Dog Tick Fever Causes, Symptoms, Prevention and Treatment: गर्मियों के आते ही कई बार डॉग की भूख कम हो जाती है। इसे देखकर अक्सर पेरेंट्स सोचते हैं कि यह सिर्फ मौसम बदलने की वजह से हो रहा है। लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता। कभी-कभी यही छोटी-सी लापरवाही आपके फर बेबी के लिए बड़ी बीमारी का कारण बन सकती है।
Dog Tick Fever Causes, Symptoms, Prevention and Treatment: अभी फरवरी का महीना चल रहा है, लेकिन गर्मी अभी से महसूस होने लगी है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, उसका असर सिर्फ हम पर ही नहीं बल्कि हमारे पालतू डॉग पर भी पड़ता है। जिससे इन दिनों डॉग की भूख कम हो जाती है। जिसे देख के अक्सर पेट पैरेंट्स सोचते हैं कि यह मौसम की वजह से हो रहा है, लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता। कभी-कभी यही छोटी-सी लापरवाही बड़ी बीमारी का कारण बन सकती है। अगर आपका डॉग खाना नहीं खा रहा, सुस्त हो गया है और पहले की तरह खेल नहीं रहा, तो इसे नजरअंदाज न करें। सुबह-शाम घुमाने ले जाते समय वह जल्दी थक जाता है या खेलने में मन नहीं लगाता, तो यह किसी समस्या का संकेत हो सकता है। ये लक्षण टिक फीवर के भी हो सकते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram पर mrcanin01 नाम के अकाउंट द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो में टिक फीवर के बारे में जानकारी दी गई है। आइए जानते हैं टिक फीवर के बारे में विस्तार से।
टिक यानी किलनी जब डॉग को काटती है, तो वह सिर्फ खून ही नहीं चूसती बल्कि अपनी लार के जरिए शरीर में इंफेक्शन भी छोड़ देती है। यह इंफेक्शन डॉग के रेड ब्लड सेल्स पर असर करता है और धीरे-धीरे खून की मात्रा कम होने लगती है। जब ब्लड टेस्ट कराया जाता है, तो पता चलता है कि जिसका हीमोग्लोबिन 12 से 14 ग्राम होना चाहिए, वह घटकर 6 या 7 ग्राम रह गया है। तब समझ आता है कि अंदर ही अंदर टिक फीवर ने असर करना शुरू कर दिया था।
अगर आपका डॉग अचानक खाना कम कर दे, सुस्त हो जाए और पहले जैसा एक्टिव न रहे, तो सतर्क हो जाइए। इसे सिर्फ मौसम का असर न समझें, यह टिक फीवर का संकेत भी हो सकता है। टिक फीवर में डॉग को बुखार आ सकता है, मसूड़े फीके पड़ सकते हैं, कमजोरी दिख सकती है और वह ज्यादा सोने लगता है। ऐसे लक्षण नजर आते ही तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें। समय पर पहचान और इलाज से गंभीर समस्या से बचा जा सकता है।
डॉग को टिक फीवर से बचाव करना मुश्किल नहीं है, बस थोड़ी सी रेगुलर केयर जरूरी है। इसके लिए आप डॉग को नहलाने के करीब 48 घंटे बाद उसके वजन के हिसाब से स्पॉट-ऑन दवाई लगानी चाहिए। ये दवाइयां अलग-अलग वेट कैटेगरी में मिलती हैं, जैसे 0–10 किलो, 10–20 किलो, 20–40 किलो और 40–60 किलो। दवाई लगाते समय डॉग के बालों को थोड़ा सा हटाकर रीढ़ की हड्डी पर, सीधे स्किन की जड़ों में लगाएं। आमतौर पर एक जगह लगाना ही काफी होता है, लेकिन जरूरत पड़े तो दो या ज्यादा से ज्यादा तीन जगह भी लगा सकते हैं। सही तरीके से लगाने पर आपका डॉग लगभग तीन महीने तक टिक से सुरक्षित रह सकता है।
टिक फीवर एक गंभीर बीमारी है, जो धीरे-धीरे शरीर को कमजोर करती है। कई मामलों में डॉग को ड्रिप लगानी पड़ती है, इलाज लंबा चलता है और खर्च भी बढ़ जाता है। इसलिए समय पर पहचान और बचाव सबसे जरूरी है। आपकी थोड़ी सी सावधानी आपके प्यारे डॉग को होने वाली किसी बड़ी परेशानी से बचा सकती है।