
Sodium Deficiency Symptoms: नमक हमारे रोजाना के खाने का अहम हिस्सा है। हालांकि, सेहत के लिए नमक की सही मात्रा लेना जरूरी है। बहुत ज्यादा नमक खाना भी ठीक नहीं माना जाता और जरूरत से काफी कम नमक लेने से भी कुछ लोगों को परेशानी हो सकती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि खाने में नमक कम करने पर शरीर में क्या असर पड़ सकता है और किन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, सोडियम शरीर में फ्लूड बैलेंस, नसों के काम और मांसपेशियों की गतिविधि में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में शरीर में सोडियम का लेवल बहुत कम होने पर कमजोरी और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। वहीं मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, शरीर में सोडियम का लेवल कम होने पर सिरदर्द, मतली, उल्टी, मांसपेशियों में कमजोरी और ऐंठन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के मुताबिक, खून में सोडियम का लेवल कम होने की स्थिति को हाइपोनेट्रेमिया कहा जाता है। इसमें मांसपेशियों में ऐंठन और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के मुताबिक, हाइपोनेट्रेमिया सिर्फ कम नमक खाने की वजह से नहीं होता। इसके पीछे शरीर में जरूरत से ज्यादा पानी होना, हार्ट फेलियर, किडनी की बीमारी, लिवर सिरोसिस, कुछ हार्मोन से जुड़ी समस्याएं और कुछ न्यूरोलॉजिकल बीमारियां भी हो सकती हैं। इसके अलावा उल्टी या दस्त के कारण शरीर से ज्यादा फ्लूड निकलना, बहुत ज्यादा प्यास लगना, ज्यादा मात्रा में पानी पीना और कुछ दवाएं भी सोडियम का लेवल कम कर सकती हैं। इसके अलावा बहुत ज्यादा शराब पीना भी एक कारण हो सकता है।
सोडियम की जरूरत हर व्यक्ति में एक जैसी नहीं होती। मौसम, शारीरिक गतिविधि और व्यक्ति की हेल्थ कंडीशन के हिसाब से जरूरत बदल सकती है। ध्यान रखें कि जरूरत से ज्यादा सोडियम लेना भी ठीक नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) के अनुसार, वयस्कों को रोजाना 2,000 mg से कम सोडियम लेना चाहिए। वहीं अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (American Heart Association) के अनुसार, वयस्कों को रोजाना 2,300 mg से ज्यादा सोडियम नहीं लेना चाहिए।
थकान, चक्कर या मांसपेशियों में ऐंठन होने पर सिर्फ इन लक्षणों के आधार पर ज्यादा नमक खाना शुरू नहीं करना चाहिए। क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के मुताबिक, कम सोडियम के पीछे कई अलग अलग कारण हो सकते हैं। इसका पता ब्लड और यूरिन टेस्ट से लगाया जा सकता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।