लखनऊ

नकुड़ रैली से पश्चिमी यूपी साधेगी बसपा: आकाश आनंद ने संभाली कमान, दलित-मुस्लिम-पिछड़ा समीकरण पर जोर

Akash Anand Saharanpur Rally: सहारनपुर का राजनीतिक इतिहास बसपा के लिए बेहद खास रहा है; यह वही जिला है जिसकी हरौड़ा विधानसभा सीट से बसपा सुप्रीमो मायावती पहली बार विधायक चुनकर राज्य की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री बनी थीं।
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Updated: 2 Nov 2026, 5:40 PM IST
Akash Anand
बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद (Photo: IANS/Yuvnish)

UP Assembly Election 2027 BSP: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सियासी बिसात बिछने लगी है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद के नेतृत्व में पार्टी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपना आक्रामक अभियान शुरू कर दिया है। सहारनपुर के नकुड़ में आयोजित विशाल जनसभा के जरिए बसपा ने अपना शक्ति प्रदर्शन किया।


सहारनपुर जिले के नकुड़ विधानसभा अंतर्गत सौराणा गांव में आयोजित यह मेगा रैली केवल एक जनसभा नहीं, बल्कि बसपा का शंखनाद है। सहारनपुर का राजनीतिक इतिहास बसपा के लिए बेहद खास रहा है; यह वही जिला है जिसकी हरौड़ा विधानसभा सीट से बसपा सुप्रीमो मायावती पहली बार विधायक चुनकर राज्य की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री बनी थीं। पिछले कुछ चुनावों में आए सियासी उतार-चढ़ाव के बाद, बसपा अपने इस ऐतिहासिक और पारंपरिक गढ़ में दोबारा अपनी खोई हुई जमीन हासिल करने की पुरजोर कोशिश कर रही है।

स्थानीय राजनीतिक समीकरण और नकुड़ सीट

नकुड़ विधानसभा सीट हमेशा से पश्चिमी यूपी की हाई-प्रोफाइल सीटों में गिनी जाती है। जनसभा के दौरान स्थानीय जातीय समीकरणों को साधने पर विशेष जोर दिया गया, जहां पूर्व विधायक नरेश कुमार सैनी जैसे बड़े चेहरों की भूमिका और प्रभाव की चर्चा गर्म रही। पार्टी सैनी, गुर्जर, मुस्लिम और दलित मतों का एक मजबूत सामाजिक ताना-बाना बुनना चाहती है। रैली में उमड़ी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भारी भीड़ ने यह साबित किया कि जमीनी स्तर पर पार्टी का कैडर बेस अभी भी पूरी तरह सक्रिय और उत्साहित है।

आकाश आनंद के भाषण और सियासी तेवर

मंच संभालते ही आकाश आनंद ने बेहद आक्रामक तेवर दिखाए। उन्होंने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की नीतियों पर तीखे प्रहार किए, साथ ही समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को भी कठघरे में खड़ा किया। आकाश आनंद का मुख्य ध्यान युवाओं, शोषितों और वंचित वर्ग पर केंद्रित रहा। उन्होंने रोजगार, शिक्षा और सुरक्षा के मुद्दों पर नए नैरेटिव गढ़ते हुए नए दौर के वोटर्स को बसपा की विचारधारा से जोड़ने का आह्वान किया।

पश्चिमी यूपी का सियासी परिदृश्य और जातीय समीकरण

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का राजनीतिक परिदृश्य हमेशा से जटिल रहा है। बसपा यहां अपने पारंपरिक 'दलित-मुस्लिम-पिछड़ा' (D-M-OBC) समीकरण को फिर से पुनर्जीवित करने में जुटी है। हालांकि, राह आसान नहीं है। इस क्षेत्र में एक तरफ सपा-कांग्रेस (INDIA ब्लॉक) का मजबूत गठबंधन है, तो दूसरी तरफ आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के चंद्रशेखर आजाद भी दलित युवाओं के बीच अपनी पैठ बना चुके हैं। ऐसे में अपनी सियासी जमीन को बचाए रखना और बढ़ाना बसपा के लिए बड़ी परीक्षा है।

आकाश के सामने चुनौतियां

आकाश आनंद के इस दौरे का मुख्य मकसद केवल भाषण देना नहीं, बल्कि बूथ स्तर पर संगठन को पुनर्गठित करना है। निष्क्रिय पड़ी बूथ कमेटियों में नई ऊर्जा फूंकने और कैडर को एकजुट करने के लिए यह यात्रा मील का पत्थर मानी जा रही है। पिछले कुछ चुनावों में बसपा के वोट शेयर में जो गिरावट आई है, उससे उबरना और जनता के बीच 'मायवती के सुशासन' का विश्वास दोबारा कायम करना पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।