Meditation Concentration: टीवी इंडस्ट्री की खूबसूरती और फिटनेस आइकन मानी जाने वाली श्वेता तिवारी (Shweta Tiwari) ने हाल ही के एक इंटरव्यू में मेडिटेशन के दौरान भटकते मन के बारे में बताया।अगर आपका भी ध्यान लगाते हुए बार-बार दूसरे ख्याल आने लगते हैं, हैं, तो सद्गुरु के ये मेडिटेशन सुझाव आपके लिए बेहद मददगार हो सकते हैं।
Meditation Concentration: टीवी इंडस्ट्री की खूबसूरत और फिटनेस आइकन मानी जाने वाली श्वेता तिवारी ने हाल ही में मशहूर कॉमेडियन भारती सिंह के यूट्यूब चैनल पर इंटरव्यू के दौरान मेडिटेशन को लेकर अपने दिल की बात कही।उन्होंने इंटरव्यू में बताया कि मेडिटेशन के दौरान उनका मन काफी भटकता है। श्वेता की यह बात बहुत से लोगों को अपनी जैसी ही लगेगी।अक्सर लोग मेडिटेशन की शुरुआत तो करते हैं, लेकिन मन की चंचलता उन्हें एकाग्र होने नहीं देती।अगर आपको भी ध्यान लगाते हुए बार-बार दूसरे ख्याल आने लगते हैं, तो आपके लिए सद्गुरु (Sadhguru) के ये सुझाव बेहद मददगार साबित हो सकते हैं।
19527705मशहूर कॉमेडियन भारती सिंह और उनके पति हर्ष लिम्बाचिया के यूट्यूब चैनल 'Bharti TV' पर बातचीत करते हुए श्वेता ने कहा,"जब भी मैं योगा करने बैठती हूं और आंखें बंद करती हूं, तभी मुझे याद आने लगता है कि ग्रॉसरी लानी है, कपड़े धोने हैं और पता नहीं क्या-क्या करना है।"उन्होंने मजाकिया अंदाज में बताया कि उनका मन कभी शांत ही नहीं होता।
सद्गुरु कहते हैं कि ध्यान केवल एक क्रिया नहीं, बल्कि आत्मा से जुड़ने की एक प्रक्रिया है। यह शरीर, मन और आत्मा को संतुलन में लाकर जीवन को सरल, सहज और जागरूक बनाता है।दिन में केवल 10 से 20 मिनट का ध्यान अभ्यास भी आपके अंदर गहरी शांति और ऊर्जा का संचार कर सकता है।
ध्यान लगाने के लिए ऐसी जगह चुनें जहां शांति हो और आपको कोई डिस्टर्ब न करे। यह जगह आपके कमरे का एक कोना भी हो सकती है या फिर घर की छत का कोई शांत हिस्सा।सद्गुरु के अनुसार, सुबह का समय मेडिटेशन के लिए सबसे अनुकूल होता है, क्योंकि तब वातावरण और मन दोनों शांत होते हैं।
ध्यान का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है अपनी सांसों पर ध्यान देना। गहरी सांस लें, उसे महसूस करें और धीरे-धीरे छोड़ें।इस प्रक्रिया को दोहराते हुए आप अपने विचारों से थोड़ा-थोड़ा अलग होते जाते हैं और ध्यान की स्थिति में प्रवेश करते हैं।
सद्गुरु द्वारा सिखाई गई ईशा क्रिया एक बहुत ही आसान और प्रभावी ध्यान विधि है।इसमें आप सांसों के साथ "मैं शरीर नहीं हूं, मैं मन नहीं हूं"का जाप करते हैं।यह आपको आपके भीतर की ऊर्जा और सच्चे स्वरूप से जोड़ती है।यह अभ्यास दिन में दो बार, केवल 12 से 18 मिनट का होता है, लेकिन इसके लाभ जीवनभर महसूस होते हैं।
ध्यान केवल तकनीक नहीं, एक समर्पण है। जब आप ध्यान करने बैठें, तो सभी बाहरी विचारों को एक ओर रख दें और सिर्फ उस क्षण में उपस्थित रहें।सद्गुरु कहते हैं, "ध्यान के परिणाम एक दिन में नहीं दिखते, लेकिन जो धैर्य रखता है, उसे गहराई में उतरने का अनुभव मिलता है।"