Rupee vs Dollar Impact on Common Man Lifestyle : जब भी रुपया गिरता है और डॉलर महंगा होता है, तो इसका असर आम आदमी की जिंदगी पर भी पड़ता है।
Indian Rupee Falling Impact in Hindi: डॉलर के मुकाबले रुपये की लगातार गिरती कीमत ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है। अभी के विनिमय दर के अनुसार, 1 अमेरिकी डॉलर (USD) का मूल्य 95.88 भारतीय रुपये (INR) के बराबर है। ऐसे में जब डॉलर 95 या 96 के पार निकलकर 100 रुपये के आंकड़े की तरफ बढ़ता है। इसका सीधा मतलब होता है कि अब रुपये की वैल्यू कम हो रही है और किचन के बजट से लेकर बच्चों की पढ़ाई तक सब कुछ महंगा होने वाला है।
आइए समझते हैं कि इससे आम आदमी के रोजमर्रा की जिंदगी पर क्या और कैसे असर पड़ेगा।
कच्चा तेल महंगा खरीदने का सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ता है। ऐसे में जब ईंधन महंगा होता है, तो सामान ढोने वाले ट्रकों का किराया बढ़ जाता है, जिसकी वजह से मंडियों में आने वाली सब्जी, फल और राशन का सामान भी महंगा हो जाता है। यानी रुपये की गिरावट आपके घर की थाली का पूरा बजट बिगाड़ सकती है।
रुपये के कमजोर होने का असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल पर ही नहीं बल्कि गैजेट्स पर भी पड़ता है। इसलिए अगर आप नया स्मार्टफोन, लैपटॉप या स्मार्ट टीवी खरीदने की सोच रहे हैं, तो ये बजट बिगाड़ सकता है।
देश में बिकने वाले ज्यादातर इलेक्ट्रॉनिक सामान के कलपुर्जे (Parts) विदेशों से आयात किए जाते हैं। ऐसे में डॉलर महंगा होने से इन सामानों को बनाने की लागत बढ़ जाती है, जिसका बोझ अंत में कंपनियों द्वारा ग्राहकों पर ही डाला जाता है। यानी आने वाले दिनों में मोबाइल से लेकर डेली यूज के लगभग सभी गैजेट्स के दाम बढ़ सकते हैं।
गैजेट्स की तरह ही घरेलू उपयोग के सामान जैसे फ्रिज, एसी और वॉशिंग मशीन की कीमतों पर भी दबाव बढ़ेगा। चूंकि इन अप्लायंसेज के भी कई पार्ट्स बाहर से मंगवाए जाते हैं, इसलिए डॉलर की मजबूती आपके घर के बजट को प्रभावित करेगी और आने वाले दिनों में ये चीजें महंगी हो सकती हैं।
भारत में रहने वालों के साथ-साथ उन परिवारों के लिए भी यह बड़ी चिंता का विषय है जिनके बच्चे विदेश में पढ़ रहे हैं। उन्हें कॉलेज की फीस और वहां रहने का खर्चा डॉलर में चुकाना होता है। रुपये की इस गिरावट की वजह से एजुकेशन लोन का बोझ और मासिक खर्च करीब 10 से 15% तक बढ़ सकता है, जिससे मिडिल क्लास परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा।
विदेश घूमने का प्लान बनाने वालों के लिए भी यह किसी झटके से कम नहीं है। फ्लाइट टिकट से लेकर वहां होटल की बुकिंग तक, सब कुछ अब काफी महंगा हो सकता है। दरअसल, इंटरनेशनल ट्रैवल का ज्यादातर खर्च डॉलर पर आधारित होता है, ऐसे में छुट्टियों का बजट भी जेब पर भारी पड़ सकता है।
बाजार में बढ़ती महंगाई को काबू करने के लिए रिजर्व बैंक (RBI) अक्सर ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है। अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो आपके होम लोन और कार लोन की ईएमआई (EMI) भी बढ़ जाएगी। यानी एक तरफ महंगाई की मार होगी और दूसरी तरफ बैंक को दी जाने वाली किश्त भी बढ़ जाएगी।
रुपये के कमजोर होने का सबसे पहला असर पेट्रोल-डीजल पर पड़ेगा। दरअसल, भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% कच्चा तेल विदेशों से मंगवाता है और इसका भुगतान डॉलर में ही करना होता है। ऐसे में रुपया कमजोर होने का मतलब है कि सरकार और तेल कंपनियों को वही तेल खरीदने के लिए अब कहीं ज्यादा रुपये खर्च करने होंगे, जिससे पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ना तय है। अपनी गाड़ी से ट्रैवल करें या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से, ये आपके लिए महंगा हो सकता है।