Curd Rice Benefits For Babies: बच्चों के लिए सही समय पर सही आहार बहुत जरूरी होता है। जब शिशु ठोस आहार की ओर बढ़ता है, तब दही-चावल एक ऐसा पारंपरिक और पौष्टिक विकल्प है जिसे भारतीय घरों में सालों से भरोसे के साथ खिलाया जाता रहा है। यह न सिर्फ पचने में आसान है, बल्कि बच्चे के संपूर्ण विकास में भी अहम भूमिका निभाता है।
Curd Rice Benefits For Babies: जब बच्चे को सॉलिड फूड की आदत डलनी शुरू होती है, तब ऐसा आहार चुनना जरूरी होता है जो हल्का, पौष्टिक और पचाने में आसान हो। दही-चावल इसी वजह से बच्चों के लिए एक परफेक्ट मील माना जाता है। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स पाचन को मजबूत करते हैं, जबकि चावल से एनर्जी मिलती है। यही कारण है कि हर मां को दही-चावल को बच्चों की डाइट में सही उम्र और तरीके से शामिल करने की जानकारी जरूर होनी चाहिए।
दही में मौजूद प्रोबायोटिक गुण बच्चे की आंतों के लिए बेहद लाभकारी होते हैं। यह पाचन को बेहतर बनाता है और कब्ज या दस्त जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है। चावल हल्का और सुपाच्य होता है, जिससे शिशु का पेट आसानी से इसे स्वीकार कर लेता है।
दही में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। इससे बच्चों को बार-बार सर्दी, खांसी, बुखार और वायरल संक्रमण होने का खतरा कम हो सकता है।
दही कैल्शियम और फॉस्फोरस का अच्छा स्रोत है, जो बच्चों की हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने में मदद करता है। बढ़ते बच्चों के लिए ये पोषक तत्व बेहद जरूरी होते हैं।
दही और चावल दोनों में प्रोटीन की अच्छी मात्रा होती है, जो शिशु की मांसपेशियों के विकास और शारीरिक वृद्धि के लिए आवश्यक है।
चावल कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है, जो बच्चे को दिनभर सक्रिय रखने के लिए जरूरी ऊर्जा प्रदान करता है। इसके अलावा इसमें थायमिन, राइबोफ्लेविन, नियासिन जैसे कई जरूरी विटामिन और मिनरल्स भी होते हैं।
दही-चावल में मौजूद फाइबर, अच्छे फैट और प्रोबायोटिक तत्व बच्चे के मूड को संतुलित रखने में मदद करते हैं, जिससे बच्चा शांत और खुश रहता है।
इस भोजन में मौजूद माइक्रोन्यूट्रिएंट्स शिशु की त्वचा को स्वस्थ रखने और बालों की अच्छी ग्रोथ में सहायक होते हैं।
अगर बच्चे की उम्र के अनुसार राई और करी पत्ते का हल्का तड़का लगाया जाए, तो इससे न सिर्फ स्वाद बढ़ता है बल्कि एंटीऑक्सीडेंट गुण भी मिलते हैं, जो कई बीमारियों से बचाव में मदद कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, दही-चावल को 6 महीने के बाद शिशु के आहार में शामिल किया जा सकता है। यह ठोस आहार की शुरुआत में एक सप्लीमेंट के रूप में दिया जा सकता है। हालांकि, 6 महीने से कम उम्र के बच्चों को यह नहीं देना चाहिए।
यह एक आम भ्रम है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ बच्चे को दही-चावल खिलाने से सर्दी या जुकाम नहीं होता। लेकिन अगर बच्चा पहले से बीमार है या उसे सर्दी-जुकाम है, तो उस समय दही-चावल देने से बचना बेहतर होता है।