लखनऊ

भतीजे ने फिर चाचा को किनारे किया, लोहिया ट्रस्ट के फैसले पर बीजेपी का करारा तंज

Shivpal Yadav Replaced Lohia Trust President: लोहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष पद से शिवपाल सिंह यादव की छुट्टी हो गई है और अब अखिलेश यादव इसके नए अध्यक्ष बन गए हैं। इस बदलाव पर भारतीय जनता पार्टी ने तंज कसते हुए 2017 की पारिवारिक कलह याद दिलाई है।
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Sep 14, 2026
Akhilesh Yadav Lohia Trust
लोहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष बने अखिलेश यादव (photo- chatgtp)

Akhilesh Yadav Lohia Trust Chairman: समाजवादी पार्टी में एक और बड़ा संगठनात्मक बदलाव हुआ है। सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल सिंह यादव से लोहिया ट्रस्ट की अहम जिम्मेदारी वापस ले ली है। अब अखिलेश यादव खुद लोहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष बन गए हैं। इस फैसले पर भारतीय जनता पार्टी ने सपा पर करारा तंज कसा है और 2017 के पारिवारिक विवाद की यादें ताजा कर दी हैं।

लोहिया ट्रस्ट की कमान अब अखिलेश के हाथ

कुछ दिन पहले हुई लोहिया ट्रस्ट की बैठक में अखिलेश यादव को अध्यक्ष बनाए जाने का फैसला लिया गया। ट्रस्ट के सभी आठ सदस्यों ने इस पर सहमति जताई, जिनमें शिवपाल यादव भी शामिल थे। साल 2017 से लगातार शिवपाल सिंह यादव इस ट्रस्ट के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब अखिलेश यादव के पास समाजवादी पार्टी की कमान के साथ-साथ लोहिया ट्रस्ट और जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट दोनों की जिम्मेदारी आ गई है।

2017 के विवाद की यादें ताजा

साल 2017 में सपा परिवार में हुए बड़े विवाद के दौरान तत्कालीन संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने प्रोफेसर रामगोपाल यादव को हटाकर शिवपाल यादव को लोहिया ट्रस्ट की जिम्मेदारी सौंपी थी। लोहिया ट्रस्ट का गठन समाजवादी पार्टी की स्थापना से पहले हुआ था। इसका उद्देश्य समाजवादी विचारधारा का प्रचार-प्रसार और पार्टी के लिए फंड जुटाना रहा है। ट्रस्ट के सदस्यों में अखिलेश यादव, शिवपाल यादव, दीपक मिश्रा, आदित्य यादव, राम नरेश यादव (इटावा), राम सेवक यादव, वीरपाल यादव (बरेली) और राजेश यादव शामिल हैं।

बीजेपी का तंज

इस बदलाव पर बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने सपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लगता है सपा में फिर बवाल शुरू होने वाला है। त्रिपाठी ने कहा कि डॉ. राम मनोहर लोहिया कभी परिवारवादी नहीं रहे, लेकिन उनके नाम पर बने ट्रस्ट को परिवार का अड्डा बना दिया गया है, जो लोहिया का अपमान है। उन्होंने तंज कसा कि भतीजे ने चाचा को हटाकर फिर कमान अपने हाथ में ले ली है। इससे 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा में हुए पारिवारिक विवाद की यादें ताजा हो गई हैं।

सियासी गलियारों में चर्चा

इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कई लोग इसे अखिलेश यादव द्वारा पार्टी की वैचारिक और संस्थागत विरासत पर अपनी पकड़ और मजबूत करने के रूप में देख रहे हैं। वहीं कुछ इसे चाचा-भतीजे के बीच पुराने समीकरणों में बदलाव का संकेत मान रहे हैं। हालांकि शिवपाल यादव की सहमति से यह फैसला हुआ है, इसलिए फिलहाल इसे टकराव की बजाय अखिलेश के नेतृत्व को स्वीकार करने के रूप में भी देखा जा रहा है।
अखिलेश यादव अब सपा की राजनीतिक कमान के साथ दो अहम ट्रस्टों पर भी नियंत्रण रखते हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस बदलाव को पार्टी की आंतरिक मजबूती का प्रयास माना जा रहा है।

Updated on:
14 Sept 2026 08:28 pm
Published on:
14 Sept 2026 08:28 pm