21 जुलाई 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

epaper_icon

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

Kadhi Recipe: राजस्थान की सवामणी और हिमाचल की धाम कढ़ी बनाने से पहले जान लें, शेफ से जरूरी टिप्स

Kadhi Recipe and Tips: राजस्थान की फेमस सवामणी कढ़ी और हिमाचल की मशहूर धाम कढ़ी बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? आइए, शेफ रणवीर बरार और शेफ भूपी से जानते हैं।
2 min read
Google source verification
Chef Ranveer Brar Kadhi Tips, Chef Bhupi Kadhi Recipe

Kadhi Recipe/ image credit youtube/ /@RanveerBrar/@chefbhupikitchen and chatgpt

Himachali And Rajasthani Kadhi Recipe: अगर आप पंजाबी कढ़ी खाकर बोर हो गए हैं या कुछ अलग ट्राई करना चाहते हैं, तो हिमाचल की धाम स्टाइल कढ़ी या राजस्थान में मिलने वाली भंडारे या सवामणी की कढ़ी घर पर बना सकते हैं। इन दोनों कढ़ियों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें प्याज और लहसुन का इस्तेमाल नहीं किया जाता। आइए शेफ रणवीर बरार और शेफ भूपी से जानते हैं कि इन अलग तरह की कढ़ियों को बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

हिमाचली कढ़ी बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान

हिमाचली कढ़ी बनाने के लिए शेफ रणवीर बरार के अनुसार इसमें प्याज और लहसुन का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसके साथ ही इसे सरसों के तेल में बनाया जाता है, हालांकि आप चाहें तो घी या दूसरे तेल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। तड़के में जीरा, मेथी, दरदरा कुटा धनिया और सूखी लाल मिर्च डाली जाती है। इसके साथ ही कढ़ी में बेसन ज्यादा नहीं डालना चाहिए। सबसे जरूरी बात यह है कि कढ़ी को धीमी आंच पर अच्छी तरह पकाया जाए, तभी इसका स्वाद निखरकर आता है। हिमाचली कढ़ी हमेशा थोड़ी पतली रखी जाती है, क्योंकि इसे चावल के साथ खाया जाता है और बाद में डाले गए पकोड़े भी इसका काफी हिस्सा सोख लेते हैं।

अगर पालक के पकोड़े बना रहे हैं, तो उनके घोल में अजवाइन और हींग मिलाएं। इससे स्वाद भी बढ़ता है और बेसन आसानी से पचता है। वहीं पकोड़ों को आखिर में सिर्फ डालकर सर्व करने की बजाय कुछ देर कढ़ी में पकाना चाहिए, ताकि उनका स्वाद कढ़ी में अच्छी तरह घुल जाए।

सवामणी स्टाइल कढ़ी बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप सवामणी कढ़ी को घर पर बनाना चाहते हैं, तो शेफ भूपी की बताई गई जरूरी टिप्स को फॉलो करके इसे आसानी से बना सकते हैं। शेफ भूपी के अनुसार इस कढ़ी में बेसन कम रखा जाता है, ताकि कढ़ी हल्की और स्मूद बने। इसके अलावा दही की जगह छाछ का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन अगर छाछ न हो तो दही में पानी मिलाकर उसे पतला किया जा सकता है। साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि छाछ या दही बहुत ज्यादा खट्टा न हो, क्योंकि इससे कढ़ी का स्वाद खट्टा हो सकता है।

कढ़ी बनाने से पहले बेसन और छाछ को अच्छी तरह मिला लें, ताकि उसमें गुठलियां न रहें। इसके बाद लगातार चलाते हुए कढ़ी में पहला उबाल आने दें, क्योंकि बीच में छोड़ने से छाछ फट सकती है। उबाल आने के बाद इसे 15 से 20 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं। इससे कढ़ी का स्वाद और टेक्सचर दोनों बेहतर हो जाते हैं। कढ़ी में तड़का देसी घी गर्म करने के बाद इसमें सूखी लाल मिर्च, मेथी दाना, राई, तेजपत्ता, हरी मिर्च, अदरक, कढ़ी पत्ता, हींग, लाल मिर्च पाउडर और कसूरी मेथी का इस्तेमाल किया जाता है। तड़का तैयार होते ही इसे गर्म कढ़ी में डालकर तुरंत ढक देना चाहिए, ताकि उसकी खुशबू कढ़ी में अच्छी तरह समा जाए। आखिर में ऊपर से हरा धनिया डालकर सर्व करें।