Republic Day Special: इस गणतंत्र दिवस इंडिया गेट की भीड़ छोड़ें और भारत की इन 5 अनसुनी और ऐतिहासिक जगहों की सैर करें। तवांग के वॉर मेमोरियल से लेकर पंजाब के हुसैनीवाला बॉर्डर तक, जानें इन जगहों का गौरवशाली इतिहास।
Republic Day Special: 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस का नाम आते ही हमारे मन में दिल्ली के कर्तव्य पथ की परेड और झांकियों की तस्वीर सामने आने लगती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के नक्शे पर कुछ ऐसी ऐतिहासिक और अनसुनी जगह भी हैं, जिनकी मिट्टी में आजादी के संघर्ष और वीरता की दास्तां आज भी सुनाती है? अगर आप इस बार कुछ अलग एक्सपीरियंस करना चाहते हैं, तो इन 5 आइकॉनिक जगहों को जरूर देखें, जहां का माहौल आपको उन दिनों की याद दिला सकता है।
अगर आप पहाड़ों और देशभक्ति का मिक्सचर देखना चाहते हैं, तो तवांग का युद्ध स्मारक सबसे बेस्ट जगह है।1962 के युद्ध के वीरों को समर्पित यह स्मारक समुद्र तल से हजारों फीट ऊपर स्थित है। यहां राइफलमैन जसवंत सिंह रावत की अमर कहानी सुनकर आपकी आंखें नम हो जाएंगी और सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा।
अमृतसर का वाघा बॉर्डर तो हर कोई जाता है, लेकिन फिरोजपुर स्थित हुसैनीवाला बॉर्डर बहुत खास है। यह वही जगह है जहां भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का अंतिम संस्कार किया गया था। यहां की रिट्रीट सेरेमनी में जो जोश और आक्रामकता दिखती है, वह वाघा बॉर्डर से कहीं अधिक देशभक्ति वाली फील देती है।
पुणे का यह आलीशान महल भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी की जेल बना था। आज यह एक राष्ट्रीय स्मारक है। यहां की शांति और गांधी जी की निजी वस्तुएं आपको भारत की अहिंसक क्रांति की से रूबरू कराती हैं।
गणतंत्र दिवस पर इस किले की यात्रा आपको उस पहली क्रांति (1857) की याद दिलाएगी, जिसने भारत के गणराज्य बनने का रास्ता साफ किया था। 'खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी…' यह पंक्तियां झांसी के किले की दीवारों पर आज भी जीवंत महसूस होती हैं। यहां के जम्पिंग पॉइंट को देखना एक अलग ही रोमांच हो सकता है।
पोर्ट ब्लेयर की सेल्युलर जेल आज भी उन क्रांतिकारियों के बलिदान की गवाह है, जिन्होंने काला पानी की असहनीय यातनाओं को झेला था। यहां की सावरकर कोठरी और शाम को होने वाला लाइट एंड साउंड शो आपको इतिहास के उस दौर में ले जाएगा, जिसे शब्दों में बयां करना शायद बहुत मुश्किल है।