
नित्या पाठक, 7 वर्ष
एक गांव में रिया नाम की एक प्यारी बच्ची रहती थी। उसके पास एक सुंदर और शांत घोड़ा था। रिया अपने घोड़े से बहुत प्यार करती थी। वह हर दिन उसे हरी घास खिलाती, साफ पानी पिलाती और उसके बालों में कंघी करती थी। एक दिन रिया अपने घोड़े को बगीचे में लेकर गई। वहां रंग-बिरंगे फूल खिले हुए थे और चारों ओर हरियाली थी। रिया ने बड़े प्यार से घोड़े के बाल संवारे। घोड़ा भी बहुत खुश हो गया और धीरे-धीरे हिनहिनाने लगा। ऐसा लगा जैसे वह रिया को धन्यवाद कह रहा हो।
रिया ने समझ लिया कि पशु भी प्यार और देखभाल चाहते हैं। यदि हम उनके साथ प्रेम से व्यवहार करें, तो वे भी हमारे सच्चे मित्र बन जाते हैं। उस दिन से रिया ने निश्चय किया कि वह हमेशा सभी पशुओं के साथ दया और प्रेम का व्यवहार करेगी।
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मोईन अली, 13 वर्ष
सुंदरवन गांव में मीनू नाम की एक छोटी लड़की रहती थी। उसे जानवरों से बहुत प्यार था। एक दिन मीनू को जंगल के पास एक छोटा, भूरे रंग का टट्टू मिला। वह बहुत कमजोर था और उसके बाल उलझे हुए थे। मीनू उसे अपने घर ले आई और उसका नाम 'बादल' रखा। मीनू हर दिन बादल की बहुत देखभाल करती थी। वह उसे हरी घास खिलाती और साफ पानी पिलाती थी। धीरे-धीरे बादल बहुत स्वस्थ और सुंदर हो गया। मीनू रोज सुबह उसे बगीचे में ले जाती और एक जादुई कंघी से उसके लंबे, घने और रेशमी बालों को संवारती थी। जब मीनू उसके बाल ब्रश करती, तो बादल खुशी से आंखें बंद कर लेता और पूंछ हिलाता था। उन दोनों के बीच एक गहरी दोस्ती हो गई थी। एक दिन गांव में तेज आंधी-तूफान आया, जिससे एक छोटे बच्चे की गाय नदी के पार फंस गई। मीनू तुरंत बादल की पीठ पर सवार हुई। बादल ने बिना डरे तेज बहाव के पास जाकर अपनी सूझबूझ से मदद की और गाय को सुरक्षित बचा लिया। पूरा गांव उनकी बहादुरी देखकर दंग रह गया। यह कहानी सिखाती है कि जब हम मूक पशुओं को प्यार और सम्मान देते हैं, तो वे हमारे सबसे वफादार दोस्त बन जाते हैं।
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सानवी गौसिंहा, 9 वर्ष
एक छोटे से गांव में एक प्यारी बच्ची रहती थी। उसे पशु-पक्षियों से बहुत लगाव था। उसके घर के पास एक सुंदर घोड़ा रहता था। बच्ची प्रतिदिन उसके लिए हरी घास और साफ पानी लेकर जाती थी। एक दिन उसने देखा कि घोड़े के लंबे बाल उलझ गए हैं। उसने धीरे-धीरे कंघी से उसके बाल संवारने शुरू किए। घोड़ा शांत खड़ा रहा, मानो अपने स्नेह का आभार व्यक्त कर रहा हो। कुछ देर बाद बच्ची ने घोड़े को सहलाया और उसके साथ बगीचे में घूमने लगी। यह देखकर आसपास के बच्चे भी वहां आ गए और पूछने लगे कि वह रोज इतनी मेहनत क्यों करती है। बच्ची ने मुस्कुराते हुए कहा कि पशु भी हमारी तरह जीवित प्राणी हैं। उन्हें भी प्यार, भोजन और देखभाल की आवश्यकता होती है। यदि हम उनके साथ अच्छा व्यवहार करेंगे, तो वे भी हमारे सच्चे साथी बनेंगे। अगले दिन से सभी बच्चे आसपास के पशुओं की देखभाल करने लगे। कोई पक्षियों के लिए दाना रखने लगा, तो कोई आवारा जानवरों के लिए पानी भरने लगा। धीरे-धीरे पूरे गांव में पशुओं के प्रति दया और प्रेम का वातावरण बन गया, और गांव पहले से अधिक सुंदर और खुशहाल दिखाई देने लगा।
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अयांश अंकित शर्मा, 8 वर्ष
एक छोटे से गांव में अनीता नाम की एक बच्ची रहती थी। अनीता को जानवरों से बहुत प्यार था। एक दिन उसके पापा उसके लिए एक छोटा-सा भूरा घोड़ा लेकर आए। घोड़े का नाम था "भूरा"। पहले-पहले भूरा बहुत शरारती था। वह इधर-उधर भागता था और किसी के पास नहीं आता था। पर अनीता ने हार नहीं मानी। हर रोज सुबह अनीता बगीचे में जाती, जहां हरे-भरे पेड़, रंग-बिरंगे फूल और ठंडी हवा होती थी। वह अपने हाथ में कंघी लेकर भूरा के पास बैठ जाती और धीरे-धीरे उसके लंबे-लंबे बालों में कंघी करती। वह उससे प्यार से बातें भी करती "भूरा, आज तुम अच्छे लग रहे हो। कल हम खेत में दौड़ लगाएंगे।" धीरे-धीरे भूरा को भी अनीता से प्यार हो गया। अब वह अनीता को देखते ही खुशी से हिनहिनाता और उसके पास आकर खड़ा हो जाता। गांव के लोग कहते "देखो, अनीता और भूरा की दोस्ती कितनी प्यारी है। प्यार से जानवर भी अपने हो जाते हैं।"
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लवित शर्मा, 7 वर्ष
एक सुंदर बगीचे में एक छोटी बच्ची अपने प्यारे घोड़े के साथ समय बिताया करती थी। वह रोज बड़े प्यार से उसके बाल संवारती, उसे सहलाती और उसकी देखभाल करती। घोड़ा भी अपनी बड़ी-बड़ी आंखों से उसे देखकर जैसे धन्यवाद कहता था। एक दिन तेज बारिश के कारण बगीचे में चारों ओर कीचड़ हो गया। कई लोग वहां आए, लेकिन किसी ने भी घोड़े की ओर ध्यान नहीं दिया। छोटी बच्ची बिना किसी हिचकिचाहट के उसके पास पहुंची। उसने पहले उसे साफ किया, फिर उसके उलझे हुए बालों को बड़े धैर्य से कंघी की। घोड़ा खुश होकर उसके पास खड़ा रहा। यह देखकर लोगों को समझ आया कि सच्चा प्रेम केवल अच्छे समय में साथ देने का नाम नहीं है, बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी अपने साथी का साथ निभाना ही असली इंसानियत है। उस दिन से सभी ने अपने आसपास के पशुओं की देखभाल करने का संकल्प लिया। छोटी बच्ची ने सबको यह सिखाया कि दया, प्रेम और सेवा सबसे बड़े गुण हैं। जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से दूसरों की सहायता करता है, वही वास्तव में महान बनता है।
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दिशिता जैन, 11 वर्ष
एक गांव में मीना नाम की एक लड़की रहती थी। उसके पास एक सुंदर घोड़ा था, जिसका नाम मोती था। मीना रोज मोती की देखभाल करती थी। वह उसे समय पर खाना देती, नहलाती और उसके बालों में कंघी करती थी। एक दिन मीना बगीचे में मोती के बाल संवार रही थी। मोती बहुत खुश था। तभी कुछ बच्चे वहां आए और बोले, "तुम अपने घोड़े का कितना ध्यान रखती हो!" मीना मुस्कुराकर बोली, "जानवर भी हमारे मित्र होते हैं। हमें उनकी देखभाल और प्यार करना चाहिए।" बच्चों ने भी मीना की बात मानी और अपने पालतू जानवरों की अच्छी देखभाल करने का निश्चय किया।
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मानवेंद्र सिंह राजपूत, 7 वर्ष
पिंकी को अपने जन्मदिन पर एक छोटा भूरा टट्टू उपहार में मिला, जिसका नाम उसने 'बादल' रखा। पिंकी हर दिन सुबह उठकर बादल को ताजी हरी घास खिलाती और बड़े प्यार से उसके बालों को कंघी से संवारती थी। बादल भी पिंकी से बहुत प्यार करता था और जब भी पिंकी उसके पास आती, वह खुशी से अपनी पूंछ हिलाने लगता था। इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि जब हम बेजुबान जानवरों को प्यार और देखभाल देते हैं, तो वे भी हमारे सबसे वफादार दोस्त बन जाते हैं।
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मुद्रिका शर्मा, 8 वर्ष
एक गांव में आर्या नाम की एक प्यारी लड़की रहती थी। उसे जानवरों से बहुत प्रेम था। उसके घर के पास बादल नाम का एक सुंदर घोड़ा रहता था। आर्या रोज उसके पास जाती, उसे प्यार से सहलाती और उसके लंबे बालों में कंघी करती। बादल भी आर्या को देखकर बहुत खुश हो जाता था। एक दिन तेज हवा और बारिश के कारण बादल के बाल उलझ गए और उसके शरीर पर मिट्टी लग गई। अगले दिन आर्या ने उसे अच्छी तरह साफ किया और बड़े प्यार से उसके बाल संवार दिए। बादल खुशी से हिनहिनाने लगा, मानो वह आर्या का धन्यवाद कर रहा हो। यह सब देखकर गांव के अन्य बच्चे भी जानवरों की देखभाल करने लगे। सभी ने समझ लिया कि पशु भी हमारी तरह प्यार और अपनापन चाहते हैं। उस दिन से गांव में हर कोई जानवरों के साथ दया और प्रेम से व्यवहार करने लगा।
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जिया माहेश्वरी, 10 वर्ष
एक सुंदर गांव में रानी नाम की एक छोटी बच्ची रहती थी। उसे जानवरों से बहुत प्यार था। उसके घर के पास एक प्यारी-सी घोड़ी रहती थी, जिसका नाम चांदनी था।
रानी रोज सुबह चांदनी के पास जाती। वह उसे प्यार से सहलाती, उसकी अयाल में कंघी करती और उसे ताजी घास खिलाती। चांदनी भी रानी को देखकर खुशी से हिनहिनाती और अपनी पूंछ हिलाती। एक दिन चांदनी के बाल बहुत उलझ गए थे। रानी ने धैर्य से उसकी अयाल में कंघी की। थोड़ी ही देर में चांदनी फिर से सुंदर और साफ दिखाई देने लगी। ऐसा लगा जैसे वह मुस्कुराकर रानी का धन्यवाद कर रही हो। रानी ने समझ लिया कि जानवर भी प्यार, देखभाल और अपनापन महसूस करते हैं। उस दिन से दोनों की दोस्ती और भी गहरी हो गई। वे हर दिन साथ समय बिताते और खुश रहते।
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असद खान, 7 वर्ष
एक गांव में रानी नाम की एक बच्ची रहती थी। उसे जानवरों से बहुत प्यार था। उसके पास बादल नाम का एक सुंदर घोड़ा था। रानी रोज उसे हरी घास खिलाती, साफ पानी पिलाती और उसके बालों में कंघी करती थी। घोड़ा भी रानी को बहुत चाहता था और हमेशा उसके साथ रहता था। एक दिन रानी अपने घोड़े के साथ बगीचे में घूम रही थी। तभी अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। घोड़ा तुरंत रानी को अपनी पीठ पर बैठाकर सुरक्षित घर ले आया। रानी बहुत खुश हुई और उसने अपने प्यारे साथी को प्यार से गले लगा लिया। यह देखकर गांव के लोग भी उसकी समझदारी और पशुओं के प्रति प्रेम की प्रशंसा करने लगे। उस दिन रानी ने सभी बच्चों को बताया कि पशु भी हमारी तरह भावनाएं रखते हैं। यदि हम उनसे प्रेम और दया का व्यवहार करें, तो वे भी हर कठिन समय में हमारा साथ निभाते हैं।
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धैवत सारोलकर, 7 वर्ष
एक बार सोनू नाम की एक लड़की थी। उसके घर एक घोड़ा था और वे दोनों अच्छे दोस्त थे। एक दिन दोनों सैर करने गए। तभी उन्हें एक बच्चा गिरा हुआ दिखाई दिया। उन्हें घर लौटने में देर हो रही थी, फिर भी घोड़े ने सोनू से कहा कि इस बच्चे को उसकी पीठ पर बिठा दिया जाए ताकि वे उसे अस्पताल ले जा सकें। सोनू ने ऐसा ही किया। बच्चे से उसके माता-पिता का नंबर लेकर उसे सुरक्षित घर पहुंचा दिया गया। माता-पिता ने दोनों का धन्यवाद किया।
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वंशिका कंवर, 10 वर्ष
एक दिन मैं अपने दादाजी के साथ बगीचे में घूमने गई। वहां मैंने एक बहुत सुंदर घोड़ी देखी। उसका रंग भूरा था और उसके लंबे, मुलायम बाल हवा में लहरा रहे थे। मैं उसे देखकर बहुत खुश हो गई। मैं धीरे-धीरे उसके पास गई ताकि वह डर न जाए। मैंने प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरा। वह भी मुझे देखकर शांत खड़ी रही। दादाजी ने मुझे एक कंघी दी। मैंने बड़े प्यार से उसके बाल संवारे। ऐसा लग रहा था जैसे उसे भी यह अच्छा लग रहा हो। उसकी चमकती आंखें देखकर मुझे लगा कि वह मुझसे दोस्ती करना चाहती है। मैंने उसे थोड़ा हरा चारा भी खिलाया। वह बड़े मजे से चारा खाने लगी। कुछ देर बाद मैं उसके साथ बगीचे में घूमी। चारों ओर रंग-बिरंगे फूल खिले थे और पक्षी मीठी आवाज में चहचहा रहे थे। उस सुंदर वातावरण में मुझे बहुत आनंद आया। मैंने सोचा कि हमें सभी जानवरों से प्यार करना चाहिए, क्योंकि वे भी हमारी तरह भावनाएं रखते हैं। यदि हम उनके साथ अच्छा व्यवहार करेंगे, तो वे भी हमें प्यार करेंगे। मैंने इसका नाम बादल रखा। शाम होने पर घर लौटने का समय हो गया। मैंने घोड़ी को प्यार से सहलाया और उसे अलविदा कहा। वह मुझे ऐसे देख रही थी, जैसे फिर मिलने का वादा कर रही हो। उस दिन की यह प्यारी मुलाकात मेरे लिए हमेशा यादगार रहेगी। मैंने सीखा कि पशु-पक्षियों से प्रेम करना और उनकी देखभाल करना हम सभी का कर्तव्य है।
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आरवी जैन, 12 वर्ष
एक गांव में गीता नाम की एक प्यारी बच्ची रहती थी। उसके पास एक सुंदर भूरा घोड़ा था, जिसका नाम राजा था। गीता रोज राजा को प्यार से सहलाती, उसके बाल संवारती और समय पर खाना-पानी देती थी। राजा भी गीता से बहुत प्यार करता था। जब भी गीता उसे बुलाती, वह तुरंत उसके पास आ जाता। दोनों साथ-साथ बगीचे में घूमते और खूब खेलते। एक दिन राजा के पैर में हल्की चोट लग गई। गीता ने उसकी अच्छी तरह देखभाल की। कुछ दिनों में राजा पूरी तरह ठीक हो गया। अब वह पहले की तरह खुशी-खुशी दौड़ने लगा। गीता ने समझा कि जानवर भी प्यार, दया और देखभाल चाहते हैं। हमें सभी पशु-पक्षियों के साथ प्रेम और सम्मान से व्यवहार करना चाहिए।
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केलीयना शहजाद, 7 वर्ष
एक गांव में रीमा नाम की एक प्यारी बच्ची रहती थी। उसे जानवरों से बहुत प्रेम था। उसके घर के पास एक सुंदर घोड़ा रहता था, जिसका नाम बादल था। रीमा रोज सुबह उसे हरी घास खिलाती, साफ पानी पिलाती और प्यार से उसके बालों में कंघी करती। बादल भी रीमा को देखकर खुशी से हिनहिनाता और उसके साथ खेलता था।
एक दिन बादल जंगल की ओर घूमते-घूमते चला गया। वहां उसके पैर में कांटा चुभ गया। वह दर्द से चल नहीं पा रहा था। रीमा ने उसे देखा तो तुरंत उसके पास पहुंची। उसने धीरे-धीरे कांटा निकाला, घाव साफ किया और दवा लगाई। कुछ देर बाद बादल को आराम मिला। वह खुशी से उछलने लगा और रीमा के चारों ओर घूमने लगा। उस दिन से गांव के सभी लोग रीमा की दयालुता की प्रशंसा करने लगे। सभी बच्चों ने भी यह निश्चय किया कि वे जानवरों के साथ हमेशा प्यार और दया का व्यवहार करेंगे। रीमा और बादल की दोस्ती पूरे गांव में मिसाल बन गई।
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भूवी मोदी, 10 वर्ष
एक गांव में 'रानी' नाम की एक प्यारी-सी लड़की रहती थी। उसे जानवरों से बहुत प्यार था। गांव के पास ही एक हरा-भरा घास का मैदान था, जहां रानी अक्सर घूमने जाती थी। एक दिन रानी को एक छोटा-सा टट्टू मिला। वह बहुत भूखा और डरा हुआ लग रहा था। रानी को उस पर दया आ गई। उसने उसे प्यार से पुचकारा और घास खिलाई। धीरे-धीरे टट्टू रानी का दोस्त बन गया। रानी ने उसे 'बादल' नाम दिया। बादल के घने और लंबे बाल थे, जो हवा में लहराते थे। वे दोनों एक-दूसरे के बहुत करीब आ गए। वे हर दिन घंटों साथ बिताते थे। बादल रानी को अपनी पीठ पर बिठाकर मैदान में घुमाता था। रानी भी बादल का बहुत ख्याल रखती थी।
रानी और बादल की दोस्ती गांव में मशहूर हो गई। उनकी दोस्ती यह सिखाती है कि प्यार और देखभाल से हम जानवरों को भी अपना दोस्त बना सकते हैं। रानी के लिए बादल सिर्फ एक टट्टू नहीं था, वह उसका सबसे अच्छा दोस्त और वफादार साथी था।
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रीतू, 12 वर्ष
एक गांव में रीतू नाम की एक दयालु और प्यारी बच्ची रहती थी। उसे जानवरों से बहुत प्यार था। एक दिन उसके पिताजी घर पर एक छोटा भूरा घोड़ा लेकर आए, जिसका नाम उन्होंने 'बादल' रखा। बादल बहुत ही शांत और समझदार था। हर शाम स्कूल से आने के बाद रीतू सीधे बादल के पास जाती थी। वह उसे प्यार से सहलाती, खाने के लिए ताजी हरी घास देती और एक विशेष ब्रश से उसके घने बालों को संवारती थी। जब रीतू उसके बाल संवारती, तो बादल बहुत खुश होता और शांति से खड़ा रहता था। वे दोनों बगीचे में खिले रंग-बिरंगे बैंगनी फूलों के बीच घंटों वक्त बिताते थे। इस तरह दोनों में एक गहरी और अटूट दोस्ती हो गई।
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अमायरा एमएन मेहता, डूंगरपुर, 7 वर्ष
एक सुंदर से शहर में लोलो नाम की एक प्यारी सी बच्ची रहती थी। लोलो को जानवरों से बहुत प्यार था, लेकिन उसे सबसे ज़्यादा लगाव चेतक से था। 'चेतक' एक चंचल और प्यारा-सा घोड़ा था। चेतक की गर्दन के बाल बहुत ही सुंदर, घने और रेशमी थे। हर सुबह जब सूरज की सुनहरी किरणें धरती पर पड़तीं, तो लोलो अपनी कॉलोनी के पास बने फूलों के बगीचे में पहुंच जाती। वहां चारों ओर हरे-हरे पेड़ और सुंदर बैंगनी रंग के फूल खिले रहते थे। चेतक हमेशा वहीं उसका इंतजार करता मिलता था। लोलो को आते देखकर चेतक खुशी से धीरे से हिनहिनाता और अपनी गर्दन लोलो की ओर बढ़ा देता। लोलो हमेशा अपने साथ एक छोटी कंघी लाती थी। वह बहुत ही धैर्य और प्यार से चेतक की गर्दन के उलझे बालों को सुलझाती और कंघी करती। जब भी लोलो उसके बालों में कंघी चलाती, तो चेतक को बहुत आराम मिलता और वह सुकून से अपनी आंखें मूंद लेता। कंघी करते-करते लोलो चेतक को अपने स्कूल और दिनभर की छोटी-छोटी बातें सुनाती थी, और चेतक भी एक सच्चे दोस्त की तरह चुपचाप सब सुनता रहता। लोलो समझती थी कि जानवरों को भी प्यार और देखभाल की ज़रूरत होती है। उन दोनों की यह मासूम दोस्ती शहर के सभी लोगों के चेहरे पर मुस्कान ले आती थी।
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प्रिशा चौधरी, 9 वर्ष
प्रिशा एक दयालु और समझदार लड़की थी। उसे जानवरों से बहुत प्यार था। उसके घर के पास एक सुंदर भूरा घोड़ा रहता था। प्रिशा रोज सुबह उसके पास जाती, उसे प्यार से सहलाती और उसके बालों में कंघी करती। घोड़ा भी प्रिशा को देखकर खुश हो जाता और धीरे-धीरे हिनहिनाने लगता। एक दिन घोड़ा थोड़ा उदास दिखाई दिया। प्रिशा ने उसकी अच्छी तरह देखभाल की, उसे ताज़ा घास और साफ पानी दिया। कुछ समय बाद घोड़ा फिर से स्वस्थ और खुश हो गया। उसे खुश देखकर प्रिशा भी मुस्कुरा उठी। उस दिन प्रिशा ने समझा कि जानवर भी हमारी तरह प्यार, दया और देखभाल चाहते हैं। यदि हम उनके साथ प्रेम से व्यवहार करें, तो वे भी हमारे सच्चे मित्र बन जाते हैं। तभी से प्रिशा रोज अपने प्यारे घोड़े की देखभाल करने लगी। दोनों की गहरी दोस्ती पूरे गांव में मिसाल बन गई। सभी बच्चों ने प्रिशा से सीख ली कि हमें हर जीव के प्रति दया और प्रेम का भाव रखना चाहिए।
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पार्श, 10 वर्ष
एक दिन रिया अपनी प्यारी घोड़ी चंपी के पास कंघी लेकर पहुंची। रिया बोली, "आज तुम्हें हीरोइन बनाना है!" चंपी बोली, "पहले पूछ तो लेती! मुझे तो नींद आ रही थी।" रिया ने कंघी चलानी शुरू की। चंपी ने गर्दन हिलाई, फिर पूंछ हिलाई, फिर ज़ोर से "हीहीही!" करने लगी। रिया बोली, "अरे! इतनी क्यों हंस रही हो?" चंपी बोली, "कंघी नहीं… गुदगुदी हो रही है!" इतने में एक चिड़िया आई और बोली, "वाह! यहां तो फ्री का ब्यूटी पार्लर खुल गया!" पास के फूल भी हवा में झूमने लगे, जैसे कह रहे हों, "अरे, हमारी भी हेयर स्टाइल कर दो!" आखिर में रिया ने आईना दिखाया। चंपी खुद को देखकर बोली, "वाह! अब तो मुझे घोड़ी नहीं, फिल्म स्टार बोलो!" दोनों इतनी जोर से हंसे कि पेड़ पर बैठे बंदर ने भी ताली बजा दी और बोला, "अगली बार मेरा भी हेयरकट फ्री में करना!"
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प्रायुष सिंह राजावत, 7 वर्ष
एक दिन रानी अपने बगीचे में घूम रही थी। वहां वह फूलों को और प्रकृति को देख रही थी। तभी उसने एक सुंदर घोड़ा देखा। घोड़ा बहुत शांत और प्यारा था। रानी उसके पास गई और प्यार से उसके बालों में कंघी करने लगी। घोड़े को बहुत अच्छा लगा। उसने खुशी से सिर हिलाया। रानी उसे रोज घास और पानी देती थी। धीरे-धीरे रानी और घोड़ा दोनों अच्छे दोस्त बन गए। वे हर दिन साथ समय बिताते और बहुत खुश रहते। गांव के लोग उनकी दोस्ती देखकर मुस्कुराते थे।
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ध्रुवी शर्मा, 10 वर्ष
एक सुंदर गांव में आर्या नाम की एक प्यारी बच्ची रहती थी। उसे पशु-पक्षियों से बहुत प्रेम था। उसके घर के पास एक सुंदर घोड़ा रहता था, जिसका नाम बादल था। आर्या रोज सुबह उसके पास जाती, उसे हरी-हरी घास खिलाती, साफ पानी पिलाती और उसके लंबे, मुलायम बालों में प्यार से कंघी करती। बादल भी उसे देखते ही खुशी से हिनहिनाता और उसके चारों ओर घूमने लगता। दोनों की दोस्ती पूरे गांव में प्रसिद्ध थी। एक दिन गांव में तेज आंधी और बारिश आई। बारिश के कारण पास की नदी का पानी बढ़ गया। उसी समय एक छोटा बछड़ा फिसलकर कीचड़ में फंस गया। उसकी दर्दभरी आवाज सुनकर आर्या तुरंत वहां पहुंची। उसने घबराने के बजाय गांव वालों को बुलाया। बादल भी समझदारी से उनके साथ खड़ा रहा। सभी ने मिलकर रस्सी की सहायता से बछड़े को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बछड़ा बच गया और उसके मालिक ने सबका धन्यवाद किया। इस घटना के बाद गांव के लोगों ने समझ लिया कि पशु केवल काम करने वाले जीव नहीं, बल्कि हमारे सच्चे मित्र भी हैं। यदि हम उन्हें प्रेम, दया और सम्मान दें, तो वे भी हर कठिन समय में हमारा साथ निभाते हैं। आर्या और बादल की मित्रता सभी बच्चों के लिए प्रेरणा बन गई। अब गांव के बच्चे भी पशुओं की देखभाल करने लगे और उन्हें कभी परेशान नहीं करते थे।
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स्नेहा गर्ग, 9 वर्ष
जंगल किनारे एक छोटे से गांव में रिया अपने मां-बाप के साथ रहती थी। रिया के मां-बाप बहुत गरीब थे। आज रिया का जन्मदिन था, और न तो उसके मां-बाप के पास जन्मदिन मनाने के पैसे थे और न ही उपहार देने के। रिया बहुत उदास थी, क्योंकि गांव के सभी बच्चे धूमधाम से अपना जन्मदिन मनाते थे और वह भी अपना जन्मदिन मनाना चाहती थी। वह उदास होकर अपने घर के पास वाले जंगल में आ गई। अचानक उसे कुछ आवाज सुनाई दी, जैसे कोई जोर-जोर से चीख रहा हो। उसने पीछे मुड़कर देखा घोड़े का एक बच्चा जंगल की मिट्टी और कीचड़ में गंदा हो गया था और जोर-जोर से चीख रहा था। जैसे ही रिया उसके पास पहुंची, वह चुप हो गया। रिया पास से पानी लेकर आई, उसे अच्छी तरह साफ़ किया और उसके बालों को भी एक ब्रश की सहायता से साफ किया। दोनों अब एक-दूसरे के अच्छे दोस्त बन गए थे, और रिया ने उसका नाम आर्या रख दिया। रिया और आर्या पूरे दिन मस्ती करते रहे। रिया को उसके जन्मदिन का उपहार मिल गया था अब वह बहुत खुश थी।
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ईशानी अहरी, 9 वर्ष
एक गांव में मीना नाम की एक प्यारी लड़की रहती थी। उसके पास चिंकी नाम का एक सुंदर घोड़ा था। मीना रोज उसे प्यार से खाना खिलाती, पानी पिलाती और उसके लंबे बालों में कंघी करती थी। एक दिन मीना बगीचे में चिंकी के बाल संवार रही थी। चिंकी बहुत खुश था। वह धीरे-धीरे अपनी पूंछ हिलाकर मीना का प्यार महसूस कर रहा था। आसपास रंग-बिरंगे फूल खिले हुए थे और पक्षी मीठी आवाज में चहचहा रहे थे। मीना ने हमेशा अपने घोड़े की अच्छी देखभाल की। इसलिए चिंकी भी मीना का बहुत आज्ञाकारी और सच्चा दोस्त बन गया।
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शाश्वत मुदगल, 8 वर्ष
एक दिन चिंकी अपने दोस्तों के साथ खेल रही थी। तभी उसकी गेंद झाड़ियों में चली गई। चिंकी गेंद ढूंढ़ने निकली तो झाड़ियों के पास ही उसे किसी की आवाज सुनाई दी। पास जाकर देखा तो वहां घोड़े का एक बच्चा दिखाई दिया। उसके बाल बहुत गंदे थे, तो चिंकी ने अपना कंघा निकालकर उसके बाल साफ कर दिए। इसके बाद चिंकी और वह घोड़ा दोनों दोस्त बन गए।
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भूमि चंदेरिया करजाली, 7 वर्ष
एक सुंदर और हरे-भरे गांव में 7 साल की एक बहुत प्यारी बच्ची रहती थी, जिसका नाम भूमि था। भूमि को जानवरों से बहुत प्यार था, लेकिन उसका सबसे अच्छा दोस्त था उसका भूरे रंग का छोटा घोड़ा, जिसे वह प्यार से 'गजराज' बुलाती थी। गजराज के बाल बहुत लंबे, घने और रेशमी काले रंग के थे। हर सुबह भूमि स्कूल जाने से पहले और शाम को खेल से लौटने के बाद गजराज के पास जरूर जाती थी। बगीचे में रंग-बिरंगे फूल खिले होते थे और चारों तरफ हरियाली होती थी। भूमि हमेशा गजराज के लिए मीठे गाजर और ताजी घास लेकर आती थी। एक दिन भूमि ने देखा कि गजराज के लंबे बाल थोड़े उलझ गए हैं। वह मुस्कुराई और तुरंत अपना छोटा-सा कंघा ले आई। भूमि बहुत प्यार और देखभाल के साथ गजराज के काले और सुंदर बालों को संवारने लगी। गजराज भी शांति से खड़ा होकर अपनी प्यारी दोस्त से कंघी करवाने का आनंद ले रहा था। जब भी भूमि उसके बालों में ब्रश चलाती, गजराज खुशी से अपनी पूंछ हिलाता। भूमि कहती, "गजराज, तुम मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो! जब तुम साफ और सुंदर दिखते हो, तो मुझे बहुत खुशी होती है।" बाल संवर जाने के बाद गजराज बहुत खुश और निखरा हुआ दिखने लगा। उसने प्यार से अपनी गर्दन भूमि के कंधे पर टिका दी, जैसे वह अपनी नन्ही दोस्त को धन्यवाद कह रहा हो। दोनों की यह अनोखी और सच्ची दोस्ती देखकर पूरा गांव उनकी मिसाल देता था।
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अमन राजपूत, 13 वर्ष
एक छोटे से गांव में अन्या नाम की एक प्यारी बच्ची रहती थी। उसे जानवरों से बहुत प्रेम था। एक दिन उसके पिताजी उसके लिए एक छोटा-सा घोड़ा लेकर आए। अन्या ने उसका नाम बादल रखा। वह रोज़ उसे प्यार से सहलाती, उसके बालों में कंघी करती, समय पर खाना खिलाती और उसके साथ बगीचे में घूमने जाती। धीरे-धीरे बादल भी अन्या का सबसे अच्छा दोस्त बन गया। एक दिन अन्या बादल के साथ जंगल के किनारे घूम रही थी। अचानक उसका पैर फिसल गया और वह एक गड्ढे में गिर गई। अन्या घबरा गई और जोर-जोर से मदद के लिए पुकारने लगी। बादल ने तुरंत जोर से हिनहिनाना शुरू किया। उसकी आवाज सुनकर पास के किसान वहां पहुंचे। उन्होंने मिलकर अन्या को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घर लौटने के बाद अन्या ने बादल को गले लगा लिया। उसकी आंखों में खुशी के आंसू थे। उसने समझ लिया कि सच्चा मित्र वही होता है जो मुश्किल समय में साथ निभाए। उस दिन से अन्या ने बादल की और भी अधिक देखभाल करनी शुरू कर दी। दोनों हर दिन साथ खेलते, बगीचे में घूमते और खुश रहते। इस घटना ने पूरे गांव को एक सीख दी कि जानवर भी इंसानों की तरह प्रेम और अपनापन समझते हैं। यदि हम उन्हें प्यार, दया और सम्मान दें, तो वे भी अपनी वफ़ादारी और सच्ची दोस्ती से हमारा जीवन खुशियों से भर देते हैं।
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हिमांशी सोनी, 8 वर्ष
एक सुंदर गांव में रिया नाम की एक प्यारी बच्ची रहती थी। उसके घर के पास एक भूरे रंग की सुंदर घोड़ी रहती थी। घोड़ी बहुत शांत, समझदार और सभी की प्रिय थी। रिया को जानवरों से बहुत प्रेम था। वह रोज स्कूल से लौटकर घोड़ी के पास जाती, उसे हरी घास खिलाती और प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरती। एक दिन रिया ने देखा कि घोड़ी के लंबे बाल बिखरे हुए हैं। वह तुरंत एक कंघी लेकर आई और बड़े प्यार से उसके बाल संवारने लगी। घोड़ी भी चुपचाप खड़ी रही, मानो उसे रिया का स्नेह बहुत अच्छा लग रहा हो। बाल संवारने के बाद घोड़ी पहले से भी अधिक सुंदर दिखाई देने लगी। रिया की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। यह दृश्य देखकर गांव के लोग भी बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने रिया की दया, प्रेम और पशुओं के प्रति उसके व्यवहार की खूब प्रशंसा की। रिया ने सभी बच्चों से कहा कि जानवर भी हमारी तरह भावनाएं रखते हैं। यदि हम उनसे प्यार करेंगे, तो वे भी हमें स्नेह और विश्वास देंगे। उस दिन से गांव के सभी बच्चे जानवरों की देखभाल करने लगे। वे उन्हें समय पर भोजन और पानी देते तथा उनके साथ अच्छा व्यवहार करते। घोड़ी और रिया की दोस्ती पूरे गांव में मिसाल बन गई।
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सांवी जोशी, 12 वर्ष
पशु भी हमारी तरह भावनाएं रखते हैं। यदि हम उनके साथ प्रेम और दया का व्यवहार करें, तो वे भी हमारे सच्चे मित्र बन जाते हैं। घोड़े को नियमित रूप से साफ रखना, समय पर भोजन और पानी देना तथा उसकी देखभाल करना हमारी जिम्मेदारी है। पशुओं की सेवा करना केवल हमारा कर्तव्य ही नहीं, बल्कि एक अच्छा संस्कार भी है। हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हमें सभी जीव-जंतुओं के प्रति दयालु और संवेदनशील होना चाहिए। प्रकृति, पेड़-पौधों और पशुओं की रक्षा करना हम सभी का दायित्व है। जब हम पशुओं से प्रेम करते हैं, तो वे भी हमें स्नेह और विश्वास लौटाते हैं। यह सुंदर चित्र हमें प्रेम, करुणा, जिम्मेदारी और प्रकृति के साथ मिलकर रहने का संदेश देता है। हमें हमेशा पशुओं का सम्मान करना चाहिए और उनकी देखभाल करके एक संवेदनशील तथा जिम्मेदार नागरिक बनने का प्रयास करना चाहिए।
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पवन यादव, 11 वर्ष
एक छोटा और खूबसूरत गांव था, जहां रिया नाम की एक मासूम बच्ची रहती थी। रिया को जानवरों से बहुत प्यार था। उसके घर के पास ही एक सुंदर बगीचा था, जहां रंग-बिरंगे फूल खिले रहते थे। एक दिन रिया के पिताजी उसके लिए एक छोटा-सा भूरा घोड़ा लेकर आए। रिया ने प्यार से उसका नाम 'चीकू' रखा। चीकू के काले और चमकीले बाल थे, जो हवा में बहुत सुंदर लगते थे। शुरू-शुरू में चीकू थोड़ा डरा हुआ था, लेकिन रिया ने अपने प्यार से जल्दी ही उसे अपना दोस्त बना लिया। हर सुबह रिया बगीचे में जाती और चीकू की देखभाल करती थी। वह उसे हरी घास खिलाती और बड़े प्यार से उसके बालों को ब्रश से संवारती थी। जब रिया उसके बाल बनाती, तो चीकू आराम से अपनी आंखें बंद कर लेता और अपनी पूंछ हिलाकर अपनी खुशी दिखाता था। गांव के बाकी बच्चे भी रिया और चीकू की दोस्ती को देखकर बहुत खुश होते थे। रिया ने सबको सिखाया कि अगर हम जानवरों को प्यार और सम्मान देंगे, तो वे भी हमारे सबसे अच्छे दोस्त बन सकते हैं।
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जय अग्रवाल, 7 वर्ष
एक छोटे से गांव में रिया नाम की एक प्यारी बच्ची रहती थी। उसे जानवरों से बहुत प्रेम था। उसके घर के पास एक सुंदर भूरा घोड़ा रहता था। घोड़े के लंबे-लंबे बाल थे, जिन्हें रिया रोज प्यार से कंघी करती थी। वह उसे समय पर खाना और साफ पानी भी देती थी। एक दिन रिया घोड़े को लेकर बगीचे में गई। वहां रंग-बिरंगे फूल खिले हुए थे और चारों ओर हरियाली थी। घोड़ा खुशी से इधर-उधर घूमने लगा। रिया उसे प्यार से सहलाती रही।
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हृदयांश बरवड़, 8 वर्ष
एक लड़की मीनू रोज शाम के समय पार्क में खेलने जाती थी। पार्क में छोटे-छोटे रंग-बिरंगे पौधे लगे हुए थे। एक दिन मीनू ने देखा कि पार्क में एक घोड़ा दिखाई दिया। मीनू उस घोड़े के पास गई, लेकिन उसे डर लग रहा था। मीनू ने साहस करके अपने हाथ से उसे सहलाया। घोड़ा वहीं शांत खड़ा रहा। दोनों में आपस में दोस्ती हो गई। इस तरह घोड़ा भी पार्क में उसका इंतजार करता रहता था। घोड़ा और मीनू रोज पार्क में साथ-साथ खेलते थे। एक दिन जब मीनू पार्क में आई तो अचानक उसे घोड़ा दिखाई नहीं दिया। वह बहुत उदास हुई और अपने घर चली गई। दूसरे दिन भी वह पार्क में घोड़े का इंतजार करती रही, लेकिन घोड़ा नहीं आया। फिर मीनू घोड़े को ढूंढ़ने के लिए पार्क से निकल पड़ी। जब उसने देखा तो वह किसी के घर में बंधा हुआ था। मीनू उस घर में गई और वहां पूछा, तो उन्होंने बताया कि यह घोड़ा तो उनका पालतू है, और उन्होंने उसे देने से मना कर दिया। वह लड़की उदास होकर अपने घर लौट आई और सारी बातें अपने पापा को बता दी। मीनू के पापा उसके लिए खेलने के लिए एक छोटा घोड़ा ले आए। फिर वे दोनों हंसी-खुशी रहने लगे।
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सम्राट सिंह शेखावत, 12 वर्ष
एक छोटे से गांव में रिया नाम की एक प्यारी बच्ची रहती थी। उसे जानवरों से बहुत प्रेम था। उसके घर के पास एक सुंदर भूरा घोड़ा रहता था, जिसका नाम बादल था। बादल बहुत शांत, समझदार और मिलनसार था। रिया रोज सुबह उसके पास जाती, उसे हरी घास खिलाती और उसके लंबे-लंबे बालों को प्यार से कंघी करती। बादल भी रिया को देखकर खुशी से हिनहिनाता और अपनी पूंछ हिलाता था। एक दिन तेज बारिश होने लगी। खेतों में चारों ओर पानी भर गया। रिया स्कूल से लौट रही थी कि उसका पैर फिसल गया। वह डर गई और मदद के लिए आवाज लगाने लगी। तभी बादल उसकी आवाज सुनकर दौड़ता हुआ आया। उसने रिया को सहारा दिया और सुरक्षित घर तक पहुंचा दिया। यह देखकर गांव वाले बहुत खुश हुए। सभी ने बादल की बहादुरी और समझदारी की खूब प्रशंसा की। उस दिन के बाद रिया और भी अधिक प्यार और लगन से बादल की देखभाल करने लगी। उसने समझ लिया कि जानवर भी इंसानों की तरह प्रेम, अपनापन और दया को समझते हैं। यदि हम उनसे प्यार करें, तो वे भी कठिन समय में हमारा साथ निभाते हैं।
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ख्यांश खत्री, 8 वर्ष
सुंदर और हरे-भरे बगीचे में रिया का एक प्यारा घोड़ा रहता था, जिसका नाम 'बादल' था। बादल के घने, भूरे बाल और बड़ी-बड़ी आंखें उसे बहुत खास बनाती थीं। रिया हर शाम स्कूल से आने के बाद बादल के पास पहुंच जाती थी। दोनों की दोस्ती बहुत गहरी थी। रिया प्यार से बादल के बालों को ब्रश से संवारती थी। बादल को भी रिया का यह दुलार बहुत भाता था। जब भी रिया उसके बालों में कंघी करती, बादल खुशी से अपनी आंखें बंद कर लेता और अपनी पूंछ हिलाने लगता। रिया हमेशा उससे कहती, "बादल, तुम सिर्फ एक घोड़े नहीं, मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो!"
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मीनाक्षी करगवाल, 11 वर्ष
एक सुंदर गांव में रिया नाम की एक प्यारी बच्ची रहती थी। रिया को जानवरों से बहुत लगाव था। एक दिन गांव के पास के मैदान में उसे एक छोटा, भूरे रंग का घोड़ा मिला। उसकी घनी और रेशमी पूंछ हवा में लहरा रही थी। रिया ने प्यार से उसका नाम 'बादल' रखा। धीरे-धीरे रिया और बादल में पक्की दोस्ती हो गई। रिया हर रोज स्कूल से आने के बाद बादल से मिलने मैदान में जाती थी। वह अपने साथ एक कंघी लेकर जाती और बड़े ही प्यार से बादल के बालों को संवारती थी। बादल भी खुशी से अपनी पूंछ हिलाता और रिया के कंधे पर अपना सिर रख देता। दोनों घंटों एक-दूसरे के साथ खेलते और हरी घास पर दौड़ लगाते थे। एक दिन खेलते-खेलते बादल का पैर एक गहरे गड्ढे में फंस गया। वह दर्द से कराहने लगा। रिया घबराई नहीं, बल्कि उसने तुरंत सूझबूझ दिखाई। उसने बड़े प्यार से बादल को सहलाया और धीरे से उसका पैर गड्ढे से बाहर निकाला। रिया की इस ममता और समझदारी ने बादल का दिल जीत लिया। इस घटना के बाद उनकी दोस्ती और भी गहरी हो गई। दोनों ने मिलकर यह सिखाया कि सच्ची मित्रता में केवल साथ खेलना ही नहीं, बल्कि एक-दूसरे की परवाह करना और संकट में काम आना सबसे जरूरी है।
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विहिका जैन, 9 वर्ष
एक दिन मैं बगीचे में खेल रही थी। तभी मैंने एक प्यारा-सा घोड़ा देखा। उसके लंबे और मुलायम बाल थे। वह हरी-हरी घास खा रहा था। मैं धीरे-धीरे उसके पास गई। पहले मैंने उसे प्यार से हाथ लगाया। फिर मैंने उसके बालों में कंघी की। घोड़े को बहुत अच्छा लगा। वह खुशी से अपनी पूंछ हिलाने लगा। मुझे भी बहुत खुशी हुई। थोड़ी देर बाद हम दोनों पेड़ के नीचे खड़े होकर ठंडी हवा का आनंद लेने लगे। चारों ओर सुंदर फूल खिले हुए थे। रंग-बिरंगी तितलियां उड़ रही थीं। मुझे ऐसा लगा जैसे पूरा बगीचा मुस्कुरा रहा हो। अब जब भी मैं बगीचे में जाती हूं, मेरा प्यारा घोड़ा मुझे देखकर खुश हो जाता है। मैं भी उसे प्यार से सहलाती हूं। हम दोनों अच्छे दोस्त बन गए हैं।
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नेहल जैन, 10 वर्ष
एक गांव में रिया नाम की एक प्यारी और दयालु लड़की रहती थी। उसे जानवरों से बहुत प्रेम था। उसके घर के पास एक सुंदर भूरे रंग का घोड़ा रहता था, जिसका नाम बादल था। रिया रोज सुबह बगीचे में जाकर बादल को प्यार से सहलाती, उसके बालों में कंघी करती और उसे ताजी घास खिलाती थी। एक दिन बादल उदास दिखाई दे रहा था। उसके लंबे बाल उलझ गए थे और वह थका-थका लग रहा था। रिया ने तुरंत उसकी देखभाल शुरू की। उसने बड़े प्यार से उसके बाल सुलझाए, शरीर साफ किया और उसे पानी पिलाया। थोड़ी ही देर में बादल खुश होकर इधर-उधर दौड़ने लगा। उसे देखकर रिया भी बहुत खुश हुई। यह सब देखकर गांव के लोग रिया की प्रशंसा करने लगे। उन्होंने कहा कि हमें भी जानवरों के साथ प्रेम और दया का व्यवहार करना चाहिए। जानवर बोल नहीं सकते, लेकिन वे हमारे प्यार और देखभाल को अच्छी तरह समझते हैं। उस दिन के बाद रिया रोज बादल की देखभाल करती रही। दोनों की गहरी मित्रता हो गई। वे बगीचे में साथ समय बिताते और बहुत खुश रहते।
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निशिता चौहान, 12 वर्ष
एक गांव में एक प्यारी बच्ची रहती थी। उसके घर में एक सुंदर घोड़ी थी। बच्ची रोज सुबह घोड़ी के पास जाती, उसे प्यार से सहलाती और उसके बालों में कंघी करती। घोड़ी भी बच्ची से बहुत स्नेह करती थी। जब बच्ची उसके पास आती, तो वह खुशी से हिनहिनाने लगती। वएक दिन घोड़ी जंगल के पास चर रही थी। बच्ची भी उसके साथ गई। उसने घोड़ी को साफ किया और उसकी अच्छी तरह देखभाल की। घोड़ी बहुत खुश हुई। दोनों ने पेड़ों और फूलों के बीच खूब समय बिताया। शाम होने पर बच्ची घोड़ी को सुरक्षित घर ले आई। बच्ची की देखभाल और प्यार से घोड़ी हमेशा स्वस्थ और प्रसन्न रहती थी। दोनों की दोस्ती देखकर सभी लोग खुश होते थे।
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गौरिक जैन, 12 वर्ष
एक सुंदर गांव में मीरा नाम की एक प्यारी बच्ची रहती थी। उसे जानवरों से बहुत प्रेम था। उसके घर के पास एक सुंदर भूरे रंग का घोड़ा रहता था। घोड़े की लंबी काली अयाल और चमकदार पूंछ देखकर हर कोई उसकी प्रशंसा करता था। मीरा रोज सुबह उसके पास जाती, उसे सहलाती, कंघी करती और ताजी घास खिलाती थी। घोड़े को भी मीरा बहुत पसंद थी। जैसे ही वह आती, घोड़ा खुशी से हिनहिनाने लगता। दोनों बगीचे में घूमते, पेड़ों की छाया में खेलते और रंग-बिरंगे फूलों के बीच समय बिताते। मीरा हमेशा घोड़े का ध्यान रखती थी। वह उसे साफ पानी पिलाती और उसके रहने की जगह भी साफ रखती थी। एक दिन घोड़े के पैर में हल्की चोट लग गई। मीरा ने तुरंत अपने माता-पिता को बताया। वे पशु-चिकित्सक को बुलाकर लाए। डॉक्टर ने घोड़े का इलाज किया और कुछ दिनों तक आराम करने की सलाह दी। मीरा रोज उसकी सेवा करती रही। वह प्यार से उससे बातें करती और समय पर दवा भी देती। कुछ ही दिनों में घोड़ा पूरी तरह स्वस्थ हो गया। वह फिर से पहले की तरह दौड़ने और खेलने लगा। मीरा बहुत खुश हुई। गांव के लोगों ने भी मीरा की दयालुता और जिम्मेदारी की खूब प्रशंसा की। उस दिन से सभी बच्चों ने यह सीख ली कि जानवर भी हमारी तरह जीवित प्राणी हैं। उन्हें भी प्रेम, देखभाल और दया की आवश्यकता होती है। यदि हम पशुओं से प्यार करेंगे, तो वे भी हमें सच्चा स्नेह और विश्वास देंगे।
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धनिशा जैन, 6 वर्ष
आज मैं बगीचे में गई। वहां एक प्यारा-सा घोड़ा खड़ा था। उसके लंबे-लंबे बाल थे। मेरे हाथ में एक छोटी-सी कंघी थी। मैंने प्यार से उसके बाल संवारने शुरू किए। तभी कुछ जादू हुआ! घोड़ा धीरे-धीरे मुस्कुराने लगा। पेड़ों के फूल भी हिलने लगे। रंग-बिरंगी तितलियां हमारे पास आ गईं। मुझे लगा जैसे पूरी बगिया खुश होकर ताली बजा रही हो। मैंने घोड़े को प्यार से गले लगाया। उसने अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया। मेरा दिल खुशी से भर गया। घर जाते समय मैंने अपनी कंघी को देखा और मुस्कुराई। शायद कंघी में जादू नहीं था… जादू तो प्यार में था।
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प्रारब्ध नामा, 7 वर्ष
हमारे खेत के पास एक हरा-भरा सुंदर बगीचा है, जहां रंग-बिरंगे फूल खिले रहते हैं। वहीं मेरी मुलाकात मेरे सबसे प्यारे दोस्त से होती है मेरा घोड़ा चेतक। चेतक बहुत ही प्यारा, समझदार और शांत स्वभाव का घोड़ा है। उसका भूरा शरीर और काली-घनी अयाल उसकी सुंदरता में चार चांद लगा देते हैं। हर सुबह जब सूरज की किरणें खिलती हैं, मैं चेतक से मिलने बगीचे में जाती हूं। वह मुझे देखते ही खुशी से हिनहिनाने लगता है। मैं रोज प्यार से उसकी अयाल और बालों में कंघी करती हूं, जिससे उसका शरीर साफ और चमकदार रहे। जब मैं उसे ब्रश करती हूं, तो वह आंखें बंद करके बहुत आराम महसूस करता है। कंघी करने के बाद हम दोनों बगीचे के चारों ओर सैर करते हैं। चेतक कभी मुझे अकेला नहीं छोड़ता और हमेशा मेरा ध्यान रखता है। उसकी निस्वार्थ दोस्ती और प्यार मेरे जीवन का सबसे सुंदर हिस्सा है।
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अनैषा शर्मा, 8 वर्ष
एक दिन छुट्टियों में शालू अपने नाना-नानी के गांव गई। वहां उसने एक सुंदर भूरी घोड़ी देखी। उसका नाम चांदनी था। चांदनी बहुत शांत और प्यारी थी, लेकिन वह किसी अजनबी के पास नहीं जाती थी। शालू ने धीरे-धीरे उसके पास जाकर प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरा। फिर उसने एक ब्रश से उसके लंबे, मुलायम बाल संवारने शुरू किए। चांदनी को यह बहुत अच्छा लगा। देखते ही देखते दोनों की अच्छी दोस्ती हो गई। अब शालू रोज सुबह चांदनी के लिए ताजी घास लाती, उसे पानी पिलाती और उसके बाल संवारती। बदले में चांदनी भी शालू के साथ बगीचे में घूमती और खुशी से हिनहिनाती। एक दिन तेज बारिश होने लगी। शालू फिसलकर गिरने ही वाली थी कि चांदनी ने तुरंत उसके पास आकर उसे संभाल लिया। शालू ने प्यार से चांदनी को गले लगा लिया। उस दिन उसे समझ में आया कि जानवर भी सच्चे मित्र बन सकते हैं। उसने निश्चय किया कि वह हमेशा पशु-पक्षियों से प्रेम करेगी और उनकी देखभाल करेगी।
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करण शर्मा, 12 वर्ष
एक दिन बहुत सुहानी सुबह थी। उस दिन मौसम बहुत अच्छा था। उस समय दीक्षा के मन में चिड़ियाघर घूमने जाने की इच्छा हुई। उसने अपने माता-पिता से आग्रह किया। तब दीक्षा की माताजी ने भी पिता से आग्रह किया कि आज अच्छा मौसम है और वहां जाकर मजा भी आएगा, क्योंकि वहां सुंदर-सुंदर पशु-पक्षी देखने को मिलेंगे। दीक्षा और उसकी मां के आग्रह पर दीक्षा के पिता भी मान गए। उन्होंने कहा कि सभी अच्छे कपड़े पहनकर तैयार हो जाए, फिर वे चिड़ियाघर चलेंगे। सभी तैयार होकर गाड़ी में बैठकर चिड़ियाघर के लिए रवाना हो गए। रास्ते में भी उन्होंने कई पशु-पक्षी देखे। चिड़ियाघर पहुंचकर दीक्षा ने हाथी, घोड़े, शेर, चीता, बाघ, हिरण, भालू, घोड़ी, गोरिल्ला, जंगली कुत्ते, जंगली भैंसा और एक सींग वाला गैंडा जैसी कई प्रजातिया देखीं। दीक्षा का मन वहां खड़ी एक घोड़ी, जो कीचड़ से भरी हुई थी, को नहलाने का हुआ। उसने अपने माता-पिता से पूछा और उन्होंने हां कह दी। वह उसे अच्छे से हाथ रगड़कर नहलाने लगी। वहां खड़े सभी लोग दीक्षा की प्रशंसा करने लगे, क्योंकि उसके दिल में पशुओं के प्रति जो प्रेम था, वही उसके लिए सबसे आनंददायक अनुभूति थी।
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मुहम्मद अशअर तौहीद, 7 वर्ष
एक दिन मैं मम्मी के साथ बगीचे गया। वहां मैंने एक प्यारा-सा घोड़ा देखा। वह बहुत सुंदर था। उसके बाल लंबे और मुलायम थे। मैं धीरे-धीरे उसके पास गया। पहले मुझे थोड़ा डर लगा, लेकिन घोड़ा बहुत शांत था। मैंने प्यार से उसके बालों में कंघी की। उसे अच्छा लगा। वह खुश होकर हिनहिनाने लगा। फिर मैंने उसे प्यार से सहलाया। मैंने उसे हरी-हरी घास भी खिलाई। वह आराम से घास खाने लगा। मुझे उसे देखकर बहुत खुशी हुई। थोड़ी देर बाद हम साथ में खेलने लगे। मुझे उसके साथ बहुत मजा आया। जब घर जाने का समय हुआ, तो मेरा मन उदास हो गया। मैं घोड़े को छोड़कर नहीं जाना चाहता था। मैंने उसे प्यार से अलविदा कहा। मुझे लगा कि वह भी मुझसे फिर मिलने के लिए कह रहा है। उस दिन मैंने सीखा कि हमें सभी जानवरों से प्यार करना चाहिए। हमें उन्हें कभी तंग नहीं करना चाहिए। हमें उन्हें खाना, पानी और प्यार देना चाहिए। जानवर भी हमारे अच्छे दोस्त होते हैं।
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अजलीन और उसका प्यारा बादल
अजलीन फातिमा अंसारी, 8 वर्ष
एक सुंदर बगीचे में अजलीन नाम की एक छोटी लड़की रहती थी। उसे जानवरों से बहुत प्यार था। अजलीन के पास एक छोटा और बहुत ही प्यारा भूरे रंग का घोड़ा था, जिसका नाम उसने 'बादल' रखा था। बादल के बाल बहुत लंबे और काले थे। एक दिन अजलीन ने देखा कि बादल के बाल थोड़े उलझ गए हैं। वह तुरंत अपनी पसंदीदा कंघी लेकर आई और प्यार से उसके बालों को संवारने लगी। जब अजलीन बादल के बालों को ब्रश कर रही थी, तो बादल भी बहुत शांत और खुश खड़ा था। बगीचे के चारों तरफ सुंदर बैंगनी फूल खिले हुए थे और हरी-भरी घास थी। अजलीन और बादल की यह दोस्ती देखकर ऐसा लग रहा था मानो वे दोनों एक-दूसरे के सबसे अच्छे दोस्त हों। अजलीन ने हमेशा अपने जानवरों की देखभाल करने का वादा किया।
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राघव दाधीच, 12 वर्ष
एक छोटे से गांव में सिया नाम की एक प्यारी बच्ची रहती थी। उसके पास एक सुंदर घोड़ा था, जिसका नाम राजा था। सिया राजा से बहुत प्यार करती थी। वह रोज सुबह उसे हरी-हरी घास खिलाती, पानी पिलाती और उसके लंबे बालों में कंघी करती। एक दिन राजा उदास दिखाई दे रहा था। सिया ने प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरा और उसके बाल संवारने लगी। कुछ ही देर में राजा खुश होकर हिनहिनाने लगा। उसे लगा कि उसकी सबसे अच्छी दोस्त सिया ही है। दोनों रोज बगीचे में घूमते, फूलों के बीच खेलते और खूब समय बिताते। सिया ने हमेशा राजा की देखभाल की और राजा भी हर समय सिया का साथ निभाता था।
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प्रांजल राजोरिया, 10 वर्ष
एक बार अनाया नाम की एक लड़की थी। वह अपनी दादी और अपने घोड़े, जिसका नाम बादल था, उनके साथ रहती थी। उसे घुड़सवारी करना बहुत पसंद था। वह रोज बादल पर बैठकर सवारी करने जाया करती थी। उसकी दादी उसके और बादल के लिए अच्छा-अच्छा खाना बनाती थी। एक दिन उसकी दादी को एप्पल पाई बनानी थी, जिसके लिए उन्हें सेब चाहिए थे, जो उनके घर से दूर एक बगीचे में मिलते थे। दादी ने उससे कहा, "बेटा, घर से दूर हरी अंकल का एक सेब का बगीचा है, वहां से तुम सेब लेकर आओ। मैं तुम्हारे और बादल के लिए एप्पल पाई बनाऊंगी।" इतना सुनते ही अनाया झट से अपने बादल को लेकर तैयार होने लगी। उसने बादल को नहलाकर, बाल कंघी कर तैयार किया और उस पर सवार होकर बगीचे की ओर चल दी। उसने बगीचे से झट से कई सारे सेब तोड़ लिए। दादी ने फटाफट एप्पल पाई बनाई। तीनों ने मिलकर मस्ती से एप्पल पाई खाई, जो वाकई बहुत स्वादिष्ट बनी थी। अनाया की खुशी उसके चेहरे पर झलक रही थी। उसने बादल को प्रेम से गले लगाया।
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पुष्टि माथुर, 9 वर्ष
एक सुंदर गांव में पुष्टि नाम की एक प्यारी बच्ची रहती थी। उसे पशु-पक्षियों से बहुत प्रेम था। उसके घर में एक सुंदर और शांत स्वभाव का घोड़ा था। पुष्टि हर दिन सुबह उठकर सबसे पहले अपने घोड़े के पास जाती। वह उसे हरा-ताजा चारा खिलाती, साफ पानी पिलाती और उसके लंबे, सुंदर बालों में कंघी करती थी। घोड़ा भी पुष्टि को देखकर बहुत खुश हो जाता था। एक दिन मौसम बहुत सुहावना था। चारों ओर हरे-भरे पेड़, रंग-बिरंगे फूल और ठंडी हवा चल रही थी। पुष्टि अपने घोड़े को बगीचे में ले गई। वह बड़े प्यार और धैर्य से उसके बाल संवारने लगी। घोड़ा बिल्कुल शांत खड़ा रहा, मानो अपने मन की खुशी व्यक्त कर रहा हो। यह सुंदर दृश्य देखकर वहां से गुजर रहे कुछ बच्चे भी रुक गए। उन्होंने देखा कि पुष्टि अपने घोड़े की कितनी अच्छी देखभाल करती है। बच्चों ने भी निश्चय किया कि वे अपने आसपास के सभी पशु-पक्षियों के साथ प्रेम और दया का व्यवहार करेंगे। पुष्टि का मानना था कि जानवर बोल नहीं सकते, लेकिन वे प्यार और अपनापन अच्छी तरह समझते हैं। यदि हम उनकी देखभाल करें, तो वे भी हमारे सच्चे साथी बन जाते हैं। इसलिए हमें सभी जीवों के प्रति दयालु और जिम्मेदार होना चाहिए।
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कृष्णा सैन, 9 वर्ष
मेरा नाम कृष्णा है। मैं 9 साल की हूं। मेरे घर के पास एक छोटा-सा बगीचा है। एक दिन वहां मुझे एक छोटा घोड़ा मिला। उसका रंग हल्का भूरा था और उसके लंबे काले बाल थे। मैंने उसका नाम बादल रखा, क्योंकि वह हवा के साथ बहुत प्यारा लगता था। अब मैं रोज स्कूल से आकर सबसे पहले बादल के पास जाती हूं। मैं उसके बाल धीरे-धीरे कंघी करती हूं। जब मैं उससे बातें करती हूं, तो वह अपने कान हिलाता है। मुझे लगता है कि वह मेरी सारी बातें समझता है। एक दिन मेरा मन उदास था, क्योंकि मेरी ड्राइंग प्रतियोगिता अच्छी नहीं हुई थी। मैं चुपचाप बादल के पास बैठ गई। उसने अपना सिर मेरे कंधे से लगा दिया। तभी मुझे लगा कि सच्चा दोस्त बिना बोले भी हिम्मत देता है। अगले दिन मैंने फिर से मेहनत की। इस बार मेरी तस्वीर सबको बहुत पसंद आई। मैंने सबसे पहले जाकर बादल को यह खुशखबरी सुनाई। वह खुशी से इधर-उधर दौड़ने लगा। मैं भी हंस पड़ी। उस दिन मैंने सीखा कि दोस्ती सिर्फ इंसानों से नहीं होती। जानवर भी हमारे अपने बन जाते हैं। अगर हम उन्हें प्यार दें, तो वे हमें मुस्कान, हिम्मत और सच्चा साथ लौटाते हैं। इसलिए मैं हमेशा बादल का ध्यान रखूंगी, क्योंकि वह मेरा सबसे प्यारा दोस्त है।
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तनवी गेंवा रूपसी, 7 वर्ष
मेरा नाम परी है। मुझे जानवर बहुत अच्छे लगते हैं। मेरे घर के पास एक सुंदर घोड़ी रहती है। उसका नाम चांदनी है। मैं रोज उसे हरी घास खिलाती हूं। वह मुझे देखकर खुशी से हिनहिनाती है। हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त हैं। एक दिन मैं पार्क में खेल रही थी। खेलते-खेलते मैं अपनी मम्मी से दूर चली गई। मुझे रास्ता समझ में नहीं आया। मैं डर गई और रोने लगी। तभी मेरी प्यारी घोड़ी चांदनी वहां आ गई। उसने मुझे देखा और प्यार से मेरे पास आकर बैठ गई। मैं उसकी पीठ पर बैठ गई। फिर चांदनी उठी और मुझे धीरे-धीरे मेरे घर ले आई। मम्मी मुझे देखकर बहुत खुश हुईं। उन्होंने चांदनी को प्यार किया और उसे गुड़ व हरी घास खिलाई। मैं भी बहुत खुश हुई। उस दिन मुझे समझ आया कि जानवर भी हमारे अच्छे दोस्त होते हैं। हमें उनसे हमेशा प्यार करना चाहिए और उनकी देखभाल करनी चाहिए।
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दृष्टि गेंवा रूपसी, 7 वर्ष
मुझे जानवरों से बहुत प्यार है। हमारे घर के पास एक सुंदर घोड़ी रहती थी। उसका नाम चंचल था। मैं रोज स्कूल से आने के बाद उसे हरी घास खिलाती, उसके बालों में कंघी करती और उससे बातें करती थी। धीरे-धीरे वह मेरी सबसे अच्छी दोस्त बन गई। एक दिन मैं बगीचे में रंग-बिरंगे फूल देखने गई। वहां मैं फूलों की सुंदरता में इतनी खो गई कि मुझे समय का पता ही नहीं चला। अचानक मौसम बदल गया और तेज बारिश शुरू हो गई। मैं घबरा गई और एक पेड़ के नीचे खड़ी होकर रोने लगी।
तभी मेरी प्यारी घोड़ी चंचल दौड़ती हुई मेरे पास आ गई। उसने प्यार से अपना सिर मेरे कंधे से लगाया, जैसे मुझे डरने से मना कर रही हो। मैं उसकी पीठ पर बैठ गई। चंचल सावधानी से मुझे बारिश में घर तक ले आई। घर पहुंचकर मम्मी-पापा बहुत खुश हुए। उन्होंने चंचल को प्यार से सहलाया और उसे गुड़ तथा हरी घास खिलाई। उस दिन मुझे समझ आया कि सच्ची मित्रता केवल इंसानों से ही नहीं होती, बल्कि जानवर भी हमारे सुख-दुख के साथी बन सकते हैं। हमें हमेशा पशुओं से प्रेम करना चाहिए और उनकी अच्छी देखभाल करनी चाहिए। प्रेम और दया का व्यवहार हमें सच्चे मित्र दिलाता है।
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गार्गी चौहान, 9 वर्ष
एक सुंदर और हरे-भरे गांव में रिया नाम की एक छोटी लड़की रहती थी। उसके पास भूरे रंग का एक बहुत ही प्यारा और समझदार घोड़ा था, जिसका नाम उसने 'बादल' रखा था। बादल के घने और लंबे काले बाल थे, और रिया रोज उसकी देखभाल करती थी। एक सुहावने मौसम में रिया बादल को गांव के पास वाले सुंदर बगीचे में ले गई। उस बगीचे में चारों ओर हरी घास और बैंगनी रंग के प्यारे फूल खिले हुए थे। बादल वहां पहुंचकर बहुत खुश हुआ और मजे से घास चरने लगा। रिया ने अपने बैग से एक कंघी निकाली और प्यार से बादल की गर्दन के लंबे बालों को संवारने लगी। जैसे ही रिया ने कंघी फेरना शुरू किया, बादल ने सुकून से अपनी आंखें बंद कर लीं। रिया के चेहरे पर अपने प्यारे साथी की सेवा करके एक प्यारी-सी मुस्कान आ गई।
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मान्या राठी, 7 वर्ष
एक थी छोटी-सी बच्ची रिया। एक दिन सुबह-सुबह वह घूमते-घूमते हरे-भरे मैदान में पहुंची। वहां उसे मिला एक बहुत सुंदर भूरा घोड़ा। उसके बाल लंबे और काले थे, बिल्कुल बादल जैसे। घोड़े का नाम था हवा, जो बहुत शांत था। रिया के हाथ में एक कंघी थी। उसने धीरे-धीरे हवा के सुनहरे-भूरे बाल बनाए। हवा भी खुश होकर अपना सिर हिलाने लगा। आसपास बैंगनी फूल खिले थे और पेड़ों से ठंडी हवा आ रही थी। थोड़ी देर खेलने के बाद रिया ने कहा, "हवा, तुम बहुत अच्छे हो। चलो अब घर चलें। मैं तुम्हें घास और पानी दूंगी।" घर आकर रिया ने हवा को प्यार से घास खिलाई। दोनों ने साथ में मस्ती की। जानवरों से प्यार करो, उनकी देखभाल करो वे भी हमारे दोस्त बन जाते हैं।
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रिद्धिमा पवार, 10 वर्ष
एक सुंदर सुबह की बात है। मैं अपने प्यारे घोड़े बादल के साथ गांव के एक खूबसूरत बगीचे में गई। बगीचे में चारों ओर हरी-हरी घास और रंग-बिरंगे फूल खिले हुए थे। लाल गुलाब, पीले गेंदे और बैंगनी फूलों की खुशबू से पूरा वातावरण महक रहा था। मुझे घुड़सवारी का बहुत शौक था। मैंने प्यार से घोड़े की अयाल पर हाथ फेरा और उसे ब्रश से साफ़ किया। फिर मैंने उस पर काठी लगाई और सावधानी से उसकी पीठ पर बैठ गई। बादल धीरे-धीरे बगीचे की पगडंडी पर चलने लगा। मैं बहुत खुश थी। कुछ दूर जाने के बाद घोड़ा तेज दौड़ने लगा और मैंने लगाम संभालते हुए उसका उत्साह बढ़ाया। घुड़सवारी करते हुए मैंने देखा कि कुछ तितलियां सुंदर फूलों के ऊपर मंडरा रही थीं। पक्षी पेड़ों पर बैठकर मधुर गीत गा रहे थे। ठंडी हवा चल रही थी और फूलों की पंखुड़ियां हवा में धीरे-धीरे झूम रही थीं। मैंने बादल को फूलों के पास रोककर उनकी सुंदरता निहारी। थोड़ी देर बाद मैंने घोड़े को पानी पिलाया और खुद भी पेड़ की छाया में बैठ गई। मैंने बादल को कुछ हरी घास भी खिलाई। शाम होने से पहले हम दोनों घर लौट आए। मेरे लिए यह दिन बहुत खास था। मैंने सीखा कि प्रकृति, फूलों और पशुओं से प्रेम करने से मन हमेशा खुश रहता है।
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अनिक्षा भारद्वाज, 7 वर्ष
रीमा अकेली बहन थी। इस बात से रीमा को बहुत बुरा लगता था। उसके पापा रीमा के लिए एक घोड़ी लाए। रीमा घोड़ी को लेकर रोज बगीचे में घूमने जाती थी। रीमा ने सोचा कि वह घोड़ी के बालों को रोज संवारकर चोटी बनाएगी। उसने घोड़ी के बाल संवारना शुरू कर दिया। हर दिन बगीचे में जाकर प्राकृतिक हवा में धीरे-धीरे वह घोड़ी की कंघी करती। घोड़ी को यह बहुत अच्छा लगता। रीमा और उस प्यारी घोड़ी में गहरी दोस्ती हो गई। रीमा को अब लगने लगा था कि वह उसकी सगी बहन जैसी है। घोड़ी भी अब रीमा के बिना नहीं रहती थी। दोनों रोज प्रकृति का आनंद लेतीं और खूब मस्ती करतीं। अब दोनों को समझ आ गया था कि साथ मिलकर रहने में ही असली आनंद है।
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विवान शर्मा, 8 वर्ष
एक बहुत ही सुंदर और हरे-भरे बगीचे में मीनू नाम की एक प्यारी-सी लड़की रहती थी। मीनू को जानवर बहुत पसंद थे, और उसका सबसे प्यारा दोस्त था उसका घोड़ा। वह घोड़ा हल्के भूरे रंग का था और उसकी गर्दन के बाल बहुत ही मुलायम और चमकीले काले थे। मीनू प्यार से उसे 'सनी' बुलाती थी। रोजाना स्कूल से लौटकर मीनू दौड़कर सनी के पास जाती थी। सनी उसे देखते ही खुशी से हिनहिनाने लगता था। मीनू अपने साथ सनी के लिए कुछ न कुछ खाने को जरूर लाती थी कभी चने, कभी फल। सनी अपने नन्हे मुंह से मीनू के हाथों को धीरे से सहलाता और अपनी लंबी जीभ से फल खा लेता। वह मीनू के प्यार को अच्छे से समझता था। शाम के समय मीनू हमेशा सनी के बालों को एक बड़े से कंघे से संवारती थी। वह धीरे-धीरे कंघी करती और साथ ही अपनी दिनभर की बातें भी सनी को सुनाती। मीनू कहती, "सनी, पता है! आज मैंने स्कूल में बहुत मजे किए। फिर हम दोनों शाम को दौड़ने चलेंगे, ठीक है?" सनी उसकी बातों को ध्यान से सुनता और अपनी पूेछ हिलाता, जैसे कि वह मीनू की बातों को समझ रहा हो। सनी और मीनू एक-दूसरे के बिना अधूरे थे। वे हमेशा एक साथ रहते, खेलते और खुश रहते थे।