
How Much Water To Drink With Pills: दवा खाते समय गोली या कैप्सूल मुंह में रखते ही कई लोगों को गले में अटकने, पानी पीने के बाद भी गोली नीचे न जाने या दवा उगलने जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे में अगर आपको भी दवा खाते समय परेशानी होती है तो कुछ टिप्स अपनाकर इसे थोड़ा आसान बनाया जा सकता है। आइए जानते हैं गोली निगलने को आसान बनाने के लिए क्या किया जा सकता है और दवा खाते समय कितना पानी पीना चाहिए।
ज्यादातर गोलियां पानी के साथ ली जाती हैं। गोली मुंह में रखने के बाद पर्याप्त पानी पीने से उसे निगलना आसान हो सकता है। कुछ दवाएं खाने या दूसरी ड्रिंक के साथ भी ली जा सकती हैं, लेकिन यह हर दवा के लिए सही नहीं होता। इसलिए किसी भी गोली को पानी की जगह दूध, जूस या दूसरी चीज के साथ लेने से पहले दवा के पैकेट पर दिए निर्देश जरूर देखें। अगर समझ नहीं आ रहा है कि दवा किस तरह लेनी है तो फार्मासिस्ट से पूछ सकते हैं। इसके अलावा डॉक्टर अरशद खान पुणे द्वारा इंस्टाग्राम पर शेयर वीडियो के अनुसार, दवा खाते समय एक से डेढ़ गिलास पानी पी सकते हैं।
गोली निगलते वक्त कई लोग अनजाने में अपना सिर पीछे की तरफ कर लेते हैं, लेकिन ऐसा करने से गोली निगलना और मुश्किल हो सकता है। इंग्लैंड की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के अनुसार, गोली निगलते समय सिर और गर्दन को आरामदायक पोजीशन में रखना बेहतर है। गोली को सीधे गले के अंदर फेंकने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए और सिर को बहुत ज्यादा पीछे की तरफ ले जाने से बचना चाहिए। गोली निगलते समय शरीर को थोड़ा आगे की तरफ झुकाने से कुछ लोगों को इसे आसानी से निगलने में मदद मिल सकती है।
अगर गोली निगलने में परेशानी हो रही है तो उसे पीसकर पानी में मिलाकर या कैप्सूल खोलकर लेना आसान लग सकता है। लेकिन ऐसा हर दवा के साथ नहीं किया जा सकता। कुछ दवाओं को पीसने या कैप्सूल खोलने से उनका असर बदल सकता है और दवा सही तरीके से काम नहीं कर सकती। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के गोली को पीसना, तोड़ना या कैप्सूल खोलना नहीं चाहिए।
अगर आपको बार बार गोली निगलने में दिक्कत होती है तो आप इस बारे में डॉक्टर से बात करके दवा के दूसरे ऑप्शन के बारे में पता कर सकते हैं। कुछ दवाएं लिक्विड या घुलने वाली टैबलेट के रूप में भी मिल सकती हैं, जिससे गोली निगलने में होने वाली परेशानी कम हो सकती है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।