीकू ने अपनी पसंदीदा धारीदार लाल टी-शर्ट पहनी, चीकू ने बैंगनी टी-शर्ट चुनी, लाडो भेड़ ने पीली शर्ट निकाली और छोटे जिराफ चिंटू ने गुलाबी डॉट्स वाली पोशाक पहनी। वे सभी नदी के किनारे खुली घास के मैदान में इकट्ठा हुए। चीकू बंदर ने तालियां बजाकर एक मधुर धुन गुनगुनाना शुरू किया। धुन सुनते ही मीकू बारहसिंगा एक पैर उठाकर नाचने लगा, लाडो भेड़ खुशी से झूम उठी और चिंटू जिराफ अपनी लंबी गर्दन हिलाते हुए तेजी से कदम थिरकाने लगा। चारों दोस्त अपनी सारी चिंताएं भूलकर मस्ती में डूब गए। वे इतनी खुशी से नाच रहे थे कि जंगल के अन्य जानवर भी उन्हें देखकर मुस्कुराने लगे।
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सच्ची दोस्ती का जश्न

राजवीर प्रताप महतो, उम्र: 13 वर्ष
एक सुंदर और घने जंगल में चार पक्के दोस्त रहते थे चीकू बंदर, चीकू हिरण, मोंटी गाय का बछड़ा और छोटू मेमना। वे सब रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर रोज नई-नई जगहों पर घूमने जाते थे। एक दिन जंगल में बहुत तेज बारिश हुई, जिससे चारों तरफ पानी भर गया और कीचड़ हो गया। सभी जानवर अपने घरों में छुप गए और उदास हो गए। लेकिन इन चारों दोस्तों ने उदास होने के बजाय इस मौसम का आनंद लेने का फैसला किया। जैसे ही बारिश रुकी, वे अपनी पसंदीदा पोशाक पहनकर बाहर निकल आए। उन्होंने कीचड़ में छपाक-छई खेला, एक-दूसरे को मजेदार चुटकुले सुनाए और खुशी से झूमने लगे। चीकू बंदर तो हवा में हाथ लहराकर नाचने लगा, जबकि हिरण ने ऊंची छलांग लगाकर उसका साथ दिया। छोटू और मोंटी भी अपनी मस्ती में दौड़ लगा रहे थे। उनकी हंसी की आवाज से पूरा जंगल गूंज उठा। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर अच्छे दोस्त साथ हों, तो हर मौसम सुहाना और हर पल एक खूबसूरत त्योहार बन जाता है।

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छोटी-छोटी खुशियां

आफिया छीपा, उम्र: 11 वर्ष
एक वन में चार अच्छे मित्र रहते थे एक हिरण, एक बंदर, एक बकरी और एक बछड़ा। चारों में बहुत गहरी मित्रता थी। वे प्रतिदिन साथ खेलते, हंसते और आनंद से समय बिताते थे। एक दिन वे जंगल में घूम रहे थे। तभी बंदर ने एक पेड़ पर लटका हुआ झूला देखा। वह खुशी से झूले पर चढ़ गया। उसे झूलता देखकर उसके मित्र भी बहुत प्रसन्न हुए। इसके बाद चारों मित्र दौड़ने लगे, उछल-कूद करने लगे और खूब हंसी-मजाक किया। शाम होने पर वे अपने-अपने घर लौट गए। उस दिन की छोटी-सी मस्ती ने उनके मन को बहुत आनंद दिया। उन्होंने समझा कि सच्ची खुशी बड़ी चीजों में नहीं, बल्कि छोटी-छोटी बातों और अपने मित्रों के साथ बिताए गए पलों में होती है।
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सच्ची मित्रता की पहचान

तिशा पुरसवानी, उम्र: 11 वर्ष
एक सुंदर जंगल के किनारे चार अच्छे मित्र रहते थे हिरन, बंदर, मेमना और बछिया। चारों हमेशा साथ खेलते, हंसते और एक-दूसरे की मदद करते थे। उनकी दोस्ती पूरे जंगल में प्रसिद्ध थी। एक दिन सुबह-सुबह चारों ने नदी के किनारे घूमने और पिकनिक मनाने का निश्चय किया। वे खुशी-खुशी गाते हुए जंगल के रास्ते पर चल पड़े। रास्ते में बंदर पेड़ों पर उछल-कूद कर सबका मनोरंजन करता, हिरन तेज दौड़ लगाता, मेमना मस्ती से कूदता और बछिया मधुर गीत गुनगुनाती। अचानक मेमने का पैर एक गड्ढे में फंस गया। वह डर गया और जोर-जोर से मदद के लिए पुकारने लगा। उसके तीनों मित्र तुरंत उसके पास पहुंचे। हिरन ने अपनी ताकत से उसे ऊपर खींचा, बंदर ने पेड़ की बेल लाकर सहारा दिया और बछिया ने उसे हिम्मत बंधाई। कुछ ही देर में मेमना सुरक्षित बाहर आ गया। मेमने ने अपने दोस्तों का धन्यवाद किया और कहा, “अगर तुम सब साथ न होते तो मैं मुश्किल में पड़ जाता।” चारों मित्र फिर नदी के किनारे पहुंचे। वहां उन्होंने स्वादिष्ट फल खाए, खेल खेले और खूब आनंद किया। शाम होने पर वे खुशी-खुशी अपने घर लौट आए। उस दिन उन्हें समझ में आया कि सच्चा मित्र वही होता है जो हर कठिन समय में साथ खड़ा रहे।
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दोस्तों का मिलन

खुशवर्धन सिंह राठौर, उम्र: 10 वर्ष
एक घने जंगल में गोटू बंदर, जयू हिरण, मेघु जिराफ और हनु भेड़ बचपन के जिगरी यार थे। एक साल पहले जंगल में भयानक आग लगी थी, जिसने सबकुछ तहस-नहस कर दिया। अपनी जान बचाने के लिए चारों दोस्त अलग-अलग दिशाओं में भाग खड़े हुए। उस हादसे ने उन्हें एक-दूसरे से बहुत दूर कर दिया था। जुदा होने के बाद, चारों दोस्तों की जिंदगी बेरंग हो गई थी। वे जहां भी रहे, हर पल बस एक-दूसरे की सलामती की दुआ मांगते रहे। एक साल बीत जाने पर, जब जंगल की आग पूरी तरह शांत हुई और सूखी धरती पर फिर से हरी घास उगी, तो पुरानी यादें उन्हें खींचकर वापस उसी जगह ले आईं। एक दोपहर, पुरानी नदी के किनारे अचानक चारों की राहें एक बार फिर टकरा गईं। एक-दूसरे को जिंदा देखकर चारों की आंखों से आंसुओं का सैलाब बह निकला। जयू हिरण खुशी और गम के मिले-जुले अहसास में झूम उठा। गोटू बंदर ने कांपते हाथों से ऊपर वाले का शुक्रिया अदा किया और मेघु जिराफ व हनु भेड़ को गले लगाने के लिए दौड़ पड़ा। वे चारों एक-दूसरे से कसकर लिपट गए और फूट-फूटकर रोने लगे। बिछड़ने का वह भयानक दर्द अब हमेशा के लिए खत्म हो चुका था। उनकी आंखों में अब सिर्फ दोबारा मिलने की अटूट खुशी थी। उन्होंने ठान लिया कि अब वे कभी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ेंगे।
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मिलजुल कर रहना अच्छा होता है

अनिक्षा भारद्वाज, उम्र: 7 वर्ष
राजू बंदर, कालू भेड़, चीनू बकरी और विक्की हिरण चारों पक्के दोस्त थे। वे हमेशा साथ रहते थे। वे कहीं भी घूमने जाते तो साथ-साथ जाते और खेलते थे। एक दिन चारों घूमने निकले तो उनको एक बगीचा दिखाई दिया। चारों उस बगीचे में खेलने और दौड़ लगाने लगे। वहां बेचारी चीनू बकरी एक झाड़ी में फंस गई और कालू भेड़ जोर-जोर से चिल्लाने लगी। राजू बंदर दौड़कर उनके पास आया। उसने चीनू को फंसा देख विक्की हिरण से मदद मांगी। तीनों दोस्तों ने मिलकर चीनू बकरी को झाड़ी से सुरक्षित बाहर निकाला। फिर चारों एक-दूसरे को धन्यवाद देने लगे और साथ में नाचने लगे। राजू बंदर ने कहा कि हम सब आपस में मिलकर रहेंगे तो हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। इसलिए सब आपस में मिलजुल कर रहेंगे तो अच्छा होगा और कभी मुसीबत में पड़े तो एक-दूसरे की मदद कर पाएंगे।
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समझदार कौआ

गर्वित सोनगरा, उम्र: 9 वर्ष
एक बहुत ही गर्म दोपहर में एक कौआ प्यास से तड़प रहा था। उसे एक घड़ा मिला, जिसमें पानी बहुत नीचे था। कौआ समझदार था, उसने आस-पास कंकड़ ढूंढे, लेकिन वहां एक भी कंकड़ नहीं था। धूप तेज थी और उड़कर दूर जाने की उसमें हिम्मत नहीं थी। तभी उसकी नजर पास ही पड़े एक प्लास्टिक के स्ट्रॉ पर पड़ी। कौए ने बिना समय गंवाए स्ट्रॉ को अपनी चोंच से उठाया, उसे घड़े के पानी में डाला और मजे से पानी पीकर अपनी जान बचाई और उड़ गया।
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चार दोस्त और जंगल का मेला

अहाना राठौर, उम्र: 10 वर्ष
घने जंगल के पास एक छोटी नदी बहती थी। उसी नदी के किनारे चार पक्के दोस्त रहते थे - चंचल हिरण, मस्ती बंदर, गोलू भेड़ और टिंकू बछड़ा। आज जंगल में बड़ा मेला लगने वाला था। केले के पेड़ के नीचे ऐलान हुआ कि "जो सबसे पहले मेले का झंडा लेकर आएगा, उसे मीठे आम का टोकरा मिलेगा।" सभी जानवर झट से दौड़ पड़े। लोमड़ी सबसे आगे निकल गई, खरगोश भी कुलाचे मारने लगा। पर हमारे चार दोस्तों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और मुस्कुरा दिए। चंचल ने कहा "दोस्तों, अकेले दौड़ने से क्या फायदा? चलो साथ चलते हैं।" मस्ती बंदर उछलकर बोला "हां! रास्ते में गाना भी गाएंगे और मस्ती भी करेंगे।" बस फिर चारों ने हाथ में हाथ डाला और दौड़ना शुरू किया। रास्ते में गोलू एक पत्थर से ठोकर खाकर गिर पड़ा। टिंकू तुरंत रुका और उसे उठाया। थोड़ी देर बाद चंचल थक गया तो मस्ती ने उसे हंसाकर फिर से दौड़ाया। जब तक वे चारों मेले में पहुंचे, झंडा तो कोई और ले जा चुका था। सबको लगा अब आम का टोकरा नहीं मिलेगा। पर तभी जंगल के राजा शेर दादा आए और बोले "रुको! असली जीत उनकी है जो गिरते को उठाते हैं और साथ चलते हैं।" शेर दादा ने चारों को चार टोकरे इनाम में दिए और कहा "दोस्ती सबसे बड़ा इनाम है।" उस दिन के बाद जंगल में एक नई कहावत बन गई - "तेज अकेले भागो, दूर साथ जाओ।"
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अनोखा पुल और सच्ची मित्रता

अनिका पंसारी, उम्र: 7 वर्ष
सुंदरवन के हरे-भरे जंगल में चार अभिन्न मित्र रहते थे 'अनी' हिरनी, 'देव' बछड़ा, नटखट बंदर और भोलू भेड़। वे हमेशा एक-दूसरे के साथ मिलकर खेलते और नई चीजें सीखते थे। एक दिन उन्होंने सुना कि नदी के पार एक 'सपनों का बगीचा' है, जहां के जादुई फल खाने से ज्ञान और खुशी दोनों बढ़ते हैं। चारों दोस्त उत्साह से भरे, अपने सबसे सुंदर और रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर नदी की ओर चल पड़े। लेकिन जब वे नदी किनारे पहुंचे, तो देखा कि वहां का लकड़ी का पुराना पुल तेज बहाव में टूट चुका था। भोलू भेड़ उदास हो गई और बोली, "अब हम नदी कैसे पार करेंगे? हमारी यात्रा तो यहीं खत्म हो गई।" तभी 'अनी' हिरनी ने समझदारी से कहा, "निराश मत हो! अगर हम सब मिलकर कोशिश करें, तो कोई न कोई रास्ता जरूर निकलेगा।" नटखट बंदर तुरंत फुर्ती से पेड़ पर चढ़ा और कुछ मजबूत बेलें तोड़ लाया। 'देव' बछड़े ने अपनी ताकत का इस्तेमाल किया और एक भारी लकड़ी के लट्ठे को धकेल कर नदी के किनारे लगा दिया। फिर 'अनी' हिरनी ने अपनी तेज गति से एक लंबी छलांग लगाई और बेल का दूसरा सिरा पार वाले पेड़ के तने से मजबूती से बांध दिया। भोलू भेड़ ने अपनी थोड़ी सी मुलायम ऊन से बेल के किनारों को लपेट दिया ताकि पुल पार करते समय किसी के हाथ न छिलें। देखते ही देखते, चारों की समझदारी और मेहनत से एक नया, सुरक्षित पुल तैयार हो गया। वे खुशी-खुशी गाते-झूमते हुए पुल पार कर गए।
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जंगल की दौड़ और दोस्ती

अनमोल साहू, उम्र: 10 वर्ष
एक बार की बात है, हरे-भरे जंगल में वार्षिक "खुशी दौड़" का आयोजन हुआ। इस दौड़ में जीतना जरूरी नहीं था, मकसद था सबका साथ और मस्ती। इस बार चार पक्के दोस्त दौड़ में हिस्सा लेने वाले थे: हिरनू (तेज हिरन), मंकी (शरारती बंदर), भेड़ू (प्यारी भेड़) और घुड़की (जोशीली घोड़ी)। दौड़ शुरू होने से पहले चारों ने हाथ मिलाया और कहा, "हम एक साथ दौड़ेंगे, एक साथ जीतेंगे!" सीटी बजते ही चारों दौड़ पड़े। मंकी सबसे आगे उछल रहा था, हिरनू उसके साथ कदम मिला रहा था। पीछे भेड़ू और घुड़की भी पूरी ताकत से भाग रही थीं। रास्ते में नदी थी, कीचड़ था, पर कोई रुका नहीं। आधे रास्ते में घुड़की का पैर फिसल गया और वह गिर पड़ी। सब रुक गए। मंकी बोला, "अरे! चोट तो नहीं आई?" हिरनू ने कहा, "चलो मिलकर उठाते हैं।" भेड़ू दौड़कर पानी ले आई। चारों ने मिलकर घुड़की को उठाया। घुड़की की आंख में आंसू थे। वह बोली, "तुम लोग आगे चले जाओ, मैं धीमी हूं।" तब हिरनू बोला, "नहीं दोस्त! दौड़ बाद में, दोस्ती पहले। हम सब साथ में ही फिनिश लाइन पार करेंगे।" चारों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़ा और धीरे-धीरे चलते हुए फिनिश लाइन तक पहुंचे। जज ने जब देखा तो बोले, "आज की दौड़ का इनाम इन चारों की दोस्ती को जाता है। क्योंकि असली जीत अकेले दौड़ने में नहीं, सबको साथ लेकर चलने में है।" उस दिन जंगल में सबसे बड़ी पार्टी हुई। सबने सीखा कि मदद का फल मीठा होता है और दोस्ती सबसे बड़ी ताकत है।
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सच्चे मित्र

प्रसून पारीक, उम्र: 9 वर्ष
एक जंगल में चार मित्र हिरण, बंदर, भेड और बकरी रहते थे। सभी साथ-साथ रहते और मुसीबत में एक दूसरे की मदद करते थे। एक दिन शाम को सभी दोस्त आ गए लेकिन हिरण नहीं आया। काफी इंतजार करने के बाद सभी उसको ढूंढने निकले। थोडी दूर उन्हें हिरण जाल में फंसा मिला। बंदर ने जाल को खोल दिया। तभी शिकारी हिरण को पकडने के लिए दौडा। भेड और बकरी ने पीछे से शिकारी पर हमला कर दिया। इस अचानक हमले से शिकारी डरकर भाग गया। सभी मित्र आज बहुत खुश थे क्योंकि आज उन्होंने सच्ची मित्रता निभाई थी।

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सच्ची दोस्ती की मिसाल

रुद्र ओझा, उम्र: 13 वर्ष
एक सुंदर जंगल में चार अच्छे मित्र रहते थे हिरन, बंदर, भेड और जिराफ। चारों हर दिन साथ खेलते, घूमते और एक-दूसरे की मदद करते थे। उनकी दोस्ती पूरे जंगल में मशहूर थी और वे किसी भी परेशानी का मिलकर सामना करते थे। एक दिन वे जंगल में खेल रहे थे। तभी अचानक भेड का पैर एक गड्ढे में फंस गया। वह बहुत डर गई और जोर-जोर से मदद के लिए पुकारने लगी। उसके मित्र तुरंत उसके पास पहुंचे। बंदर पेड से कूदकर आया, हिरन ने भेड को हिम्मत बंधाई और जिराफ ने अपनी लंबी गर्दन की मदद से पास पडी मजबूत बेल खींचकर लाई। तीनों ने मिलकर बहुत प्रयास किया और आखिरकार भेड को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। भेड ने अपने दोस्तों का धन्यवाद किया और कहा, "यदि तुम सब समय पर मेरी मदद नहीं करते, तो मैं बडी मुसीबत में पड जाती।" चारों मित्र फिर खुशी-खुशी खेलने लगे। उस दिन उन्हें समझ आया कि सच्चा मित्र वही होता है, जो कठिन समय में साथ खडा रहे। उसके बाद उन्होंने वचन लिया कि वे हमेशा एक-दूसरे की सहायता करेंगे और कभी किसी का साथ नहीं छोडेंगे।
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सच्ची मित्रता


ख्यांश खत्री, उम्र: 8 वर्ष
एक सुंदर जंगल में चार अच्छे मित्र रहते थे हिरन, बंदर, बकरी और बछडा। चारों रोज साथ खेलते, घूमते और एक-दूसरे की मदद करते थे। वे हमेशा खुश रहते और कभी किसी को अकेला नहीं छोडते थे। एक दिन वे जंगल की पगडंडी पर घूमने निकले। रास्ते में अचानक बकरी का पैर एक गड्ढे में फंस गया। वह डर गई और जोर-जोर से मदद के लिए पुकारने लगी। उसके दोस्तों ने तुरंत उसकी आवाज सुनी। बंदर पास के पेड से एक मजबूत बेल लेकर आया। हिरन ने अपनी ताकत से बकरी को सहारा दिया और बछडे ने बेल को खींचने में मदद की। थोडी ही देर में सबने मिलकर बकरी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बकरी अपने मित्रों की सहायता से बहुत खुश हुई। उसने सबका धन्यवाद किया और कहा, “सच्चे मित्र वही होते हैं जो कठिन समय में साथ निभाएं।” उस दिन सभी ने यह महसूस किया कि मित्रता का सबसे बडा आधार प्रेम, विश्वास और सहयोग है।
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सच्ची दोस्ती का जश्न


परम कंसारा, उम्र: 9 वर्ष
सुंदरवन में चीकू बंदर, मीकू हिरण, रोनी भेड और गोलू जिराफ का बच्चा बहुत पक्के दोस्त थे। वे रोज शाम को नदी के किनारे मैदान में इकट्ठा होते और नए-नए खेल खेलते थे। एक दिन, जंगल में सालाना 'बाल उत्सव' की घोषणा हुई। इस उत्सव में सभी बच्चों को मिलकर एक नृत्य प्रतियोगिता में भाग लेना था। चारों दोस्त बहुत खुश हुए और उन्होंने मिलकर हिस्सा लेने का फैसला किया। चीकू बंदर ने कहा, "हम सब मिलकर ऐसा डांस करेंगे कि सब देखते रह जाएंगे!" उन्होंने रोज शाम को नदी के किनारे अभ्यास करना शुरू कर दिया। मीकू हिरण अपनी लंबी टांगों से ताल मिलाता, चीकू बंदर कलाबाजियां खाता, रोनी भेड अपनी धुन में झूमती और गोलू जिराफ खुशी से थिरकता। उत्सव के दिन, चारों ने रंग-बिरंगे कपडे पहने चीकू ने धारीदार टी-शर्ट, मीकू ने लाल शर्ट और गोलू ने बिंदुओं वाली शर्ट पहनी। जब उनका नाम पुकारा गया, तो वे सब नाचते हुए मंच पर आए। उनका तालमेल और चेहरे की खुशी देखकर पूरा जंगल तालियों से गूंज उठा। उन्होंने प्रतियोगिता में पहला पुरस्कार जीता। जीत की खुशी में वे सब झूमते हुए नदी के किनारे वापस आए और एक-दूसरे का हाथ पकडकर हवा में उछलते हुए खुशी मनाने लगे।
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हंसता-खेलता जंगल

प्रनवी अग्रवाल, उम्र: 11 वर्ष
एक जंगल साफ और सुंदर रहता था। वहां पर बंदर, भालू, हिरण और अन्य कई जानवर रहते थे। वे लोग बहुत खुश रहते थे और उसे अपना एकदम प्यारा घर मानते थे। वहां का पानी भी सुंदर और चकाचक रहता था। वहां ना कोई प्लास्टिक था और ना ही कुछ अलग कचरा। उनकी जिंदगी बहुत बेमिसाल थी और सारे जानवर एक दूसरे के दोस्त थे। वे मुसीबत पडने पर एक दूसरे की मदद करते थे, जैसे आग, बाढ, तूफान और अधिक बारिश में। वे दूसरों के साथ मिलजुल कर खाना खाते थे। वे किसी भी जानवर को नहीं मारते थे, यहां तक कि चींटी को भी नहीं कुचलते थे। वे बहुत ही खुश रहते थे।
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मिल-जुलकर आगे बढ़ो

आराध्या शर्मा, उम्र: 8 वर्ष
एक दिन जंगल के चार दोस्त हिरन, बंदर, भेड और बछड़ा खुशी-खुशी घूमने निकले। रास्ते में उन्हें एक छोटी नदी मिली। भेड नदी पार करने से डर रही थी। बंदर ने पेड की डाल पकडकर सहारा दिया, हिरन ने रास्ता दिखाया और बछडे ने भेड का हौसला बढाया। सबकी मदद से भेड सुरक्षित नदी पार कर गई। भेड ने कहा, अगर हम साथ हों, तो कोई भी मुश्किल बडी नहीं होती। उस दिन सभी दोस्तों ने सीखा कि एकता और सहयोग ही सबसे बडी ताकत है।
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सच्ची जीत और एकता

अनमोल शर्मा, उम्र: 11 वर्ष
सुंदरवन में हर साल एक बड़ी खेल प्रतियोगिता होती थी। इस बार चीकू बंदर, मीकू हिरण, रोनी भेड़ और गोलू बछड़ा ने मिलकर एक रिले रेस में भाग लेने का फैसला किया। बाकी जानवर उनका मजाक उड़ा रहे थे क्योंकि चारों स्वभाव और शारीरिक क्षमता में एक-दूसरे से बिल्कुल अलग थे। हिरण तेज दौड़ सकता था, लेकिन भेड़ धीमी थी; बंदर पेड़ों पर फुर्तीला था, लेकिन जमीन पर दौड़ने में पीछे रह जाता था। दौड़ शुरू हुई। मीकू हिरण ने अपनी तेज रफ्तार से टीम को अच्छी शुरुआत दी, लेकिन जब उसने बैटन चीकू बंदर को सोंपी, तो चीकू लड़खड़ा गया। तभी रोनी भेड़ और गोलू बछड़े ने चिल्लाकर उसका हौसला बढ़ाया, "हार मत मानो चीकू, आगे बढ़ो!" अपने दोस्तों का भरोसा देखकर चीकू पूरी ताकत से दौड़ा। आखिरी छोर पर गोलू ने अपनी पूरी जान लगा दी और चारों ने मिलकर रेस जीत ली। जीत के बाद चारों दोस्त खुशी से झूम उठे और नाचने लगे। उन्होंने सबको दिखा दिया कि जब हम अपनी कमियों को भूलकर एक-दूसरे की ताकत बनते हैं, तो जीत पक्की हो जाती है।
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सच्चे मित्र और अनोखा उत्सव

कृतिका शर्मा, उम्र: 11 वर्ष
सुंदरवन में चीकू बंदर, मीतू हिरण, गोलू भेड़ और छोटू जिराफ रहते थे। चारों में बहुत पक्की दोस्ती थी। वे रोज शाम को नदी के किनारे मिलते और ढेर सारी मस्ती करते थे। अलग-अलग स्वभाव के होने के बावजूद, उनकी दोस्ती की मिसाल पूरे जंगल में दी जाती थी। एक दिन, सुंदरवन में सुबह से ही मूसलाधार बारिश हो रही थी। बारिश के कारण सभी अपने-अपने घरों में बंद थे। चीकू बंदर खिड़की से बाहर देखते हुए उदास हो रहा था। तभी दोपहर को अचानक बारिश रुक गई और आसमान में एक खूबसूरत सतरंगी इंद्रधनुष दिखाई देने लगा। खुशी के मारे चीकू तुरंत बाहर भागा। नदी के किनारे पहुंचते ही उसने देखा कि उसके बाकी दोस्त भी वहां आ चुके थे। ठंडी हवा चल रही थी और चारों तरफ हरियाली थी। मौसम इतना सुहावना था कि चारों दोस्त अपनी खुशी पर काबू नहीं रख पाए। चीकू ने जोर से ताली बजाई और नाचने लगा। उसे देखकर मीतू ने ऊंची छलांग लगाई, गोलू मटकने लगा और छोटू भी खुशी से झूम उठा। सबने एक-दूसरे का हाथ पकड़ा और गाते-झूमते हुए दौड़ लगाने लगे। उनकी हंसी से पूरा जंगल गूंज उठा। उस दिन उन्होंने जाना कि जब सच्चे दोस्त साथ हों, तो हर पल उत्सव बन जाता है।
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वाटर पार्क की मस्ती

जयेश मंगल, उम्र: 9 वर्ष
एक बार चार दोस्त थे गल्लू, बालू, मौली और ढोलक। चारों दोस्त कुछ मस्ती करने की सोच रहे थे, तो उन्होंने वाटर पार्क जाने की योजना बनाई और निश्चय किया कि वे अगले दिन वाटर पार्क जाएंगे। वाटर पार्क जाने की खुशी में चारों दोस्त जल्दी ही उठ गए और अपने सारे काम निपटा कर तैयारी करने लगे। सारी तैयारी करके सभी दोस्त जल्दी से वाटर पार्क पहुंचे। वहां पहुंचने पर उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। चारों दोस्तों ने मिलकर बहुत मस्ती और धमाल किया, जिसमें उन्हें बड़ा मजा आया।
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दयालु हिरण

नव्या केडिया, उम्र: 7 वर्ष
एक हिरण थी और उसके दो बच्चे थे। उसका एक दोस्त बंदर था, जिसे केले खाना बहुत पसंद था। एक दिन हिरण के घर पर खाना खत्म हो गया। वह बंदर के घर गई और उससे पूछा, "क्या तुम मुझे खाना दोगे?" बंदर ने खाना देने से मना कर दिया। फिर हिरण ने कहीं से खाना ढूंढ लिया और अपनी व अपने बच्चों की भूख शांत की। थोड़े दिनों बाद सर्दियां आने वाली थीं। हिरण समझदार थी, इसलिए उसने अपना खाना बचाकर जमा कर लिया। लेकिन बंदर केवल मस्ती कर रहा था। जब सर्दियां आ गईं, तो बंदर के पास खाना नहीं था और वह इधर-उधर खाना ढूंढ रहा था। तभी उसे हिरण का घर दिखा। वह वहां गया और दरवाजा खटखटाया। हिरण के बच्चे ने दरवाजा खोला। बंदर ने पूछा, "क्या तुम मुझे खाना दोगे?" उसने कहा, "हां, तुम अंदर आ जाओ।" हिरण ने उसे खाना दे दिया।
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मिल-जुलकर रहने का आनंद

विजेता राजुरकर, उम्र: 7 वर्ष
एक सुंदर जंगल में चार प्यारे दोस्त रहते थे हिरन, बंदर, बकरी और बछड़ा। चारों रोज साथ खेलते, हंसते और एक-दूसरे की मदद करते थे। एक दिन वे जंगल की सैर पर निकले। रास्ते में वे गीत गाते हुए खुशी-खुशी आगे बढ़ रहे थे। चलते-चलते बछड़े का पैर एक पत्थर से टकरा गया और वह गिर पड़ा। यह देखकर बाकी तीनों दोस्त तुरंत उसके पास पहुंचे। उन्होंने उसे उठाया, उसका हाल पूछा और प्यार से उसका हौसला बढ़ाया। थोड़ी देर में बछड़ा फिर से मुस्कुराने लगा। इसके बाद चारों दोस्तों ने मिलकर खेला, पेड़ों की छाया में आराम किया और ढेर सारी बातें की। शाम होने पर वे खुशी-खुशी अपने-अपने घर लौट गए। उस दिन उनकी दोस्ती और भी गहरी हो गई।
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सुंदरवन की अनोखी टोली

गाम्या मील, उम्र: 10 वर्ष
सुंदरवन नाम के एक विशाल जंगल में चार पक्के दोस्त रहते थे मोंटू हिरण, चीकू बंदर, बिट्टू भेड़ और रीमा मेमना। वे सब दिखने, रहने और स्वभाव में एक-दूसरे से बिल्कुल अलग थे, लेकिन उनकी आपसी दोस्ती बहुत गहरी और अटूट थी। मोंटू हिरण हमेशा फुर्तीला और सबकी मदद करने के लिए तैयार रहता था, चीकू बंदर बहुत नटखट और मजाकिया था, बिट्टू भेड़ शांत स्वभाव का था, और नन्ही रीमा हमेशा रंग-बिरंगे फूल वाले कपड़े पहनकर सजना-संवरना पसंद करती थी। एक सुहावने दिन, चारों दोस्तों ने जंगल के दूसरे छोर पर स्थित एक नए और खूबसूरत फलदार बगीचे को देखने का फैसला किया। सुबह-सुबह वे सब सज-धजकर अपनी यात्रा पर निकल पड़े। रास्ते में ठंडी हवा चल रही थी और चारों तरफ हरियाली थी। वे सब मिलकर जोर-जोर से गाने गाते और नाचते हुए आगे बढ़ रहे थे। चलते-चलते अचानक चीकू बंदर थक गया और उसके पैरों में दर्द होने लगा। अपने मित्र को परेशान देखकर दयालु मोंटू हिरण ने मुस्कुराते हुए कहा, "चीकू, तुम उदास मत हो, तुम मेरे मजबूत कंधे पर बैठ जाओ!" चीकू तुरंत उछलकर मोंटू की पीठ पर बैठ गया और खुशी से चिल्लाने लगा। बिट्टू भेड़ और नन्ही रीमा भी उनके इस आपसी प्यार को देखकर खिलखिलाकर हंस पड़े और उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चलने लगे। रास्ते भर वे सब एक-दूसरे को मजेदार कहानियां और चुटकुले सुनाते रहे। जंगल के बाकी जानवर इस अनोखी टोली की एकता, आपसी तालमेल और निस्वार्थ प्यार को देखकर दंग रह गए। बगीचे में पहुंचकर सबने मिलकर मीठे-मीठे फलों का आनंद लिया। इस प्यारे सफर ने उन्हें सिखाया कि जब सच्चे दोस्त साथ हों, तो रास्ता कितना भी लंबा क्यों न हो, आसानी से कट जाता है। उनकी यह सच्ची दोस्ती पूरे सुंदरवन के लिए एक खूबसूरत मिसाल बन गई थी।
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जंगल की सैर

मोनिषा सैनी, उम्र: 9 वर्ष
एक घने जंगल में चार पक्के दोस्त रहते थे मीकू बंदर, चीकू हिरण, टीकू भेड़ और पिकू गाय। चारों हमेशा एक साथ रहते, खेलते, खाते और घूमते थे। एक दिन उन चारों ने जंगल के दूसरी तरफ हरे-भरे मैदान में जाने का सोचा। चारों दोस्त नाचते-गाते हुए उस तरफ चल दिए। उन्हें रास्ते में एक छोटी नदी मिली। नदी के किनारे हरी-भरी घास और बरगद का पेड़ था और मौसम सुहावना था। नदी के ऊपर एक लकड़ी का पुल बना हुआ था। उन्होंने एक दूसरे का हाथ पकड़कर धीरे-धीरे पुल को पार कर लिया। जंगल के मैदान में पहुंच कर उन्होंने खूब सारे खेल खेले, नाच-गाकर खुशी मनाई और शाम को अपने घर लौट आए।
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चार मित्रों की कहानी

हर्षित, उम्र: 8 वर्ष
एक जंगल में चार मित्र रहते थे। वे रोज तालाब के किनारे खेलने जाते थे। एक दिन चारों मित्र हिरण, बकरी, भेड़ और बंदर तालाब के किनारे खेल रहे थे। तभी बकरी का पैर फिसल गया और वह तालाब में गिर गई। तीनों मित्रों ने उसे जल्दी से तालाब से बाहर निकाला और बकरी को डूबने से बचा लिया। चारों मित्र बहुत खुश हुए और अपने-अपने घर चले गए।
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सच्ची दोस्ती

जय अग्रवाल, उम्र: 7 वर्ष
एक सुंदर जंगल में हिरन, बंदर, बकरी और गाय चार अच्छे दोस्त रहते थे। वे हर दिन साथ खेलते, दौड़ते और खूब मस्ती करते थे। वे हमेशा एक-दूसरे की मदद करते थे। एक दिन वे जंगल में घूम रहे थे। तभी बकरी का पैर एक पत्थर से टकरा गया और वह गिर गई। उसके दोस्तों ने तुरंत उसे उठाया। बंदर पेड़ से मीठे फल लाया, हिरन पानी लेकर आया और गाय ने बकरी का हौसला बढ़ाया। कुछ देर आराम करने के बाद बकरी फिर से ठीक हो गई। सभी दोस्त बहुत खुश हुए और फिर से हंसते-खेलते जंगल में घूमने लगे।
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सच्चे मित्र


चंद्रप्रभा, उम्र: 8 वर्ष
एक सुंदर जंगल में हिरण, भेड और एक बंदर रहते थे। एक दिन जंगल में सूखा पड गया। तभी बंदर को पेड पर बहुत सारे फल दिखाई दिए। वह तुरंत पेड पर चढा और सारे फल नीचे गिरा दिए। हिरण ने अपनी तेज दौड से सबके लिए पानी खोज निकाला। फिर बकरी और भेड ने मिलकर सबके लिए घास का इंतजाम किया। सबने मिलकर खाना खाया और पानी पिया। इस तरह एक-दूसरे की मदद करके उन्होंने अपनी जान बचाई।

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खाने की तलाश

कान्हा माहेश्वरी, उम्र: 7 वर्ष
एक बार दोपहर के समय चार दोस्तों हिरण, गाय, बंदर और भेड को बहुत तेज भूख लगी। तभी बंदर की नजर नदी के पार एक आम के पेड पर पडी, जिस पर मोटे-मोटे आम लटक रहे थे। बंदर ने कहा, "मैं पेड पर चढकर आम तोडता हूं।" हिरण और गाय ने नीचे खडे होकर आम पकडने शुरू किए। भेड ने उन आमों को इकट्ठा करके एक जगह रख दिया। चारों दोस्तों ने आम खाकर अपनी भूख मिटाई और फिर मजे से खेलने लगे।
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बंदर का मजेदार विचार

हिरल भराडिया, उम्र: 8 वर्ष
बंदर, हिरण, भेड और बकरी एक गुफा के अंदर खेल रहे थे। तभी बंदर के दिमाग में एक शरारती विचार आया। उसने तुरंत अपने दोस्तों से कहा, "मेरे दिमाग में एक बहुत अच्छी बात आई है!" भेड ने पूछा, "बंदर भाई, क्या विचार आया?" बंदर बोला, "चलो, हम सब नदी किनारे चलते हैं।" यह सुनकर सभी खुशी से उछल पडे। हिरण ने कहा, "जल्दी चलते हैं!" सब गुफा से बाहर निकले और नदी की ओर चल पडे। वहां पहुंचते ही उन्हें ठंडी हवा महसूस हुई। बकरी बोली, "वाह! क्या खूब हवा चल रही है। बंदर भाई, अब बताओ तुम्हारे दिमाग में क्या विचार आया था?" बंदर ने कहा, "चलो, हम सब इस नदी में नहाते हैं और मस्ती करते हैं।" सभी ने बंदर की बात मानी और पानी में खूब नहाए और मौज-मस्ती की।
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मदद का फल मीठा होता है

जैशनवी अग्रवाल, उम्र: 7 वर्ष
जंगल में चार अच्छे दोस्त रहते थे हिरण, बंदर, मेमना और बछडा। चारों रोज स्कूल जाते, साथ में खेलते और हमेशा एक-दूसरे की मदद करते थे। एक दिन स्कूल की छुट्टी के बाद चारों दोस्त हंसते-गाते घर लौट रहे थे। रास्ते में वे पेडों, फूलों और चिडियों को देखकर बहुत खुश हो रहे थे। तभी उन्हें किसी के रोने की आवाज सुनाई दी। उन्होंने देखा कि एक छोटा खरगोश रास्ता भूल गया था और बहुत डरा हुआ था। उसकी आंखों में आंसू थे। हिरण ने प्यार से पूछा, "तुम क्यों रो रहे हो?" खरगोश बोला, "मैं अपने घर का रास्ता भूल गया हूं।" चारों दोस्तों ने उसे ढांढस बंधाया। बंदर पेड पर चढकर दूर-दूर तक देखने लगा। हिरण आगे-आगे रास्ता खोजने लगा, जबकि मेमना और बछडा खरगोश के साथ चलते रहे ताकि उसे डर न लगे। थोडी देर बाद उन्हें खरगोश का घर दिखाई दे गया। खरगोश की मां अपने बच्चे को ढूंढ रही थी। उसे सुरक्षित देखकर वह बहुत खुश हुई। उसने चारों दोस्तों का धन्यवाद किया और उन्हें स्वादिष्ट फल खिलाए। खरगोश ने मुस्कुराकर कहा, "आप सब मेरे सच्चे दोस्त हैं।" चारों दोस्त खुशी-खुशी अपने घर लौट गए। किसी की मदद करके उन्हें बहुत अच्छा लगा और उन्होंने हमेशा जरूरतमंदों की मदद करने का वादा किया।
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प्रकृति ही जीवन है

नित्या तिवारी, उम्र: 11 वर्ष
समुद्र के किनारे एक खुशहाल जंगल था, जहां चारों तरफ हरियाली थी। उस जंगल में शेर, चीता, हाथी, बंदर और रंग-बिरंगे मोर रहते थे। सब अपने परिवार के साथ हंसते-खेलते बहुत खुश थे। पर एक दिन उस जंगल पर संकट आ गया। कुछ लोग विकास के नाम पर जंगल काटकर इमारतें बनाना चाहते थे। चालाकी से उन्होंने जानवरों जैसे मास्क और कपडे पहन लिए ताकि जानवर उन्हें पहचान न पाएं। जंगल में घूमते हुए अचानक उनकी नजर एक मां चिडिया पर पडी जो अपने नन्हे बच्चों को प्यार से दाना खिला रही थी। आगे उन्होंने देखा कि शेर और शेरनी अपने बच्चों को सहला रहे थे। हर तरफ परिवार और खुशियां थीं। यह सब देखकर इंसानों को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्हें लगा जैसे भगवान खुद संकेत दे रहे हों। उन्होंने सोचा, "पेड काटकर विकास करने का क्या फायदा? ये बेजुबान जानवर कहां जाएंगे? यह जंगल ही तो इनका घर है। ये बोल नहीं सकते, अपनी परेशानी नहीं बता सकते।" सबको अपनी गलती समझ आ गई। उन्होंने जंगल काटने के बजाय नए पेड लगाए और एक सीख ली "अगर प्रकृति नहीं, पेड नहीं, तो जीवन नहीं। और जीवन नहीं, तो विकास का क्या मतलब?" प्रकृति हमें फल, सब्जी, अनाज और ठंडा पानी देती है। जब वह हमें इतना कुछ देती है, तो हमें भी उसकी रक्षा करनी चाहिए और जानवरों की सहायता करनी चाहिए। उस दिन के बाद से वे लोग कभी-कभी जंगल घूमने जाते हैं और बिना नुकसान पहुंचाए खुशी-खुशी लौट आते हैं।
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दोस्तों की एकता

शिवांश शारदा, उम्र: 9 वर्ष
चंपक वन के किनारे एक नदी थी। नदी से पहले एक बडी सी चट्टान थी, जहां चार दोस्त—पिंकी जिराफ, राजेश बंदर, रमेश हिरण और रोहित भेड रहते थे। वे रोज आधे घंटे के लिए चट्टान के पास मिलते और साथ खेलते थे। उसी चट्टान के पास एक भेडिया रहता था, जो रोज सबको खाने की कोशिश करता था। परंतु उनकी एकता उसे कामयाब नहीं होने देती थी। इसी कारण वह भूखा रहता और धीरे-धीरे कमजोर होने लगा। कुछ दिन बाद, किसी बात को लेकर दोस्तों के बीच झगडा हो गया और वे मुंह फुलाकर अलग-अलग दिशाओं में चले गए। भेडिए ने यह सब देखा और मन ही मन योजना बनाई। उसने इस मौके का फायदा उठाते हुए तय किया कि वह सबको खा जाएगा। सबसे पहले उसने पिंकी जिराफ को अकेला पाकर उसे दबोचने के लिए छलांग लगाई। पिंकी समझ गई कि उसकी जान खतरे में है। वह पूरी ताकत से तेज भागने लगी और चिल्लाकर अपने दोस्तों को भी सुरक्षित रहने को कहा। पिंकी का चिल्लाना सुनकर रमेश हिरण, राजेश बंदर और रोहित भेड अपना गुस्सा भूलकर उसकी मदद के लिए दौडे। कुछ ही पल में तीनों दोस्त नदी के पास पहुंच गए। वहां उन्हें रामू हाथी दादा मिले। दोस्तों ने उन्हें पूरी बात बताई। हाथी दादा ने सबको एक तरफ होने का इशारा किया और भेडिए को डराकर भगा दिया। इसके बाद सभी दोस्त फिर से हंसी-खुशी रहने लगे और एकता की ताकत को अच्छी तरह समझ गए।
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