लाइफस्टाइल

Kottankulangara Devi Temple: केरल का वो मंदिर जहां बिना ‘सोलह श्रृंगार’ किए पुरुषों की एंट्री है नामुमकिन

Kottankulangara Devi Temple: आज के इस लेख में केरल के कोल्लम जिले के चावरा (Chavara) कस्बे में स्थित कोट्टनकुलंगरा देवी मंदिर के बारे में जानते हैं। यह प्रसिद्ध मंदिर देवी भगवती को समर्पित है और अपनी अनूठी परंपरा, विशेष रूप से चमयाविलक्कू उत्सव के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें पुरुष महिलाओं के कपड़े पहनकर पूजा करते हैं।

2 min read
Apr 14, 2026
Kottankulangara Devi Temple| image credit gemini and instagram shainal_trivedii

Kottankulangara Devi Temple: केरल अपनी एक से बढ़कर एक खूबसूरत टूरिस्ट जगहों की वजह से जाना जाता है, लेकिन बेहद कम लोग जानते हैं कि यहां एक ऐसा मंदिर छिपा है जो अपनी अलग परंपरा के लिए पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना रहता है। आमतौर पर मंदिरों में ड्रेस कोड को लेकर सख्त नियम होते हैं, लेकिन कोट्टनकुलंगरा देवी मंदिर की कहानी कुछ अलग ही है। यहां श्रद्धा का पैमाना सादगी नहीं, बल्कि पूरा सोलह श्रृंगार है। आपको जानकर हैरानी होती है कि एक पुरुष को मंदिर की दहलीज पार करने के लिए अपना जेंडर भूलकर पूरी तरह एक महिला का रूप धारण करना पड़ता है। आइए आज के इस लेख में केरल के कोल्लम जिले के चावरा (Chavara) कस्बे में स्थित कोट्टनकुलंगरा देवी मंदिर के बारे में जानते हैं। यह प्रसिद्ध मंदिर देवी भगवती को समर्पित है और अपनी अनूठी परंपरा, विशेष रूप से चमयाविलक्कू उत्सव के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें पुरुष महिलाओं के कपड़े पहनकर पूजा करते हैं।

ये भी पढ़ें

राजस्थान में मंदिरों की व्यवस्था भगवान भरोसे, देवस्थान विभाग में 52 प्रतिशत पद खाली; 16 साल से कैडर रिव्यू नहीं

परंपरा का अनोखा रूप (A Unique Tradition)


सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम चैनल shainal_trivedii पर CA Shainal Trivedi द्वारा शेयर वीडियो के अनुसार इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां पुरुषों के प्रवेश पर पाबंदी नहीं है, लेकिन उनके साधारण कपड़ों में आने पर रोक है। अगर किसी पुरुष को देवी के दर्शन करने हैं, तो उसे साड़ी पहननी होती है, चेहरे पर मेकअप करना पड़ता है और गहनों से खुद को सजाना पड़ता है। चमयाविलक्कू नाम के सालाना त्यौहार के दौरान यह नजारा देखने लायक होता है, जब हजारों की संख्या में पुरुष रेशमी साड़ियां पहनकर और बालों में गजरा लगाकर मंदिर पहुंचते हैं। मंदिर प्रशासन ने इस काम में मदद के लिए परिसर के पास अलग से तैयार होने की जगह और मेकअप आर्टिस्ट की सुविधा भी दे रखी है।

मन्नत और विश्वास की कहानी (Faith and Rituals)


लोगों के बीच यह गहरा विश्वास है कि इस तरह देवी मां की पूजा करने से उनकी सारी मुश्किलें हल हो जाती हैं और रुकी हुई मनोकामनाएं पूरी होती हैं। कई लोग इसे एक कठिन मन्नत की तरह देखते हैं जहां वे अपनी पहचान बदलकर देवी के प्रति अपना समर्पण दिखाते हैं। इस त्यौहार के दौरान माहौल इतना भक्तिमय और रंगीन होता है कि असली और नकली पहचान के बीच का फर्क मिट जाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी यहां आने वाले श्रद्धालु इसे पूरे दिल से निभाते हैं, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता का एक अद्भुत उदाहरण पेश करता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। इसका उद्देश्य किसी भी धर्म, समुदाय या परंपरा की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। इन परंपराओं की गहराई और ऐतिहासिक परिपेक्ष्य को पूरी तरह से समझने के लिए आप किसी संबंधित विशेषज्ञों या आधिकारिक स्रोतों से परामर्श करें।

ये भी पढ़ें

Samantha Ruth Prabhu Wedding : सामंथा रूथ प्रभु ने ईशा योग मंदिर में की शादी, जानिए क्यों?
Updated on:
14 Apr 2026 04:14 pm
Published on:
14 Apr 2026 04:08 pm
Also Read
View All