Harish Rana Brother Struggle Story | 13 साल से कोमा में रहे और इच्छामृत्यु केस को लेकर चर्चा में आए हरीश राणा का आज अंतिम संस्कार किया गया। हरीश राणा को बचाने के लिए उनके भाई आशीष राणा ने भी सबकुछ त्याग दिया। आइए, आशीष राणा के संघर्ष की कहानी पढ़ते हैं।
Harish Rana Family :"हरीश राणा इच्छामृत्यु केस" के बारे में शायद ही कोई ना जानता हो। जिसके बचने की दुआ हर कोई करता रहा लेकिन, दवा और दुआ कुछ काम ना आए। पिता ने अपना जीवन, घर, कमाई सबकुछ झोंक दिया और छोटा भाई भी अपने कंधों पर जिम्मेदारी का बोझ उठा लिया ताकि बड़ा भाई फिर से लौट आए। पर, होनी को जो मंजूर था वही हुआ। आज हरीश राणा का अंतिम संस्कार किया गया।
13 साल से कोमा में रहने के बाद हरीश ने दुनिया को अलविदा कहा।
13 साल तक अपने जवान बेटे को कोमा में देखना हर दिन मौत की तरह लगती होगी! पर, एक उम्मीद भी जगती होगी कि अगली सुबह बेटा जाग जाएगा। इसी आश में तो छोटा भाई आशीष राणा भी अपने सपनों को ताक पर रखकर कमाने की सोचने लगा ताकि पिता को सहारा दे पाए।
हरीश चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग के छात्र थे। 20 अगस्त 2013 को हॉस्टल में एक भयावह हादसा हुआ और फिर उसके बाद उनकी जिंदगी जिंद लाश की तरह कटने लगी। उस वक्त आशीष 12वीं क्लास में पढ़ रहे थे। आशीष ने हालात देखकर कुछ सपनों को मार दिया और पढ़ाई जारी रखी ताकि आगे चलकर परिवार का सहारा बन सकें।
आशीष हर दिन भाई के डायपर बदलने से लेकर तमाम काम करता और अपनी पढ़ाई भी जारी रखता। इस तरह से वो ग्रेजुएशन किया और फिर भाई के मेडिकल खर्च के लिए वो गुरुग्राम में नौकरी करने लगा। इस तरह से छोटा भाई पढ़ाई, नौकरी के साथ-साथ भाई का ख्याल रखने लगा।
आज वो आशीष अपने राम जैसे भाई के लिए टूट चुका है।
हरीश के पिता ने बेटे को बचाने के लिए दिल्ली का घर तक बेच दिया। बताया जाता है कि अब तक 50 लाख से अधिक खर्च हो चुका है। परिवार ने बेटे को बचाने के लिए हर कोशिश कर डाली। पर अंत में ना बेटा बचा और ना ही कुछ और…।
बता दें, हरीश के परिवार में माता-पिता के अलावा एक छोटी बहन और छोटा भाई है। छोटी बहन की शादी हो चुकी है।