
Baby First Bath: नवजात बच्चे के जन्म के बाद हर माता पिता उसके साथ जुड़े छोटे से छोटे पल को खास बनाना चाहते हैं। ऐसे में बच्चे की पहली बाथ को लेकर भी कई सवाल होते हैं कि उसे जन्म के तुरंत बाद नहलाना चाहिए या कुछ समय इंतजार करना बेहतर है। आइए जानते हैं नवजात को पहली बार कब नहलाना चाहिए और पहली बाथ में देरी करने से क्या फायदे हो सकते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) के अनुसार, अगर संभव हो तो नवजात बच्चे को जन्म के कम से कम 24 घंटे बाद पहली बार नहलाना चाहिए। जन्म के तुरंत बाद बच्चे को अच्छी तरह सुखाकर गर्म रखना जरूरी है। बच्चे को ज्यादा ठंड लगने से बचाने के लिए उसके शरीर को ढककर रखना चाहिए। वहीं अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (American Academy of Pediatrics) भी पहली बार नहलाने में 24 घंटे तक इंतजार करने की सलाह देती है। अगर किसी वजह से पूरे 24 घंटे इंतजार करना संभव न हो तो कम से कम 6 घंटे बाद नहलाना चाहिए।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, बच्चे को जन्म के कम से कम 12 घंटे बाद नहलाने से विशेष रूप से सामान्य प्रसव के बाद एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग की दर में बढ़ोतरी देखी गई। करीब 1000 स्वस्थ नवजात बच्चों पर किए गए अध्ययन में देरी से नहलाने की प्रक्रिया शुरू करने के बाद एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग की दर 59.8 प्रतिशत से बढ़कर 68.2 प्रतिशत हुई।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, पहली बार नहलाने में देरी करने से जन्म के शुरुआती घंटों में मां और बच्चे को ज्यादा समय तक स्किन टू स्किन कॉन्टैक्ट का मौका मिल सकता है। इससे दोनों के बीच बॉन्डिंग मजबूत करने और शुरुआती स्तनपान में मदद मिल सकती है। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) भी नवजात को ज्यादा से ज्यादा स्किन टू स्किन कॉन्टैक्ट में रखने की सलाह देता है। खासकर छोटे बच्चों के लिए इसे महत्वपूर्ण माना गया है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (American Academy of Pediatrics) के अनुसार, जन्म के तुरंत बाद नहलाने से कुछ बच्चों के शरीर का तापमान कम हो सकता है। शुरुआती स्नान का तनाव कुछ बच्चों में ब्लड शुगर कम होने की संभावना भी बढ़ा सकता है। क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, नवजात बच्चे अपने शरीर का तापमान अच्छी तरह नियंत्रित नहीं कर पाते। ऐसे में बच्चे को कपड़े उतारकर पानी से नहलाने या गीले कपड़े से साफ करने पर उसे जल्दी ठंड लग सकती है। पहली बार नहलाने में देरी करने से शरीर का तापमान स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (American Academy of Pediatrics) के अनुसार, जन्म के समय बच्चे की त्वचा पर सफेद और मोम जैसी परत होती है, जिसे वर्निक्स कहा जाता है। यह बच्चे की नाजुक त्वचा को नमी देने में मदद करती है और इसमें कुछ एंटीबैक्टीरियल गुण भी हो सकते हैं। इसलिए इसे तुरंत धोने के बजाय कुछ समय तक त्वचा पर रहने देना बेहतर माना जाता है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (American Academy of Pediatrics) के अनुसार, नवजात बच्चे को हर दिन पूरा स्नान कराने की जरूरत नहीं होती। शुरुआती समय में सप्ताह में करीब तीन बार नहलाना पर्याप्त हो सकता है। बहुत ज्यादा बार नहलाने से बच्चे की त्वचा रूखी हो सकती है। वहीं क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, जब तक बच्चे की नाभि का हिस्सा ठीक होकर गिर नहीं जाता, तब तक पूरे शरीर को पानी में डुबोकर नहलाने के बजाय हल्के स्पंज बाथ का विकल्प अपनाया जा सकता है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (American Academy of Pediatrics) के अनुसार, आमतौर पर बच्चे का नाभि का स्टंप एक से दो सप्ताह में गिर जाता है। अगर इससे ज्यादा समय तक यह बना रहता है तो बच्चे के डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) भी बच्चे की नाभि को सूखा रखने और उस पर बिना सलाह के कोई मरहम या दूसरी चीज न लगाने की सलाह देता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।