
Indian Winter Foods: सर्दियों में शरीर को अंदर से गर्म और फिट रखना जितना जरूरी है, उतना ही मजेदार भी हो सकता है अगर सही फूड का चुनाव किया जाए। करीना कपूर की न्यूट्रिशनिस्ट रुजुता दिवेकर इंस्टाग्राम पोस्ट में बताया कि कैसे रोजमर्रा के भारतीय खाने स्वाभाविक रूप से गर्मी पैदा करते हैं, पाचन को पोषण देते हैं और ठंड के महीनों में मेटाबॉलिक हेल्थ को सपोर्ट करते हैं, वो भी बिना किसी आयातित सुपरफूड या आधुनिक ट्रेंड्स पर निर्भर हुए।
रुझुता दिवेकर अक्सर उन व्यंजनों की बात करती हैं जो पहाड़ी और ठंडे इलाकों में रोजमर्रा की थाली का हिस्सा हैं। उनके अनुसार, बाजरे की भाखरी के साथ लोनी यानी सफेद मक्खन, अलसी की चटनी, मंडुआ की रोटी, कुलथ का पराठा और गहत की दाल ये सभी शरीर की प्राकृतिक गर्मी को बनाए रखने में मदद करते हैं। येआहार पीढ़ियों से खाए जा रहे हैं क्योंकि ये ठंड में शरीर की जरूरतों के हिसाब से बिल्कुल फिट बैठते हैं।
बाजरा और मंडुआ जैसे मिलेट्स धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा मिलती है और ठंड जल्दी नहीं लगती। वहीं कुलथ और गहत जैसी दालें प्रोटीन से भरपूर होती हैं, जो मांसपेशियों को मज़बूती देती हैं और शरीर को अंदर से गर्म रखती हैं। ये दालें सर्दियों में होने वाली थकान और सुस्ती को भी कम करने में मदद करती हैं।
सर्दियों में जोड़ों में अकड़न और त्वचा का रूखापन आम समस्या होती है। रुझुता दिवेकर के अनुसार, लोनी यानी सफेद मक्खन जैसे प्राकृतिक फैट्स शरीर को जरूरी चिकनाई देते हैं। ये न सिर्फ जोड़ों की सेहत को सपोर्ट करते हैं, बल्कि ठंड के मौसम में स्किन को ड्राय होने से भी बचाते हैं।
रुझुता यह भी साफ करती हैं कि सर्दियों की डाइट सिर्फ भारी और गर्म तासीर वाले खाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इस मौसम में उगने वाली हरी सब्ज़ियां भी उतनी ही जरूरी हैं। उन्होंने चोलाई की सब्जी का उदाहरण दिया, जो ठंड के मौसम में खूब खाई जाती है और सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होती है।
चोलाई(cholai)आयरन, फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होती है। यह सर्दियों के भारी खाने को बैलेंस करती है और पाचन तंत्र को सपोर्ट करती है। साथ ही, यह ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाती है और इम्युनिटी को मजबूत करती है, जिससे शरीर ठंड के असर से बेहतर तरीके से लड़ पाता है।