
Dehydration: उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह के बदलाव होने लगते हैं और इनमें पानी की जरूरत और प्यास महसूस करने की क्षमता में बदलाव भी शामिल है। बुजुर्गों में कई बार शरीर को पानी की जरूरत होने के बावजूद प्यास का एहसास कम हो सकता है। ऐसे में पर्याप्त पानी नहीं पीने से डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी का खतरा बढ़ जाता है। गर्मी, बीमारी, अधिक पसीना आना और कुछ दवाएं इस समस्या को और बढ़ा सकती हैं। इसलिए उम्र बढ़ने के साथ शरीर को हाइड्रेट रखना सेहत के लिए खास तौर पर जरूरी हो जाता है। आइए जानते हैं उम्र बढ़ने के साथ डिहाइड्रेशन का खतरा क्यों बढ़ता है, इसके कौन से लक्षण दिखाई दे सकते हैं और शरीर में पानी की कमी से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ प्यास महसूस होने की क्षमता कम हो सकती है। इसका मतलब है कि शरीर को पानी की जरूरत होने के बावजूद व्यक्ति को तुरंत प्यास महसूस नहीं होती। इस वजह से कई बुजुर्ग पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ नहीं लेते हैं। इसके अलावा, उम्र बढ़ने के साथ शरीर में पानी की मात्रा और तरल पदार्थ को बनाए रखने की क्षमता कम हो सकती है। इसके चलते शरीर में पानी की मात्रा कम होने और प्यास का संकेत कमजोर होने से बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन का जोखिम बढ़ सकता है। कुछ दवाएं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी इस खतरे को बढ़ा सकती हैं।
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, प्यास हमेशा यह पता लगाने का भरोसेमंद तरीका नहीं है कि शरीर को पानी की जरूरत है या नहीं। खासकर बुजुर्गों को डिहाइड्रेशन होने तक प्यास महसूस नहीं हो सकती। इसलिए गर्म मौसम या बीमारी के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थ लेना जरूरी हो जाता है।
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, वयस्कों में डिहाइड्रेशन होने पर बहुत ज्यादा प्यास लगना, सामान्य से कम पेशाब आना, पेशाब का रंग गहरा होना, थकान, चक्कर आना और भ्रम की स्थिति जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। बुजुर्गों में इन लक्षणों पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, पर्याप्त पानी नहीं पीना डिहाइड्रेशन का एक सामान्य कारण है। इसके अलावा दस्त, उल्टी, बुखार, ज्यादा पसीना आना और गर्म या उमस भरे मौसम में अधिक शारीरिक गतिविधि करने से भी शरीर से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। कुछ दवाएं, खासकर ज्यादा पेशाब कराने वाली दवाएं, भी डिहाइड्रेशन का जोखिम बढ़ा सकती हैं।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, उम्रदराज लोगों में डिहाइड्रेशन के शुरुआती लक्षण कई बार आसानी से पहचान में नहीं आते। इसलिए थकान, मुंह का सूखना, चक्कर आना और कमजोरी जैसे लक्षणों को कभी-कभी उम्र बढ़ने या दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ दिया जाता है। इसके चलते गंभीर स्थिति में भ्रम, चलने में परेशानी और तेज धड़कन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, बुजुर्गों के लिए पूरे दिन नियमित रूप से तरल पदार्थ लेते रहने के अलावा प्यास लगने का इंतजार करने के बजाय पानी पीने की आदत बनाना बेहतर हो सकता है। छोटे अंतराल पर थोड़ी मात्रा में पानी पीना भी दिनभर हाइड्रेशन बनाए रखने में मदद कर सकता है। वहीं, मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, पानी के साथ अधिक पानी वाले फल और सब्जियां भी तरल पदार्थ की जरूरत पूरी करने में योगदान दे सकते हैं।
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, गंभीर डिहाइड्रेशन में तुरंत चिकित्सा उपचार की जरूरत पड़ सकती है। यदि व्यक्ति तरल पदार्थ रोक नहीं पा रहा है, लगातार दस्त हो रहे हैं, भ्रम या अत्यधिक सुस्ती दिखाई दे रही है या अन्य गंभीर लक्षण मौजूद हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।