
Power Of Forgiveness: किसी अपने से मिली चोट को भूल पाना आसान नहीं होता। कई बार इंसान बाहर से सामान्य दिखता है, लेकिन मन में पुरानी बात, गुस्सा या शिकायत बनी रहती है। समय बीतने के बाद भी वही बात बार बार याद आती है और मन को परेशान करती है। ऐसे में सवाल उठता है कि किसी को माफ करना आखिर इतना मुश्किल क्यों होता है और क्या माफ करने का मतलब उस घटना को भूल जाना है। ऐसे समय में क्या माफी दवा बन सकती है। इसको लेकर अलग अलग आध्यात्मिक शिक्षाओं में क्षमा से जुड़ी कई ऐसी बातें बताई गई हैं, जो मन में जमा पुरानी कड़वाहट को समझने में मदद कर सकती हैं। आइए जानते हैं।
इंसान कई बार पुरानी चोट और दुख को अपने मन में पकड़े रहता है। वह घटना खत्म हो चुकी होती है, लेकिन उसके बारे में बार बार सोचने से पुरानी चोट मन में बनी रहती है। ओशो के अनुसार, सिर्फ यह कोशिश करना कि अब मैं माफ कर देता हूं, वास्तविक माफी नहीं हो सकती। जबरदस्ती माफ करने की कोशिश करने से व्यक्ति अपनी भावनाओं को दबा सकता है। इसलिए पहले यह समझना जरूरी है कि मन पुराने दुख और चोट को क्यों पकड़े हुए है। बीती बातों में उलझे रहने के बजाय वर्तमान में जागरूक होकर जीने पर ध्यान देना चाहिए। इससे पुरानी चोटों और दुखों की पकड़ धीरे धीरे कम हो सकती है।
सद्गुरु के अनुसार माफ करने का मतलब किसी घटना को भूल जाना नहीं है। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति को माफ करने का मतलब यह है कि उस घटना की कड़वाहट को अपने अंदर लेकर न चलें। क्योंकि मन में किसी के प्रति कड़वाहट बनाए रखना आखिरकार हमारे अपने जीवन को प्रभावित करता है। इसलिए घटना को याद रखते हुए भी उसके प्रति मन में कड़वाहट न रखना ही माफी का एक तरीका हो सकता है।
सद्गुरु के अनुसार, हमारी याददाश्त हमारे अनुभवों से सीखने के लिए होती है। अगर किसी अप्रिय घटना को पूरी तरह भूल जाएंगे तो उससे मिली सीख भी भूल सकते हैं और आगे उसी तरह की स्थिति का सामना दोबारा करना पड़ सकता है। इसलिए घटना को याद रखना जरूरी है, लेकिन उस याद को बार बार मन में दोहराकर कड़वाहट पैदा करना ठीक नहीं है। सद्गुरु के अनुसार जब कोई अप्रिय घटना होती है तो हमारे सामने दो रास्ते होते हैं। हम उस घटना से खुद को आहत मानकर उसी दुख में फंसे रह सकते हैं या फिर उस अनुभव से कुछ सीख सकते हैं। उनके अनुसार समस्या सिर्फ जीवन में हुई घटना नहीं है, बल्कि उस घटना के साथ हम अपने मन में क्या कर रहे हैं, यह भी महत्वपूर्ण है।
श्री श्री रवि शंकर के अनुसार किसी को माफ करना करुणा दिखाने से जुड़ा है। सिर्फ यह इंतजार करना कि सामने वाला पहले माफी मांगे, माफी का एक सीमित रूप है। उनके अनुसार इससे आगे बढ़कर यह समझना जरूरी है कि सामने वाले से गलती अज्ञानता के कारण हुई हो सकती है। ऐसी समझ के साथ किसी को माफ करने में करुणा की भावना आती है। माफी मांगना भी उतना ही जरूरी है। जब कोई व्यक्ति अपनी गलती को पहचानकर माफी मांगता है तो वह यह स्वीकार करता है कि उससे गलती हुई है और वह उसे दोबारा न दोहराने का संकल्प लेता है।