मंगलसूत्र: आज के समय में कई महिलाएं गले के बजाय हाथों में मंगलसूत्र पहनना पसंद करती हैं। ऐसे में मन में यह सवाल आता है कि क्या ज्योतिष के नजरिए से हाथ में मंगलसूत्र पहनना सही है या नहीं। आइए, आज के इस लेख में विस्तार से जानते हैं।
Mangalsutra: किसी भी विवाहित स्त्री के जीवन में मंगलसूत्र का बड़ा महत्व होता है। इसलिए, चाहे समय कोई भी हो, शादी के बाद ज्यादातर महिलाएं इसे रोजाना पहनती हैं। पिछले कुछ सालों में मंगलसूत्र के डिजाइन में काफी बदलाव आया है। पहले जहां लोग काले मोतियों के साथ सोने का पेंडेंट पहनना पसंद करती थीं, वहीं बदलते समय के साथ महिलाओं ने इसे हाथ में पहनना शुरू कर दिया है और अब जेन-जी स्टाइल में भी महिलाएं मंगलसूत्र पहन रही हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि क्या हाथ में मंगलसूत्र पहनना सही है और इसका क्या मतलब है।
एस्ट्रोलॉजर निकेत श्रीवास्तव के अनुसार, मंगलसूत्र सिर्फ एक आभूषण नहीं, बल्कि सुहागन के सोलह श्रृंगार का सबसे अहम हिस्सा है। भारतीय संस्कृति में इसे पति के लिए लंबी उम्र, सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। पहले इसे सिर्फ गले में पहना जाता था, लेकिन आज फैशन के साथ तालमेल बिठाते हुए महिलाएं इसे हाथों में भी पहन रही हैं। इसे हाथ में देखने के बाद अक्सर कुछ लोगों के दिमाग में यह सवाल आता है कि क्या यह सही है। इसका जवाब है हां।
हालांकि, हिंदू धर्म और परंपराओं में मंगलसूत्र को गले में पहनना ही सबसे पवित्र और पारंपरिक तरीका माना गया है, क्योंकि यह शादी की पवित्रता का प्रमाण है। लेकिन ज्योतिष के नजरिए से हाथ में इसे पहनना कोई अपशगुन नहीं है। यदि आपकी श्रद्धा है, तो आप इसे अपनी पसंद के अनुसार पहन सकती हैं।
मंगलसूत्र पहनने के पीछे इसमें मौजूद मोतियों का विशेष महत्व होता है। यदि आप काले मोतियों से बना मंगलसूत्र हाथ में पहन रही हैं, तो ज्योतिष के अनुसार इसे हमेशा अपने दाहिने हाथ में पहनना चाहिए। किसी भी शुभ काम या धार्मिक परंपराओं में बाएं हाथ का इस्तेमाल करने से परहेज किया जाता है, इसलिए शादी से जुड़ी कोई भी वस्तु दाहिने हाथ में पहनना ज्यादा बेहतर और शुभ माना जाता है।
मंगलसूत्र में काले मोतियों का होना अनिवार्य माना जाता है। इसके पीछे मुख्य मान्यता यह है कि काला रंग बुरी नजर और नकारात्मक शक्तियों से हमारी रक्षा करता है। ये मोती वैवाहिक जीवन में खुशहाली लाते हैं और पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूती प्रदान करते हैं।
मंगलसूत्र दो शब्दों से मिलकर बना है मंगल यानी पवित्र और सूत्र यानी धागा। हिंदू शादियों में दूल्हे द्वारा इसे पहनाया जाना इस बात का संकेत है कि अब दोनों आत्माएं एक अटूट बंधन में बंध गई हैं। इसे पहनने से पति और पत्नी के बीच सामंजस्य बना रहता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंगलसूत्र हमेशा विवाह के बाद ही धारण करना चाहिए, ताकि यह एक स्त्री की विवाहित स्थिति को सार्थक बनाए रखे। यह केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि वैवाहिक जीवन का अटूट प्रतीक है।