
Christmas 2025: क्रिसमस आते ही चारों ओर एक खास तरह की रौनक छा जाती है। केक हो, क्रिसमस ट्री, सजावट या फिर कपड़े, हर जगह लाल, हरा और सफेद रंग ही सबसे ज्यादा नजर आते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इन्हीं तीन रंगों को क्रिसमस से क्यों जोड़ा जाता है? इसके पीछे सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपराएं और गहरी मान्यताएं छिपी हुई हैं।
कड़ाके की ठंड में 'उम्मीद' की निशानी सर्दियों में जब पतझड़ के कारण ज्यादातर पेड़ सूख जाते हैं और हरियाली गायब हो जाती है, तब भी कुछ पेड़ ऐसे होते हैं जो हरे-भरे रहते हैं। इन्हें हम 'सदाबहार' या एवरग्रीन (Evergreen) पेड़ कहते हैं।पुराने समय में, खासकर रोमन दौर में, लोग एक-दूसरे को ये हरे पौधे गिफ्ट किया करते थे। उनके लिए यह एक संकेत था कि सर्दी हमेशा नहीं रहेगी, बहार फिर आएगी। यह रंग 'जीवन' और 'सौभाग्य' का प्रतीक बन गया। ईसाई मान्यताओं में भी हरा रंग यही सिखाता है कि ईश्वर की कृपा अनंत है और जीवन कभी खत्म नहीं होता। क्रिसमस ट्री का हरा रंग हमें मुश्किल वक्त में भी उम्मीद न छोड़ने का संदेश देता है।
सेब से शुरू हुई थी कहानी लाल रंग के बिना क्रिसमस की कल्पना भी नहीं की जा सकती। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सजावट में लाल रंग कैसे आया? इसकी कहानी बड़ी दिलचस्प है।Medieval times में, जब लोगों को पढ़ना-लिखना नहीं आता था, तो उन्हें बाइबिल की कहानियां नाटकों के जरिए समझाई जाती थीं। क्रिसमस से पहले ऐसे ही नाटकों में 'स्वर्ग का वृक्ष' (Tree of Paradise) दिखाया जाता था। उस जमाने में सजावट की फैंसी चीजें तो थी नहीं, तो लोग पेड़ पर लाल रंग के सेब लटका दिया करते थे।धीर-धीरे यह परंपरा बन गई। लाल सेब की जगह लाल बॉल्स और रिबन ने ले ली। धार्मिक दृष्टि से देखें तो लाल रंग ईसा मसीह के बलिदान और उनके प्रेम को दर्शाता है। आज यह रंग उत्सव, खुशी और जोश का सबसे बड़ा चेहरा बन चुका है।क्र
सिर्फ बर्फ नहीं, शांति का पैगाम क्रिसमस सर्दियों का त्योहार है। पश्चिमी देशों में इस वक्त तक धरती बर्फ की सफेद चादर ओढ़ लेती है। लेकिन सफेद रंग का महत्व सिर्फ मौसम से नहीं जुड़ा है।इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि 18वीं सदी में लोग क्रिसमस ट्री को सजाने के लिए सफेद रंग के 'वेफर्स' (Wafers) का इस्तेमाल करते थे। ईसाई धर्म की कैथोलिक परंपराओं में इन सफेद वेफर्स को ईसा मसीह के शरीर का प्रतीक माना गया। इसके अलावा, सफेद रंग पवित्रता और शांति का भी सूचक है। यही वजह है कि आज भी चर्च और घरों में सफेद सजावट करके प्रभु यीशु के जन्म का स्वागत किया जाता है, जो दुनिया में शांति का संदेश लेकर आए थे।
क्रिसमस के अवसर पर चर्च से लेकर घरों, दुकानों और मॉल तक हर जगह क्रिसमस ट्री सजाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, ईसा मसीह के जन्म के समय एक सदाबहार पेड़ को सजाने की परंपरा शुरू हुई, जिसे आगे चलकर क्रिसमस ट्री कहा जाने लगा। वहीं, इतिहास की एक दूसरी कथा बताती है कि क्रिसमस ट्री की शुरुआत उत्तरी यूरोप में हजारों साल पहले हुई थी, जहां सर्दियों के त्योहार के दौरान ‘फर’ के पेड़ को सजाकर उत्सव मनाया जाता था। समय के साथ यह परंपरा क्रिसमस से जुड़ गई और आज हर घर में क्रिसमस ट्री लगाना आम रिवाज बन चुका है।