Kattu Ka Aata: व्रत के दौरान कट्टू का आटा का इस्तेमाल कई घरों में आम है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ परिस्थितियों में यह आटा आपकी सेहत के लिए खतरा भी बन सकता है? सही समय और तरीके से इसका सेवन करना बहुत जरूरी है। इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि कब और […]
Kattu Ka Aata: व्रत के दौरान कट्टू का आटा का इस्तेमाल कई घरों में आम है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ परिस्थितियों में यह आटा आपकी सेहत के लिए खतरा भी बन सकता है? सही समय और तरीके से इसका सेवन करना बहुत जरूरी है। इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि कब और कैसेकट्टू का आटा खतरनाक हो सकता है, और किन लोगों को इसे खाने से बचना चाहिए।
कुट्टू को अक्सर चावल या गेहूं समझ लिया जाता है, जबकि यह एक छद्म अनाज (Pseudo grain) है। यह मुख्य रूप से ठंडे और पहाड़ी इलाकों में उगता है। इसका वैज्ञानिक नाम Fagopyrum esculentum है।कुट्टू में प्रोटीन, फाइबर और कुछ जरूरी मिनरल्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, इसी वजह से इसे व्रत में खाया जाता है। हालांकि, इसमें नमी जल्दी पकड़ने की क्षमता होती है, जिससे यह खराब भी जल्दी हो सकता है।
कुट्टू का आटा बीमारियों की सबसे बड़ी वजह बन सकता है, खासकर अगर यह पुराना, एक्सपायर्ड, या गलत तरीके से स्टोर किया गया हो, या फिर इसमें मिलावट की गई हो। अगर आटे में नमी चली जाए, तो इसमें बैक्टीरिया और फंगस पनप सकते हैं। यही कारण है कि कई बार व्रत के दौरान लोग फूड पॉइजनिंग, उल्टी-दस्त या पेट दर्द जैसी शिकायतों का सामना करते हैं।
कुट्टू के आटे को ज्यादा समय तक संभालकर रखना ठीक नहीं माना जाता। विशेषज्ञों के अनुसार, कुट्टू का आटा अधिकतम 5–6 महीने तक ही सुरक्षित रहता है, और इससे ज्यादा समय तक रखा गया आटा खाने से बचना चाहिए। बेहतर यही है कि कुट्टू को साबुत खरीदकर घर में ही जरूरत के अनुसार पिसवाएं और उसे एयरटाइट डिब्बे में रखें, ताकि इसकी ताजगी और गुणवत्ता बनी रहे।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।