
Office Chair Butt Kya Hai: लंबे समय तक कुर्सी पर बैठे रहने से शरीर पर कई तरह के असर पड़ सकते हैं। इसी से जुड़ी एक समस्या है ‘ऑफिस चेयर बट। इसमें ज्यादा देर तक बैठने के कारण ग्लूटियल मसल्स पर असर होता है। साथ ही, शरीर के पीछे के भाग के आकार पर भी प्रभाव पड़ता है। जानते हैं कि ‘ऑफिस चेयर बट’ में और क्या होता है? यह क्यों होता है और नहीं हो, इसके लिए रोजमर्रा के जीवन में किन बातों का ध्यान रखा जाना जरूरी है।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, ज्यादा देर तक बैठने से पीछे के हिस्से के आकार पर पड़ने वाले असर के लिए ‘ऑफिस चेयर बट’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। इसके चलते ग्लूटस मैक्सिमस और आसपास के टिश्यू की पर्याप्त कंडीशनिंग न होने से मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं। इससे शरीर के पीछे का भाग अलगे हिस्से की तुलना में सपाट या ढीला दिखाई दे सकता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, यह समस्या ऑफिस की कुर्सी की नहीं है, बल्कि इस बात से जुड़ी है कि व्यक्ति कितनी देर तक बैठा रहता है। लंबे समय तक बैठे रहने से ग्लूटियल मसल्स में कमजोरी के अलावा हिप्स में जकड़न, लोअर बैक में कमजोरी और कंधों के आगे की ओर झुकने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, ज्यादा देर तक बैठे रहने को मोटापे और मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जुड़ी कई स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ा गया है। इनमें हाई ब्लड प्रेशर, हाई ब्लड शुगर, कमर के आसपास ज्यादा फैट और अस्वस्थ कोलेस्ट्रॉल स्तर शामिल हैं। लंबे समय तक बैठे रहने से हार्ट डिजीज और कैंसर से होने वाली मृत्यु का जोखिम भी बढ़ सकता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, इससे बचने के लिए ग्लूट्स की एक्सरसाइज करने के साथ ही दिन में ज्यादा मूवमेंट करना चाहिए। अगर काम के कारण लंबे समय तक डेस्क पर बैठना पड़ता है, तो इसे कम करने के लिए फोन पर बात करते समय खड़े होना, किसी सहकर्मी से ईमेल के बजाय उसके पास तक जाकर बात करना, लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करना, थोड़ा दूर स्थित टॉयलेट का इस्तेमाल करना, सिट-स्टैंड डेस्क का उपयोग करना या डेस्क के नीचे वॉकिंग पैड का इस्तेमाल करना जैसे विकल्प अपनाए जा सकते हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।