
Electroformed Gold: मार्केट में आज के समय में ज्वेलरी के एक से बढ़कर एक डिजाइन देखने को मिलते हैं। साथ ही, ज्वेलरी बनाने के नए नए तरीके भी सामने आ रहे हैं। इन्हीं में से एक इलेक्ट्रोफॉर्म्ड गोल्ड भी है। यह सोने की कोई अलग किस्म नहीं है, बल्कि ज्वेलरी बनाने का एक तरीका है, जिससे बड़े और हैवी दिखने वाले डिजाइन कम वजन में बनाए जा सकते हैं।आइए जानते हैं यह क्या है और इसमें कैसे ज्वेलरी बनाई जाती है।
Electroformed Gold में ज्वेलरी के डिजाइन के हिसाब से एक बेस तैयार किया जाता है और उसके ऊपर इलेक्ट्रिक प्रक्रिया की मदद से सोने की परत चढ़ाई जाती है। जब सोने की परत डिजाइन के हिसाब से तैयार हो जाती है, तो अंदर के बेस को निकाल दिया जाता है। इसके बाद सिर्फ सोने की बनी बाहरी परत बचती है। इससे ऐसी ज्वेलरी तैयार होती है, जो बाहर से गोल्ड की बनी हुई दिखाई देती है, लेकिन अंदर से खोखली हो सकती है। यही वजह है कि इलेक्ट्रोफॉर्मिंग के जरिए बड़े और भारी दिखने वाले डिजाइन भी कम वजन में बनाए जा सकते हैं।
इलेक्ट्रोफॉर्म्ड ज्वेलरी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पूरा डिजाइन ठोस सोने से बनाने की जरूरत नहीं पड़ती। अंदर का हिस्सा खाली होने की वजह से उसी आकार की ठोस गोल्ड ज्वेलरी के मुकाबले इसमें कम सोना इस्तेमाल हो सकता है। जब ज्वेलरी में सोने की मात्रा कम होती है, तो उसकी कीमत भी कम हो सकती है। इसी वजह से इलेक्ट्रोफॉर्मिंग के जरिए तैयार किए गए कुछ बड़े डिजाइन ठोस सोने से बने उसी तरह के डिजाइन के मुकाबले कम कीमत में मिल सकते हैं।
इलेक्ट्रोफॉर्म्ड होने का मतलब यह नहीं है कि ज्वेलरी की कीमत हमेशा कम ही होगी। इसकी कीमत सोने की शुद्धता, इस्तेमाल हुए सोने की मात्रा, डिजाइन और ज्वेलरी बनाने की लागत पर निर्भर करती है।
सॉलिड गोल्ड ज्वेलरी पूरी तरह ठोस सोने से बनी होती है। वहीं इलेक्ट्रोफॉर्म्ड ज्वेलरी में बाहर सोने की परत होती है और अंदर का हिस्सा खोखल या किसी दूसरे मटेरियल का हो सकता है। यही वजह है कि एक जैसी दिखने वाली सॉलिड गोल्ड और इलेक्ट्रोफॉर्म्ड ज्वेलरी के वजन में काफी अंतर हो सकता है। इलेक्ट्रोफॉर्म्ड ज्वेलरी हल्की होने के साथ बड़े और अलग डिजाइन में भी बनाई जा सकती है।