लाइफस्टाइल

वर्कप्लेस का साइलेंट गेम, बिना निकाले नौकरी से बाहर? जानिए क्या होता है Quiet Firing

Quiet Firing In Office: आज के कॉरपोरेट वर्ल्ड में एक नया लेकिन खामोश ट्रेंड चर्चा में है, जिसे Quiet Firing कहा जाता है। इसमें कर्मचारी को सीधे नौकरी से नहीं निकाला जाता, बल्कि हालात ऐसे बना दिए जाते हैं कि वह खुद ही इस्तीफा देने पर मजबूर हो जाए।

2 min read
Jan 10, 2026
Office Politics Trend|फोटो सोर्स – Patrika.com

Quiet Firing: ऑफिस में कभी-कभी खामोशी सबसे बड़ा मैसेज बन जाती है। जब ईमेल्स का जवाब मिलना बंद हो जाए, मीटिंग्स बिना बताए आगे बढ़ने लगें और आपकी जिम्मेदारियां धीरे-धीरे कम होने लगें, तो यह महज इत्तेफाक नहीं होता। आज के वर्कप्लेस में इसे एक नए और गंभीर ट्रेंड के रूप में पहचाना जा रहा है, जिसे क्वायट फायरिंग कहा जाता है। बिना किसी नोटिस या साफ बातचीत के, कर्मचारी को खुद ही नौकरी छोड़ने की स्थिति में ला देना यही इस साइलेंट गेम की असली पहचान है।

ये भी पढ़ें

Apple Salary Shock: ₹234 करोड़ सालाना! UP में जन्मे सबीह खान बने Apple के हाईएस्ट पेड एग्जीक्यूटिव

Quiet Firing आखिर होता क्या है?

क्वायट फायरिंग एक मैनेजमेंट स्ट्रैटेजी है, जिसमें कर्मचारी से जिम्मेदारियां छीनी जाने लगती हैं। अहम मीटिंग्स से बाहर रखा जाता है, नए प्रोजेक्ट नहीं दिए जाते, फीडबैक मिलना बंद हो जाता है और करियर ग्रोथ पर बातचीत गायब हो जाती है। कर्मचारी कंपनी में तो रहता है, लेकिन उसका रोल लगभग खत्म कर दिया जाता है। संदेश साफ होता है, लेकिन कहा नहीं जाता “आप यहां जरूरी नहीं हैं।”

आज क्यों ज्यादा दिख रहा है ये ट्रेंड?

रिमोट वर्क, हाइब्रिड मॉडल और बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता ने क्वायट फायरिंग को आसान बना दिया है। आमने-सामने बातचीत कम होने से मैनेजर्स के लिए टकराव से बचना सरल हो गया है। सीधे निकालने में जहां कानूनी झंझट, डॉक्यूमेंटेशन और मुआवजे का सवाल होता है, वहीं क्वायट फायरिंग में ये सब नहीं करना पड़ता।

Quiet Firing के संकेत क्या हैं?

अगर आपको अचानक काम कम मिलने लगे, आपके आइडिया अनसुने किए जाएं, प्रमोशन या अप्रेजल पर चुप्पी हो, या मैनेजर आपसे संवाद ही न करे तो ये क्वायट फायरिंग के संकेत हो सकते हैं। ये एक घटना नहीं, बल्कि समय के साथ बनने वाला पैटर्न होता है।

कर्मचारी पर क्या असर पड़ता है?

इसका सबसे गहरा असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। बिना किसी साफ वजह के खुद को बेकार समझने लगना, आत्मविश्वास कम होना और हर समय उलझन में रहना ये सब क्वायट फायरिंग के आम संकेत हैं। कई बार लोग इसे अपनी नाकामी मान लेते हैं, जबकि असल परेशानी व्यक्ति में नहीं, बल्कि सिस्टम में होती है।

कंपनियों के लिए क्यों खतरनाक है?

शॉर्टकट समझा जाने वाला यह तरीका, आगे चलकर कंपनी के वर्क कल्चर पर बुरा असर डालता है। टीम में डर और अविश्वास बढ़ता है, और लीडरशिप की साख कमजोर होती है। एक स्वस्थ संगठन वही होता है, जो मुश्किल बातचीत से भागे नहीं, बल्कि ईमानदारी से उसे संभाले।

ये भी पढ़ें

Dating Trends 2026: मंडे को सोना, सैटरडे को मोना, भारत में प्यार सिर्फ ‘बैकअप प्लान’? जानिए क्या है रोस्टर डेटिंग

Published on:
10 Jan 2026 02:50 pm
Also Read
View All

अगली खबर