
Skin Care Tips: हेल्दी और ग्लोइंग त्वचा के लिए फेसवॉश करने के साथ ही कुछ लोग स्किन एक्सफोलिएशन करना भी पसंद करते हैं। इससे त्वचा को कई फायदे मिल सकते हैं, लेकिन गलत तरीके से एक्सफोलिएशन करने से त्वचा में लालिमा, जलन और रूखापन भी हो सकता है। आइए जानते हैं कि स्किन एक्सफोलिएशन क्या है, इसे कैसे करना चाहिए और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार,एक्सफोलिएशन त्वचा की सतह पर जमा डेड स्किन सेल्स यानी मृत कोशिकाओं को हटाने का एक तरीका है। इसके लिए कुछ खास स्किन केयर प्रोडक्ट्स या टूल्स का इस्तेमाल किया जाता है। इससे त्वचा साफ और मुलायम दिख सकती है। इसके अलावा, एक्सफोलिएशन से त्वचा की ऊपरी सतह पर जमा मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद मिलती है, जिससे त्वचा अधिक साफ दिख सकती है।
त्वचा को एक्सफोलिएट करने के दो मुख्य तरीके होते हैं। पहला फिजिकल एक्सफोलिएशन और दूसरा केमिकल एक्सफोलिएशन। दोनों का काम त्वचा की सतह से डेड स्किन सेल्स हटाने में मदद करना है, लेकिन इनका इस्तेमाल करने का तरीका अलग होता है। फिजिकल एक्सफोलिएशन (Physical Exfoliation) में स्क्रब, मुलायम कपड़े या त्वचा को साफ करने वाले कुछ खास टूल्स की मदद से डेड स्किन सेल्स हटाई जाती हैं। वहीं, केमिकल एक्सफोलिएशन (Chemical Exfoliation) में लैक्टिक एसिड और सैलिसिलिक एसिड जैसे तत्वों (इंग्रेडिएंट्स) वाले स्किन केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल किया जाता है।
चेहरे पर एक्सफोलिएशन करते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए, ताकि त्वचा को नुकसान न पहुंचे।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, चेहरे पर हफ्ते में एक या दो बार एक्सफोलिएशन किया जा सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति की त्वचा एक जैसी नहीं होती। तैलीय त्वचा और रूखी या संवेदनशील त्वचा वाले लोगों की जरूरत अलग-अलग हो सकती है। इसलिए अपनी त्वचा के अनुसार ही एक्सफोलिएशन करें।
ध्यान दें, अगर एक्सफोलिएशन के बाद त्वचा में लगातार जलन, लालिमा या रूखापन बना रहता है, तो इसका इस्तेमाल रोक दें और त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लें।
डिस्क्लेमर: यह लेख इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। यह किसी भी मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं है। त्वचा से जुड़ी परेशानी होने पर त्वचा विशेषज्ञ (डर्मेटोलॉजिस्ट) से सलाह लें।