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Side Effects of Green Peas: शाकाहारियों का प्रोटीन खजाना हरी मटर, लेकिन इन 5 लोगों के लिए हो सकता है खतरा

Side Effect of Green Peas: हरे मटर का नाम सुनते ही मटर पुलाव, मटर पनीर और स्वादिष्ट पराठे याद आ जाते हैं, जो स्वाद और पोषण दोनों में लाजवाब हैं। लेकिन कुछ खास बीमारियों से ग्रस्त लोगों को हरे मटर से बचना चाहिए, वरना ये सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं।

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Jan 05, 2026
Who Should Avoid Green Peas|फोटो सोर्स – Gemini@Ai

Side Effects of Green Peas: हरी मटर एक बेहतरीन और पोषण से भरपूर शाकाहारी प्रोटीन स्रोत मानी जाती है, जो स्वास्थ्य के लिए कई लाभ प्रदान करती है। लेकिन, हर खाद्य पदार्थ की तरह, हरी मटर के भी कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, जो खासकर कुछ लोगों के लिए समस्या पैदा कर सकते हैं। आइए जानते हैं कौन-कौन से 5 लोग हैं, जिन्हें हरी मटर का सेवन करते समय सावधानी बरतनी चाहिए।

हरी मटर, प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत

हरी मटर को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में होते हैं, इसलिए शाकाहारी डाइट में इसका खास स्थान है। यह मांसपेशियों को मजबूत बनाने, पाचन तंत्र को बेहतर करने और शरीर को ऊर्जा देने में मदद करती है। इसके अलावा, हरी मटर में एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं, जो शरीर को फ्री रैडिकल्स से बचाने में सहायक होते हैं।

किडनी से जुड़ी समस्या वाले लोग

अगर आपकी किडनी कमजोर है या यूरिक एसिड बढ़ा हुआ रहता है, तो हरी मटर आपके लिए नुकसानदेह हो सकती है। मटर में प्यूरिन्स पाए जाते हैं, जो शरीर में जाकर यूरिक एसिड को बढ़ा सकते हैं। इससे किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और गाउट या किडनी स्टोन की समस्या बढ़ सकती है। गठिया के मरीजों को भी मटर सीमित मात्रा में ही खानी चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना सबसे सुरक्षित रहता है।

पेट की समस्या से जूझ रहे लोग

हरी मटर में फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है। आमतौर पर यह पाचन के लिए अच्छा है, लेकिन जिन लोगों को गैस, पेट फूलना, एसिडिटी या IBS (इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम) की समस्या रहती है, उनके लिए मटर भारी साबित हो सकती है। ज्यादा फाइबर से पेट में सूजन, ऐंठन और असहजता बढ़ सकती है। ऐसे लोगों को मटर कम मात्रा में या पूरी तरह पकाकर ही खानी चाहिए।

डायबिटीज के मरीज

मटर का ग्लाइसेमिक इंडेक्स भले ही ज्यादा न हो, लेकिन इसमें नैचुरल शुगर और कार्बोहाइड्रेट मौजूद होते हैं। जरूरत से ज्यादा मटर खाने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है। डायबिटीज के मरीजों को मटर को अपनी डाइट में संतुलन के साथ शामिल करना चाहिए और मात्रा पर खास ध्यान देना चाहिए। बेहतर होगा कि डाइटीशियन या डॉक्टर से सलाह लेकर ही इसे नियमित रूप से खाएं।

दालों या लेग्यूम से एलर्जी वाले लोग

अगर आपको मूंगफली, चना, राजमा या अन्य दालों से एलर्जी है, तो हरी मटर भी आपको रिएक्शन दे सकती है। मटर भी लेग्यूम फैमिली से आती है। कुछ लोगों में मटर खाने से खुजली, स्किन रैश, सूजन या सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत मटर खाना बंद कर देना चाहिए।

सख्त वेट लॉस डाइट फॉलो करने वाले लोग

जो लोग कीटो या बहुत लो-कार्ब डाइट पर हैं, उनके लिए हरी मटर सही विकल्प नहीं है। इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अच्छी होती है, जो वजन घटाने की प्रक्रिया को धीमा कर सकती है। अगर आप सिर्फ कैलोरी कंट्रोल वाली डाइट पर हैं, तो थोड़ी मात्रा में मटर ली जा सकती है, लेकिन कीटो डाइट में इसे पूरी तरह अवॉइड करना ही बेहतर होता है।

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